varanasi Muslim dominated area Now a closed temple has been opened many Shivling found during cleaning अब बनारस के मुस्लिम बहुल इलाके में बंद मंदिर प्रशासन ने खुलवाया, सफाई में कई शिवलिंग मिले, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अब बनारस के मुस्लिम बहुल इलाके में बंद मंदिर प्रशासन ने खुलवाया, सफाई में कई शिवलिंग मिले

संभल समेत यूपी के कई जिलों में बंद पड़े मंदिरों को खोलने के क्रम में अब बनारस के भी मुस्लिम बहुल इलाके में बंद शिव मंदिर को खोला गया है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के बीच खोले गए मंदिर में सफाई कार्य शुरू हुआ। सफाई शुरू होते ही मंदिर के अंदर से पांच शिवलिंग मिले हैं।

Wed, 8 Jan 2025 10:57 PMYogesh Yadav हिन्दुस्तान, वाराणसी, वरिष्ठ संवाददाता।
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अब बनारस के मुस्लिम बहुल इलाके में बंद मंदिर प्रशासन ने खुलवाया, सफाई में कई शिवलिंग मिले

संभल समेत यूपी के कई जिलों में बंद पड़े मंदिरों को खोलने के क्रम में अब बनारस के भी मुस्लिम बहुल इलाके में बंद शिव मंदिर को खोला गया है। बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के बीच खोले गए मंदिर में सफाई कार्य शुरू हुआ। सफाई शुरू होते ही मंदिर के अंदर से पांच शिवलिंग मिले हैं। इनमें से एक शिवलिंग खंडित है। पिछले दिनों हिंदू संगठन के लोग यहां पर पहुंचे थे और मंदिर को खोलने की मांग की थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने कहा था कि मंदिर में पूजा का अधिकार हिन्दू समाज को है। समाज के लोग दर्शन-पूजन करें। स्थानीय लोगों को इससे कोई आपत्ति नहीं है। केवल शांति व्यवस्था का उल्लंघन न हो। प्रशासन ने मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को दे दी है।

संभल में मंदिर खोजने के बाद यूपी के अलग अलग जिलों में भी इसी तरह से मंदिरों को हिंदू संगठन के लोगों ने खोजना और उसमें पूजा पाठ शुरू करने की मुहिम शुरू की है। इसी कड़ी में 17 दिसम्बर को वाराणसी में मुस्लिम बहुल गोल चबूतरा (मदनपुरा) स्थित मकान नंबर डी- 31/65 के पास बंद मंदिर के पास सनातन रक्षक दल के कार्यकर्ता पहुंचे और वहां पूजा शुरू कराने की मांग करने लगे।

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पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मुआयना के बाद मंदिर के स्वामित्व की जांच का हवाला देते हुए संगठन के लोगो को शांत करा दिया था। पिछले दिनों सदर तहसील और नगर निगम के दस्तावेजों की जांच में मंदिर वाले भवन को मकान का हिस्सा नहीं माना गया। मंदिर जिस भवन से सटा है, उसका बैनामा एक हिन्दू परिवार ने 1992 में मुस्लिम परिवार को किया था। तब से मुस्लिम परिवार वहां रह रहा है। हालांकि मंदिर में न तो कोई क्षति पहुंचाई गई और न ही कोई अवैध निर्माण कराया गया।

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जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने विगत दिनों बंद मंदिर में दर्शन-पूजन शुरू कराने के लिए स्थानीय लोगों के साथ वार्ता की थी। कहीं से कोई आपत्ति नहीं आने पर बुधवार को एडीएम सिटी आलोक वर्मा और एसीपी दशाश्वमेध धनंजय मिश्रा पुलिस फोर्स और सफाईकर्मियों की टीम के साथ पहुंचे। मंदिर का पट खोला गया और सफाई कार्य शुरू हुआ। मंदिर में सफाई के बाद आस्थावान पहुंचे और शिवलिंग के साथ ही अंदर गंगा जल से धुलाई की। मंदिर के कपाट की मरम्मत की गई। फिर पुन: ताला लगवा दिया गया।

महिलाओं ने किया शंखनाद, लगे हर-हर महादेव के जयकारे

मंदिर का कपाट खुलते ही महिलाओं ने शंखनाद किया तो मौजूद लोगों ने ‘हर-हर महादेव’ का घोष किया। दोपहर में मंदिर का पट खुलने के पहले से शाम तक हिंदू संगठनों के लोग मौके पर रहे। इस मंदिर की महत्ता, पौराणिक महत्व को लेकर चर्चा करते रहे।

शिवलिंग की बनावट अति प्राचीन

शिवलिंग की बनावट और इस्तेमाल पत्थर सैकड़ों साल पूर्व निर्मित शिवलिंग से मिलते जुलते हैं। शिवलिंग और अर्घा की बनावट इसकी प्राचीनता बयां कर रही है।

चाभी विहिप नेता राजेश मिश्रा को सौंपी गई

मदनपुरा में मिले सिद्धेश्वर मंदिर की चाभी विहिप के काशी महानगर (उत्तर) के अध्यक्ष अधिवक्ता राजेश मिश्र को सौंपी गई। विहिप के विभाग मंत्री कन्हैया सिंह ने कहा कि इस मंदिर में दर्शन पूजन से सिद्धियां प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। पास ही सिद्धेश्वर कूप है जिसके जल से प्राचीन मंदिर में जलाभिषेक किया जाता था।

विहिप के सह प्रांत मंत्री सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि मकर संक्रांति के बाद काशी के विद्वानों के साथ बैठक कर मंदिर में दर्शन पूजन की विधियों पर चर्चा होगी। विद्वानों की बताई विधियों से खंडित शिवलिंग के स्थान पर पहले नये शिवलिंग की स्थापना कराई जाएगी। वहीं सनातन रक्षक दल के नेता अजय शर्मा का कहना था कि यह सनातनियों की जीत है। सिद्धेश्वर मंदिर में जल्द ही पूजा शुरू होगी।

मदनपुरा में दिखी काशी की तासीर

बीते 17 दिसंबर को बंद पड़े सिद्धेश्वर मंदिर का मामला सामने आने के बाद से बुधवार को सफाई होने तक की प्रक्रिया के दौरान मदनपुरा में काशी के सांप्रदायिक सौहार्द की तासीर दिखी। बुधवार को सफाई के दौरान मुस्लिम वर्ग के लोग भी सहयोग में जुटे थे। निकट ही एखलाक के मकान से बिजली की आपूर्ति के जरिये मंदिर के कपाट की मरम्मत कराई गई। मौके पर प्रशासनिक कार्यवाही को लेकर किसी तरह का असंतोष नहीं दिखा।

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