SIR में नगर निगम की लापरवाही, 15 हजार सफाई कर्मियों में एक भी बांग्लादेशी नहीं मिला
राजधानी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान के लिए शुरू किया गया अभियान नगर निगम की लापरवाही के चलते फुस्स होता नजर आ रहा है। हालात ये हैं कि नगर निगम के पास शहर की सफाई में लगे 15 हजार आउटसोर्स सफाई कर्मियों की कोई समेकित सूची ही मौजूद नहीं है।

राजधानी में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान के लिए शुरू किया गया अभियान नगर निगम की लापरवाही के चलते फुस्स होता नजर आ रहा है। हालात ये हैं कि नगर निगम के पास शहर की सफाई में लगे 15 हजार आउटसोर्स सफाई कर्मियों की कोई समेकित सूची ही मौजूद नहीं है। जब कर्मचारियों का नाम-पता और पहचान ही दर्ज नहीं है, तो जांच कैसे होगी कि इनमें कोई विदेशी नागरिक तो नहीं है।
नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठेकेदारों और निजी कंपनियों के हाथों में है। अरबों रुपये के ठेके लेने वाली इन कंपनियों ने हजारों कर्मियों को तैनात कर रखा है, लेकिन उनकी जानकारी निगम के पास नहीं है। नगर निगम केवल कंपनियों को पत्र लिखकर औपचारिकता निभा रहा है। न आधार कार्ड की सूची है, न पुलिस सत्यापन का रिकॉर्ड और न ही कर्मचारियों के पते तथा फोन नम्बर दर्ज हैं।
10 हजार कर्मियों में एक का भी विवरण नहीं
राजधानी में लखनऊ स्वच्छता अभियान के नाम से काम कर रही एक बड़ी कंपनी के साथ कुछ छोटे ठेकेदारों के ही लगभग 10 हजार सफाई कर्मचारी बताए जाते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी कर्मचारी का पूरा विवरण नगर निगम के पास उपलब्ध नहीं है।
एटीएस को भी नहीं मिली सूची
बांग्लादेशी और रोहिंग्या की पहचान में एटीएस भी जुटी है। एटीएस ने नगर निगम से सफाई कर्मियों की सूची मांगी थी, लेकिन वह कर्मचारियों का विवरण देने में असमर्थ रहा।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने भी जताई नाराजगी
नगर स्वास्थ्य अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि 25 सितंबर को आउटसोर्सिंग से तैनात सफाई कर्मियों का पुलिस सत्यापन कराकर सूची देने के आदेश दिए गए थे। फिर भी आज तक सत्यापन नहीं हुआ हैं।
अफसरों ने मानी मजबूरी
नगर निगम के जोनल सेनेटरी अधिकारी पंकज शुक्ल ने कहा कि उनके पास आउटसोर्स एजेंसियों के कर्मचारियों का पूरा विवरण नहीं है। उन्होंने बताया कि एटीएस की टीम जब जानकारी लेने आई तो उनके पास देने के लिए सूची ही नहीं थी। मजबूरी में ठेकेदारों और एजेंसियों के संपर्क नंबर साझा किए। एटीएस से कहा गया है कि वह ठेकेदारों से सूची ले ले।
झुग्गियों में पहचान अधूरी
मुख्यमंत्री के निर्देश पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या की झुग्गी-झोपड़ियों को चिन्हित करने का आदेश भी दिया गया था। लेकिन अब तक एक भी झुग्गी क्षेत्र को आधिकारिक रूप से चिन्हित नहीं किया जा सका है। अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह ने जोनल अधिकारियों और जोनल सेनेटरी अधिकारियों को दोबारा पत्र लिखकर तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।




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