यूपी: ब्राह्मण समाज के प्रबुद्ध समागम में जुटीं BJP-कांग्रेस की हस्तियां; फरसा लिए अलंकार ने लगाए नारे
आयोजक ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज की समस्याओं पर चर्चा करने के साथ ही समाज को एकता के सूत्र से जोड़ना है। सवर्णों के साथ हो रहे अन्याय, अत्याचार और बदले की भावना से होने वाली कार्रवाईयों पर चर्चा की जानी है। सभी राजनीतिक दलों के सवर्ण नेताओं को प्रबुद्ध समागम का न्योता भेजा गया था।

UP News: यूपी की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शनिवार को प्रदेश की सियासत का एक नया रंग देखने को मिला। यहां ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित प्रबुद्ध समागम में भाजपा और कांग्रेस की कई हस्तियां जुटीं। अलग-अलग पार्टियों के ये वरिष्ठ नेता एक साथ मंच साझा करते नज़र आए। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम का न्योता सभी दलों से जुड़े नेताओं को भेजा गया था। कार्यक्रम में यूजीसी के नए कानून (जिस पर फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का स्टे है) और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान के खिलाफ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री भी नजर आए। हाथ में भगवान परशुराम का शस्त्र प्रतीक फरसा लिए अलंकार ने नारे भी लगाए। कार्यक्रम में भाजपा के राज्यसभा सांसद और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, कांग्रेस के यूपी प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सहित कई वरिष्ठ नेता मंच पर विराजमान नजर आए।
कार्यक्रम के आयोजक अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने इस मौके पर मीडिया से बातचीत में कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज की समस्याओं पर चर्चा करने के साथ ही समाज को एकता के सूत्र से जोड़ना है। सवर्णों के साथ हो रहे अन्याय, अत्याचार और बदले की भावना से होने वाली कार्रवाईयों पर कार्यक्रम में चर्चा की जानी है। मिली जानकारी के अनुसार आयोजकों की ओर से सभी राजनीतिक दलों के सवर्ण नेताओं को प्रबुद्ध समागम का न्योता भेजा गया था।
ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि हम अपने सम्मान, अधिकार और भावी पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से यहां चर्चा के लिए जुटे हैं। देश में हमें यूजीसी एक्ट जैसे कानून नहीं चाहिए। ऐसा एक्ट पास होते समय ताली बजाने वाले सांसद-विधायकों का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट सवर्ण समाज को मिटाने का एक कुचक्र है। इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि इससे किसी छात्र का अहित नहीं होने दिया जाएगा, यदि उनकी बात सही है तो इसे वापस ले लें। जब देश में पहले से दलित एक्ट का प्रावधान चल रहा था तो यूजीसी एक्ट क्यों लाया गया। इसकी क्या आवश्यकता पड़ गई?
कार्यक्रम में कहा गया कि जब यूजीसी कानून पास हुआ तो सवर्ण नेता ताली बजा रहे थे। ऐसे लोग सिर्फ राजनीति कर रहे हैं। जब ब्राह्मणों पर अत्याचार हो रहा था तब भी सवर्ण समाज के नेताओं ने क्या किया? यूजीसी एक्ट के खिलाफ समाज के विधायकों-सांसदों ने आवाज नहीं उठाई। उनकी जीत या हार से समाज को क्या लाभ होगा?




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