UP Assembly Session, Supplementary Budget Discussion on Vande Mataram CM Yogi, Akhilesh Yadav, SP protest UP Assembly: संपूर्ण भारत की आत्मा का स्वर है वंदे मातरम, विधानसभा में बोले सीएम योगी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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UP Assembly: संपूर्ण भारत की आत्मा का स्वर है वंदे मातरम, विधानसभा में बोले सीएम योगी

यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन योगी सरकार ने अनुपूरक बजट पेश कर दिया। वहीं, सपा ने कफ सिरप पर चर्चा की मांग करते हुए वेल में आकर हंगामा किया। प्रश्न काल के दौरान भी कफ सिरप का मामला उठा और योगी के जवाब पर वाकआउट भी कर दिया। इसके बाद वंतेमारतम पर चर्चा हुई।

Mon, 22 Dec 2025 08:23 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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UP Assembly: संपूर्ण भारत की आत्मा का स्वर है वंदे मातरम, विधानसभा में बोले सीएम योगी

यूपी की योगी सरकार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन योगी सरकार ने अनुपूरक बजट पेश कर दिया। इससे पहले ही समाजवादी पार्टी ने कफ सिरप को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सपा ने कफ सिरप पर चर्चा की मांग की और वेल में चले आए। स्पीकर सतीश महाना ने चेतावनी देकर सभी को समझाया और प्रश्नकाल शुरू हुआ। इसी दौरान सीएम योगी के जवाब से असंतुष्ट होकर सपा ने वाकआउट भी किया।

दरअसल कफ सिरप पर ही पूछे गए सवाल पर सीएम योगी ने कह दिया कि देश के अंदर दो नमूने हैं। एक दिल्ली में और एक लखनऊ में बैठते हैं। जब कोई महत्वपूर्ण चर्चा होती है तो वह देश छोड़कर भाग जाते हैं। यही आपके बबुआ के साथ भी हो रहा होगा। वह भी देश से इंग्लैंड के सैर सपाटे पर जाएंगे और आप चिल्लाते रहेंगे। योगी ने भले किसी का नाम नहीं लिया लेकिन सपा नेताओं ने इसी पर हंगामा शुरू कर दिया और विधानसभा से वाकआउट कर गए। इससे पहले विधानसभा के बाहर भी सपा विधायकों ने पोस्टर बैनर के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। सपा विधायकों ने मांग की कि इसमें शामिल सभी को गिरफ्तार किया जाए। राज्य सरकार इसकी निष्पक्ष जांच कराये और दोषियों को जेल भेजे। लंच के बाद संसदीय मंत्री सुरेश खन्ना ने वंतेमारतम पर चर्चा के लिए प्रस्ताव रखा, जिसे स्वीकार किया गया। वंदे मातरम क्यों जरूरी है, सीएम योगी ने विधानसभा में विस्तार से बताया।

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06.05: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायक उमाशंकर सिंह ने कहा कि वंदेमातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में अपनाने का नर्णिय संविधान सभा ने लिया था। उन्होंने कहा कि यह गीत संस्कृत और बांग्ला भाषा में लिखा गया और कई बार अंग्रेजों ने इस पर प्रतिबंध लगाया, क्योंकि वे इसकी ताकत से डरते थे। उमाशंकर सिंह ने कहा कि जितना भय अंग्रेजों में था, उतनी ही आग इस गीत ने क्रांतिकारियों के दिलों में भरी। सदन में हुई इस चर्चा के दौरान वंदेमातरम् को आज़ादी की लड़ाई का प्रतीक, राष्ट्रीय एकता और साझा सांस्कृतिक विरासत के रूप में रेखांकित किया गया।

05.45: सपा विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि वंदेमातरम् का नाम आते ही मन देशभक्ति से भर जाता है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति जहां से शुरू हुई, वहीं से इस चर्चा में शामिल होना एक सुखद संयोग है। अतुल प्रधान ने कहा कि संविधान सभा ने सर्वसम्मति से वंदेमातरम् को राष्ट्रगीत के रूप में स्वीकार किया था और यह देश की साझा पहचान है।

