अयोध्या राम मंदिर ध्वजारोहण के लिए 20 नंवबर से होगा अनुष्ठान, निकलेगी भव्य कलश यात्रा
यूपी के अयोध्या राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का अनुष्ठान मार्ग शीर्ष कृष्ण अमावस्या दिन गुरुवार तदनुसार 20 नवम्बर को कलश यात्रा के साथ शुरू होगा। इस कलश यात्रा में मुख्य यजमान के रूप में सपत्नीक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डा अनिल मिश्र शामिल होंगे।

यूपी के अयोध्या राम मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का अनुष्ठान मार्ग शीर्ष कृष्ण अमावस्या दिन गुरुवार तदनुसार 20 नवम्बर को कलश यात्रा के साथ शुरू होगा। यह कलश राम मंदिर में हुई दूसरी प्राण प्रतिष्ठा जिसमें राम मंदिर के प्रथम तल व शेषावतार मंदिर के अलावा परकोटे के छह मंदिरों में अलग-अलग देवी-देवताओं के विग्रहों की प्रतिष्ठा पूजन किया गया था, की तर्ज पर होगा। इस कलश यात्रा में मुख्य यजमान के रूप में सपत्नीक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी डा अनिल मिश्र शामिल होंगे। उनके साथ अन्य यजमान भी सम्मिलित रहेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार कलश यात्रा के लिए 108 पीत वस्त्र धारी महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। इन सभी आमंत्रित महिलाओं का आधार कार्ड भी जमा कराया जा रहा है जिससे श्रीराम जन्मभूमि परिसर में प्रवेश के उपरांत उन सभी को रामलला का दर्शन भी सुलभ कराया जा सके। बैंड बाजा व राम रथ के साथ निकलने वाली इस कलश यात्रा की अग्रिम पंक्ति में युवा कार्यकर्ताओं की टोली भगवा ध्वज लेकर सम्मिलित होगी।
यह भगवा ध्वज ध्वजारोहण समारोह को भी प्रतिबिम्बित करेगा। कारसेवक पुरम स्थित वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि कलश यात्रा के लिए अपराह्न ढ़ाई बजे का समय निर्धारित किया गया है। बताया गया कि गुरुवार को अमृत काल का समय अपराह्न 2.14 से 4.02 बजे तक है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग भी 20 नवम्बर को पूर्वाह्न 10.58 बजे से शुरू होकर 21 नवम्बर को अपराह्न 1.55 बजे तक रहेगा। इसके कारण गुरुवार को ही कलश यात्रा के साथ अनुष्ठान शुरू हो जाएगा।
विविध ग्रंथों के पारायण के अलावा होंगे हवन-पूजन
राम मंदिर में आयोजित ध्वजारोहण समारोह का विधिपूर्वक शुभारम्भ 21 नवम्बर को चतुर्वेद ओं व विविध ग्रंथों के पारायण के साथ शुरू होने वाले पांच दिवसीय अनुष्ठान के दौरान हवन-पूजन भी किए जाएंगे। यह सभी कार्यक्रम श्रीराम जन्मभूमि में स्थित यज्ञमंडप में होंगे। इस अनुष्ठान में भी अयोध्या व काशी समेत दक्षिण भारत के 108 वैदिक विद्वानों को आमंत्रित किया गया है।
ध्वजारोहण का मुहूर्त काशी के ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने निकाला है। बताया गया कि पहले दिन चतुर्वेदों के पारायण के समानांतर यज्ञ कुंड में गणपति पूजन, पुण्याहवाचन, नंदी श्राद्ध, मंडल पीठों की स्थापना, अरणि मंथन से अग्निदेव की स्थापना, नवग्रह पूजन, प्रतिष्ठित होने वाले देव विग्रहों के मंत्रों से हवन, यज्ञमंडप के चारों द्वारों का पूजन एवं अलग-अलग सूक्तों का पारायण एवं विविध अनुष्ठान संपादित कराए जाएंगे। इस अनुष्ठान के लिए सभी वैदिक आचार्यों का आगमन 19 नवम्बर को होगा।




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