न्यूरो की मरीज का अर्थो में ऑपरेशन, BHU अस्पताल में गंभीर लापरवाही से हुई मौत से हड़कंप
वाराणसी के बीएचयू (BHU) ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण एक महिला मरीज की जान चली गई। न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती मरीज की ऑर्थोपेडिक विभाग के ऑपरेशन थिएटर में भेज दिया गया, जहां डॉक्टरों ने बिना जांचे उनकी सर्जरी कर दी।

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा एक मरीज को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ा। न्यूरो सर्जरी विभाग में ऑपरेशन का इंतजार कर रही महिला का आर्थोपेडिक में डॉक्टरों ने सर्जरी कर दी। ऑपरेशन के दौरान ही डॉक्टरों को अपनी गलती का एहसास हो गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इससे मरीज की मौत हो गई। मरीज के परिजनों ने चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक से शिकायत की और जांच कराकर इंसाफ मांगा। घटना ने मरीज सुरक्षा प्रोटोकॉल और संस्थागत जवाबदेही को लेकर व्यापक चिंता पैदा कर दी है।
मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। यहां भी लापरवाही देखने को मिली। कमेटी में आर्थोपेडिक्स के एक चिकित्सक का भी नाम था जो खुद आरोपी टीम के सदस्य बताए जाते हैं। अब दूसरी जांच समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। निदेशक ने नई कमेटी बनाकर विस्तृत जांच का निर्देश दिया है।
सूत्र बताते हैं कि राधिका नाम की एक मरीज न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती थी और इसी नाम की दूसरी मरीज ऑर्थोपेडिक्स विभाग में थी। न्यूरोसर्जरी विभाग की मरीज को ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर में पहुंचा दिया गया। हद तो तब हो गई जब बिना छानबीन के उसका ऑपरेशन ऑर्थोपेडिक विभाग की टीम ने शुरू कर दिया। ऑपरेशन थियेटर में सर्जन और उनके सहयोगियों ने मरीज में समस्या खोजने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला क्योंकि मरीज की बीमारी न्यूरोसर्जरी से संबंधित थी।
उसी समय ऑर्थोपेडिक टीम को अपनी गलती का अहसास हुआ और आनन-फानन में मरीज को न्यूरोसर्जरी वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद उत्पन्न जटिलताओं के कारण मरीज की मौत हो गई। इतनी बड़ी लापरवाही तब हुई है जब पिछले ही साल ट्रॉमा सेंटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलीकरण का उद्घाटन हो चुका है।
परिजनों ने इंसाफ मांगा
आईएमएस-बीएचयू के निदेशक को लिखित शिकायत में पीड़ित पक्ष ने बताया है कि 71 वर्षीय महिला मरीज को रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर के उपचार के लिए न्यूरोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया था। सात मार्च 2026 को जब मरीज की न्यूरो सर्जरी निर्धारित थी, तब उसे ऑर्थोपेडिक्स ओटी में ले जाया गया। टीम ने मरीज का ऑपरेशन किया। उसी समय चिकित्सकीय स्टाफ को यह अहसास हुआ कि गलत मरीज का ऑपरेशन कर दिया गया है। इसके बाद मरीज को फिर से न्यूरो सर्जरी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
ओटी से लौटने के बाद मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। मरीज को स्मृति ह्रास, दौरे, जबड़े में जकड़न, मुंह में अल्सर और सांस लेने में कठिनाई जैसी जटिलताओं का सामना करना पड़ा। 27 मार्च 2026 को उसे सांस संबंधी दिक्कत हुई और कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट के बाद मौत हो गई।
अस्पताल के प्रोटोकॉल की अनदेखी की गई
घटना ने अस्पताल के प्रोटोकॉल, विशेषकर मरीज की पहचान, प्री-ऑपरेटिव सत्यापन और ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था पर ही प्रश्न चिह्न लगा दिया है। विभागों में समन्वय पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता ने दुर्व्यवहार, उपचार में देरी का भी आरोप लगाया है।
व्यक्तिगत और प्रणालीगत खामियों की है देन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रुटि नहीं, बल्कि प्रणालीगत खामियों की ओर संकेत करती हैं। मरीज की पहचान सत्यापन, सर्जिकल साइट मार्किंग और प्री-ऑपरेटिव चेकलिस्ट जैसे मानक अनिवार्य किए गए हैं। फिर सवाल है कि ऐसी गंभीर लापरवाही कैसे हो गई।




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