यूपी के इस जिले में 34 हजार लोगों का डाटा संदिग्ध, खंड विकास अधिकारियों की 15 टीमें करेंगी जांच
यूपी के बाराबंकी जिले में 34 हजार लोगों का डाटा संदिग्ध मिला है। जांच के लिए जिले में खंड विकास अधिकारियों की 15 टीमें गठित कर दी हैं। 15 दिनों में जांच कर रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।

यूपी के बाराबंकी जिले की 32 लाख की आबादी में हजारों लोगों को पीएम आवास दिए गए। सर्वे में एक लाख 13 हजार से अधिक परिवार बेघर मिले थे, जिनमें 34 हजार लोगों का डाटा संदिग्ध पाया गया है। जांच के लिए जिले में खंड विकास अधिकारियों की 15 टीमें गठित कर दी हैं। 15 दिनों में जांच कर रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास का सर्वे 31 दिसंबर 2024 से शुरू हुआ था, जो 15 मई 2025 तक पूरा हुआ था। सर्वेक्षण में पात्र व्यक्ति भी स्व सर्वे कर रहे थे। वहीं, 403 सर्वेयर डोर-टू डोर सर्वे कर गरीबों का चयन किया था। जिले की 1155 ग्राम पंचायतों के 1831 राजस्व गांवों में स्वयं और सर्वेयर के माध्यम से हुए सर्वेक्षण में एक लाख 13 हजार लोग चिह्नित हुए थे। आवास प्लस एप डाटा अपलोड हुआ था, जिसमें से लगभग 34 हजार डाटा संदिग्ध मिला है। यह अपात्र या गलत जानकारी के साथ भरे गए आवेदन हो सकते हैं। इसकी जांच के लिए परियोजना निदेशक राकेश कुमार सिंह ने 15 टीमें गठित कर दी हैं।
इसमें खंड विकास अधिकारी और ब्लाक के विभिन्न विभागों के सहायक विकास अधिकारियों को टीम में शामिल किया गया है। यह 15 दिनों में जांच पूरी कर ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करेंगे। परियोजना निदेशक राकेश कुमार सिंह ने बताया कि एक लाख 13 हजार पात्र सर्वे में मिले थे, जिनमें 34 हजार डाटा संदिग्ध मिला है। जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि यह कैसा डाटा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत प्रदेश के दो लाख लाभार्थियों के बैंक खातों में दो करोड़ रुपये की धनराशि हस्तांतरित की गई। विभिन्न निकायों के 1330 लाभार्थियों को एक लाख की पहली किस्त मुख्यमंत्री ने वन क्लिक के माध्यम से लखनऊ से भेजी। सीधा प्रसारण नगर पालिका परिषद नवाबगंज में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने लाभार्थियों को आवास का पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि यह योजना पूरी तरह निशुल्क है। इसमें विभिन्न निकायों के 308 से अधिक लाभार्थी शामिल हुए। हैदरगढ़ विधायक दिनेश रावत और जिला पंचायत अध्यक्ष राजरानी रावत, प्रभारी जिला नगरीय परियोजना अधिकारी डूडा संजय शुक्ला, मिशन प्रबंधक गरिमा सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी राकेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
वर्ष 2019 में पीएम सर्वे हुआ था, उसमें महज 82 हजार परिवार निकले थे। प्रत्येक वर्ष सरकार आवास बनाने का लक्ष्य देती गई और छंटनी होती गई। लगभग 50 हजार ही पात्र निकले और अन्य अपात्र निकल गए थे। जिले में 16 हजार 354 ऐसे लोग थे, जिन्होंने स्वयं सर्वे किया है। इन लोगों ने सर्वे के दौरान घर बैठे मोबाइल से आवेदन किया है। आवास प्लस एप खोलकर घर की आनलाइन फोटो अपलोड कर नाम, पता, ब्लाक और जिला और हैसियत भरी है। इन्होंने अपने आपको पात्र बताया है। इनकी जांच कर रिपोर्ट आवास प्लस पर अपलोड हो चुकी है।




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