स्टांप और ई-स्टांप में फर्जीवाड़ा रोकने को बनेगी नीति, यूपी सरकार ने शुरू की तैयारी, बनी समिति
यूपी में अब स्टांप पेपर और ई-स्टांप के फर्जीवाड़े पर शिकंजा कसा जाएगा। इसे रोकने के लिए यूपी सरकार नीति बनाएगी। इस संबंध में निबंधन विभाग के आठ अफसरों की विशेष समिति गठित की गई है।

स्टांप पेपर और ई-स्टांप के फर्जीवाड़े पर शासन स्तर से शिकंजा कसेगा। इसे लेकर प्रदेश सरकार नई नीति बनाएगी। निबंधन विभाग के आठ अफसरों की विशेष समिति गठित की गई है, जो विचार-विमर्श और दूसरे राज्यों की नीतियों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। प्रदेश में करोड़ों के स्टांप और ई-स्टांप घोटाले के बाद अब सरकार ने इस फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने की तैयारी कर ली है।
प्रदेश स्तर पर नई और सुरक्षित नीति बनाने के लिए शासन द्वारा आठ सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है। इस समिति का नेतृत्व अपर आयुक्त स्टांप मनीन्द्र कुमार सक्सेना को सौंपा गया है। इस समिति में मेरठ के एआईजी स्टांप नवीन कुमार शर्मा, बुलंदशहर के एआईजी स्टांप संत कुमार रावत सहित शासन स्तर के कुल आठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
समिति संयोजक लखनऊ के एआईजी स्टांप रमेश चंद्र को बनाया गया है। समिति को स्टांप बिक्री की प्रक्रिया में खामियों को पहचानने और ई-स्टांपिंग प्रणाली को अभेद्य बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति पूरे प्रदेश के लिए एक समान और सुरक्षित स्टांप नीति का मसौदा तैयार करेगी। समिति इस बात पर जोर देगी कि भविष्य में स्टांप पेपर की क्लोनिंग या फर्जी ई-स्टांप जेनरेट करना नामुमकिन हो।
मेरठ में हो चुका है करोड़ों का फर्जी स्टांप घोटाला
हाल के दिनों में मेरठ समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में करोड़ों रुपये का स्टांप घोटाला उजागर हुआ था। जालसाजों ने तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर फर्जी ई-स्टांप के जरिए सरकार को राजस्व का भारी चूना लगाया। इसी को देखते हुए शासन ने मौजूदा सिस्टम को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। मेरठ में फर्जी स्टांप के 1500 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।




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