05.30: समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने कहा कि जिस दौर में पूरा देश अंग्रेजों की गुलामी झेल रहा था, उसी समय बंगाल से वंदेमातरम् की आवाज़ उठी, जो आज़ादी की लड़ाई का हथियार बनी। उन्होंने कहा कि वंदेमातरम् किसी जाति या धर्म विशेष का नहीं, बल्कि पूरे देश की भावना है। सोनकर ने सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि आज राष्ट्रगीत की मर्यादा पर चर्चा जरूरी है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने सदन में एक देशभक्ति गीत भी गाया, जिसे सदस्यों ने गंभीरता से सुना। वंदे मातरम् का अर्थ है वंदन मां की। भारत मां की वंदना। किसी भी मां की वंदना उसके बच्चों को दुख पहुंचाकर के और उसके बच्चों के साथ अत्याचार करके कभी नहीं की जा सकती। यह सरकार की कैसी वंदना है, जहां मां के बच्चों के साथ हर रोज अत्याचार हो रहा है। हम इस देश में आई लव कृष्ण, आई लव जीसस, आई लव वाहे गुरु कह सकते हैं लेकिन इस प्रदेश में आई लव मोहम्मद कहने पर बच्चों के गिरफ्तार कर लिया जा रहा है। क्या ये है वंदे मातरम्. आज प्रदेश के युवा जब रोजगार मांग रहा है तो उस पर डंडे बरसाए जा रहे हैं।

05.20: यूपी के डिप्टी चीफ मिनिस्टर ब्रजेश पाठक ने सोमवार को राज्य विधानसभा में 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने पर हो रही बहस के बीच समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और सवाल किया कि उन्हें 'वंदे मातरम' गाने में दिक्कत क्यों होती है। पाठक ने कहा, आज विधानसभा में 'वंदे मातरम' पर बहस चल रही है। हम भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाले बहादुरों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्हें 'वंदे मातरम' बोलने में दिक्कत होती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत ने भारत की आज़ादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई और यह देश की भावना को दिखाता है। उपमुख्यमंत्री ने सदन में पेश किए गए सप्लीमेंट्री बजट के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, सप्लीमेंट्री बजट पेश किया गया है। यह राज्य के विकास के लिए ज़रूरी था। मैं राज्य के लोगों को बधाई देता हूं। वंदे मातरम पर चर्चा शुरू होने वाली है। वंदे मातरम से ही देश को आज़ादी मिली और भारत और उत्तर प्रदेश का हर नागरिक उनका शुक्रिया अदा करता है।

05.15: कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा मोना ने भी वंदे मातरम की चर्चा पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा साल 1998 में प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी। सरकार ने आदेश जारी किया कि सभी स्कूलों में सरस्वती वंदना व वंदे मातरम् को अनिवार्य किया जाए। इस पर विवाद बढ़ा। अटल बिहारी वाजपेयी जब लखनऊ दौरे पर आए और उनको जब जानकारी हुई तो उन्होंने मुख्यमंत्री को बुलाकर इस आदेश को वापस लेने का आदेश दिया। क्या बीजेपी इस घटना पर माफी मांगेगी? बीजेपी वंदे मातरम् के विषय पर उसके पूर्ण स्वरूप को वापस लाने के लिए चर्चा नहीं करवा रही है बल्कि वे केवल इस देश की विचारधारा को बांटने के लिए, मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए और बंगाल के चुनावों के तहत इस पर चर्चा करवा रही है।

05.00: डिप्टी सीएम उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा वन्दे मातरम् आजादी का था और विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश का भी महामंत्र है। विधानसभा में बोलते हुए केशव बोले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है विकसित हो रहा है। विपक्ष में जो लोग बैठे हैं वे एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय बीमारी से ग्रस्त हैं। आज सपा के सदस्य वन्दे मातरम् बोलने लगे, ये बीजेपी की जीत है, ये पहले मंदिर नहीं जाते थे अब मंदिर जाने लगे हैं।

04.55: मत्स्य एवं निषाद कल्याण मंत्री संजय निषाद ने कहा कि वंदेमातरम् का सम्मान किसी एक राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है। उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेज जल मार्ग से भारत आए थे और सबसे पहले निषाद समाज के लोगों ने उनका विरोध किया और कानपुर के पास अंग्रेजों की करीब 300 नावें डुबोकर निषाद समाज के लोगों ने उन्हें मार गिराया था।

