बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर की गड़बड़ियां दूर करें, यूपीपीसीएल चेयरमैन के सख्त निर्देश
उत्तर प्रदेश पॉवर काॅरपोरेशन के चेयरमैन ने बिजली कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खामियों को दूर करें। मीटर कंपनियों को साफ कर दिया गया है कि वे पहले लगे हुए मीटरों में आ रही दिक्कतें दूर करें।

यूपी पॉवर कॉरपोरेशन चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मीटरों की खामियों को दूर करें। उन्होंने बताया कि अब तक लगाए गए मीटरों में से करीब दो प्रतिशत में दिक्कतें आ रही हैं। मीटर कंपनियों को साफ कर दिया गया है कि वे पहले लगे हुए मीटरों में आ रही दिक्कतें दूर करें।
डॉ. गोयल ने कहा कि समीक्षा में पाया गया कि करीब दो प्रतिशत मीटरों में अलग-अलग दिक्कतें आ रही हैं। कंपनियों से बात की गई और उन्हें सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। उनसे कहा गया है कि वे दिक्कतों को फौरन दूर करवाएं क्योंकि उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मीटर कंपनियों ने आश्वस्त किया है कि जहां कहीं भी दिक्कत आ रही है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त कर लिया जाएगा।
डॉ. गोयल ने कहा कि अगर इसके बाद भी मीटर लगाने वाली कंपनियां उपभोक्ताओं की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त नहीं करती हैं तो उन पर सख्ती होगी। उन्होंने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की गति तेज की जाएगी। हालांकि, उसमें किसी तरह की खामी नहीं होनी चाहिए।
प्रीपेड मीटरों में बहुत गड़बड़ियां, उपभोक्ता परेशान
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि प्रीपेड मीटरों में बहुत गड़बड़ियां हैं। उपभोक्ता बहुत परेशान हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन इसे किसी भी तरह से नजरअंदाज न करे। अगर ऐसा हुआ तो उसकी प्रीपेड मीटर लगाने वाली योजना ही फेल हो जाएगी। ऐसे में 27 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का क्या ही नतीजा निकलेगा। अवधेश ने कहा कि तकरीबन 40 लाख मीटर लग चुके हैं।
पूर्वांचल में 3,605 मामले ऐसे आए, जिनमें सुबह 8 से लेकर रात 10 बजे तक रीडिंग शून्य रही। पूर्वांचल में उसी मीटर कंपनी के 1896 मामले ऐसे थे, जिनमें 15 दिनों से रीडिंग लगातार शून्य थी। इसी कंपनी ने 1218 ऐसे मीटर लगाए, जिनमें करंट तो था लेकिन वोल्टेज शून्य था। अवधेश ने कहा कि वर्ष 2012 में भी इसी कंपनी के मीटरों में तकनीकी खामियां मिली थीं। आईआईटी कानपुर से मीटरों की जांच करवाई गई थी। वैसी ही खामियां अभी भी दिख रही हैं।




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