04.50: सपा नेता शिवपाल सिंह ने वंदे मातरम को नमन करते हुए अपने भाषणा की शुरुआत की। वंदे मातरम पर चर्चा करते हुए शिवपाल ने कहा, इतिहास को आधा-अधूरा देखना या दिखाना ठीक नहीं है। न जाने क्यों लोग इसे राजनीति में घसीट रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि जो लोग आज घंटों वंदे मातरम पर बोल रहे हैं, उन लोगों के पूर्वज उस समय कहां थे जब स्वतंत्रता सेनानी लाठी खा रहे थे। सरकार स्कूलों में इसे अनिवार्य करने की बात करती है। लेकिन, जब बच्चे के पेट में भोजन नहीं होगा, तब क्या उसके मुंह से आवाज निकलेगी।

04.45: मुख्यमंत्री ने वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि बैरकपुर में मंगल पांडेय, गोरखपुर में शहीद बंधु सिंह, मेरठ में धन सिंह कोतवाल और झांसी में रानी लक्ष्मीबाई के नेतृत्व में देशभर में संघर्ष हुए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष की विफलता के बाद उपजी हताशा के दौर में वंदे मातरम् ने देश की सोई हुई आत्मा को जगाने का काम किया।

04.30: मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय डिप्टी कलेक्टर के रूप में ब्रिटिश शासन में कार्यरत बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने आम जनमानस की भावनाओं को वंदे मातरम् के माध्यम से स्वर दिया। योगी ने कहा कि वंदे मातरम औपनिवेशिक मानसिकता के प्रतिकार का प्रतीक बना।

04.20: योगी ने कहा, 15 अक्टूबर, 1937 को लखनऊ से मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम के खिलाफ नारा लगाया और उस समय पंडित नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष थे। 20 अक्टूबर, 1937 को नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को एक पत्र लिखा, जिसमें कहा गया था कि इसका बैकग्राउंड मुसलमानों को असहज कर रहा है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, क्रांतिकारियों के साहस और राष्ट्र के आत्मसम्मान का मंत्र है।

04.15: मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की नीति अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि जब तक (मोहम्मद अली) जिन्ना कांग्रेस में थे वंदे मातरम विवाद का मुख्य मुद्दा नहीं था। उन्होंने कहा, जैसे ही जिन्ना ने कांग्रेस छोड़ी, उन्होंने इसे मुस्लिम लीग का हथियार बना लिया और जानबूझकर गाने को सांप्रदायिक रंग दिया। गाना तो वही रहा लेकिन एजेंडा बदल गया।

04.00: योगी आदित्‍यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की साकार होती परिकल्पना का जिक्र करते हुए कहा, आज 150 वर्ष वंदे मातरम के पूरे हो रहे हैं तो प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के आभारी हैं, जिनके नेतृत्‍व में भारत पूरे आत्‍मविश्‍वास के साथ एक विकसित भारत की संकल्पना के साथ आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा, जब हम वंदे मातरम की बात करते हैं तो हम सबके लिए एक गीत मात्र नहीं बल्कि यह हमारे देश के अंदर स्वतंत्रता संग्राम की चेतना, उसका उद्घोष और भारत के क्रांतिकारियों के प्रति सच्ची भावना है।

03.45: नेता सदन सीएम योगी ने कहा कि उस समय देश की आजादी की लड़ाई को आगे बढ़ाने का मंच कांग्रेस थी और 1896 में पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में रविंद्र नाथ टैगोर ने इसे अपना स्‍वर प्रदान किया था और यह पूरे देश के लिए एक मंत्र बन गया था। उन्‍होंने कहा, “लेकिन जब वंदे मातरम के शताब्दी महोत्सव का अवसर आया तब जिस कांग्रेस के मंच से पहली बार वंदे मातरम का गान हुआ था, उस कांग्रेस ने देश के अंदर (1975 में) आपातकाल थोपकर संविधान का गला दबाने का कार्य किया।

03.30: सीएम योगी ने कहा, वंदे मातरम पर चर्चा इसलिए आवश्यक है क्योंकि इतिहास तथ्य नहीं एक चेतावनी भी है, क्यों नई पीढ़ी को सच्चाई जानने का अधिकार होना चाहिए। राष्ट्रय गीत केवल गीता ने भारतीयों संस्कार भी है। वंदे मातरम संपूर्ण भारत की आत्मा का स्वर। 1923 में कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता कर रहे मोहम्मद अली जौहर ने विरोध किया था। जौर ही इस राजनीतिक आपत्ति के बाद कांग्रेस राष्ट्र गीत के पक्ष में खड़ी नहीं हुई। जिन्ना ने वंदे मातरम के विरुद्ध नारा बुलंद किया था।

03.25: सीएम योगी बोले, 1937 में नेहरू जी ने सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा और कहा, इस गीत की कुछ लाइनें मुस्लिमों को असहज कर रही है। फिर कांग्रेस ने इस गीत से कुछ छंद हटाने का फैसला लिया। वंदे मातरम धरती माता की वंदना है। इस देश की आत्मा का प्रतीक है वंदे मातरम। वंदे मातरम का विरोध एक राजनीतिक विरोध है। कुछ चंद राजनीतिक दलों के तुष्टीकरण की नीति का दुष्परिणाम है। इसकी कीमत देश ने चुकाई है, जिसकी चोट आज भी हम सबको सुनाई देती है।

03.20: सीएम योगी ने कहा, स्वतंत्रता से पहले भी दुर्भाग्यपूर्ण था जब अंग्रेजों का विरोध करने वाली कांग्रेस भी उस दबाव में दिखी थी। वंदे मातरम कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीतिक का पहला और सबसे बड़ा शिकार बना था। छह छंदों में गाया जाने वाला राष्ट्री को दो छंदो में किया गया। इतिहास साक्षी है 1896, 97 के कांग्रेस अधिवेशन में रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा वंदे मातरम का गायन हुआ था। 1922 तक हर अधिवेशन की परमंपरा रही है। अब्दुल कलाम आजाद जैसे नेता इसका समर्थन करते थे, किसी ने भी तब इसे इस्लाम विरोधी नहीं कहा था।

03.15: वंदे मातरम पर चर्चा कर रहे सीएम योगी ने कहा, प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे भारत में मनाए जा रहे हैं। देश भर में एकता राष्ट्र भक्ति का प्रचार-प्रसार हो रहा है। सात नवंबर में विशेष कार्यक्रम हुए। विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम हुए। युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम हुए। सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। वंदे मातरम पर हमला आज से नहीं हो रहा है। वंदे मातरम ने लोगों में जोश भरा था।

03.10: सीएम योगी ने कहा, 1857 में एक साथ पूरे देश के अंदर स्वतंत्रता संग्रमा सेनानियों ने आगे बढ़ाने का काम किया था। बैरकपुर में मंगल पांडे के नेतृत्व में। गोरखपुर में शहीद मंजू सिंह के नेतृत्व में। मेरठ में धर्म सिंह कोतवाल के नेतृत्व में। झांसी में लक्ष्मी बाई के नेतृत्व में। देश के अंदर अलग-अलग क्षेत्रों में देश की स्वधाीनता के लिए भारत का हर वह अमर सेनानी लड़ने के लिए उत्सुक था।

03.05: सीएम योगी ने कहा, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने राष्ट्र की सोई हुई आत्मा को जगाने का संकल्प इस गीत से किया था। सीएम योगी ने कहा 1905 में जब ब्रिटिश सरकार ने बंगाल विभाजन की नींव रखने का प्रयास किया था तब भारत की जनता ने प्रतिशोध के रूप में जो हथियार उठाया था वह हथियार वंदे मातरम का था। प्रभात फेरियां, सत्याग्रह, स्वाधीनता का गान वंदे मातरम बन गया।

03.00: विधानसभा में वंतेमारतम पर चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा, 1896 में पहली बार रविंद्रनाथ टैगोर ने अपना स्वर प्रदान किया था और यह पूरे देश में एक मंत्र बन गया था। लेकिन जब यह देश वंदे मातरम की स्वर्ण जयंती मनाता है तब भी ब्रिटिश हुकूमत थी।

02.55: विधानसभा में वंदे मातरम पर चर्चा शुरू।

01.05ः किसानों की समस्याओं को लेकर सपा का विधान परिषद में हंगामा, सदन से किया वाकआउट।

12.30ः विधानसभा में सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया गया।

12.10ः सीएम योगी के दो नमूने वाले बयान पर सपा का आक्रोश, विधानसभा से किया वाकआउट।

12.00ः मुख्यमंत्री ने कफ सिरप को लेकर पलटवार किया। कहा कि बुलडोजर एक्शन भी होगा।

11.35ः विधानसभा में प्रश्नकाल शुरू, अतुल प्रधान ने कफ सिरप के ही मामले पर सवाल उठा दिया।

11.30ः स्पीकर की चेतावनी के बाद मानें सपा विधायक

इस दौरान वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि कोडीन सिरप से यूपी में एक भी मौत नहीं हुई है। विपक्ष माहौल खराब कर रहा है। सरकार ने मामले में दोषी लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा है। इससे विधायक और भड़क गए और मुद्दे पर चर्चा की मांग पर अड़ गए। सतीश महाना ने भी कहा कि सरकार ने बता दिया है कि कोडीन सिरप से एक भी मौत नहीं हुई है। सरकार के पक्ष से यदि मैं संतुष्ट नहीं होता हूं तो चर्चा कराऊंगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आप लोग अपनी सीट पर वापस नहीं गए तो मुझे कार्रवाई करनी पड़ेगी। फिर मैं अपनी बात से पीछे नहीं हट पाऊंगा। उन्होंने सपा के विधायकों से वेल से अपनी सीट पर जाने का आग्रह किया। इसके बाद विधायक अपनी-अपनी सीट पर लौट गए। तब जाकर प्रश्नकाल शुरू हुआ।

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अनुपूरक बजट से योजनाओं को मिलेगी गति

आम बजट के तकरीबन दो महीना पहले पेश किए जा रहे अनुपूरक बजट से उन योजनाओं को गति देने की कोशिश होगी, जिनमें बजट के अभाव में ठहराव आ रहा है। बजट का आकार 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान है। बीते साल सरकार ने दिसंबर में 17,865 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था।

केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन समेत कई योजनाएं बजट के अभाव में कुछ धीमी हो गई हैं। प्रदेश सरकार इन योजनाओं को बजट देकर इनकी गति बनाए रखना चाह रही है। इसके अलावा आम बजट की तरह ही इस अनुपूरक में भी बुनियादी सुविधाओं पर ही ज्यादा जोर रहेगा। सड़क निर्माण और लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए अच्छा बजट मिल सकता है। जल जीवन मिशन में केंद्र सरकार इस वित्त वर्ष में कोई बजट नहीं मिला है। योजना पर अमल तो धीमा हुआ ही है, कर्मचारियों की तनख्वाह तक नहीं मिल रही है।

वहीं, अटल भूजल मिशन केंद्र सरकार ने बंद कर दी है। दोनों योजनाओं में प्रदेश सरकार बजट देगी ताकि इन योजनाओं को जारी रखा जा सके। ग्राम्य विकास विभाग और लोक निर्माण विभाग को उनके क्षेत्र में सड़कें बनवाने के लिए रकम दी जाएगी। गर्मियों में बजली का इंतजाम दुरुस्त रहे, इसके लिए सरकार ने अभी से कोशिश करती दिखेगी। बिजली का नेटवर्क सुधारने और नए पावर प्लांटों के लिए ऊर्जा विभाग को अतिरिक्त राशि दी जाएगी। अस्पतालों की सुविधाओं बेहतर बनाने के लिए भी बजट दिया जाएगा।

नए उद्योगों को सब्सिडी के लिए बजट

राज्य सरकार औद्योगिकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार नए उद्योगों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित कर रही है। इन उद्योगों को राज्य सरकार की अलग-अलग नीतियों के तहत सब्सिडी दी जाती है। अनुपूरक में सब्सिडी के लिए अतिरिक्त रकम का इंतजाम होगा। ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) की तैयारी कर रही सरकार को सब्सिडी के लिए अतिरिक्त बजट की जरूरत दिख रही है।

लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए होगी बजट की व्यवस्था

अनुपूरक बजट में सबसे बड़ा हिस्सा लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए आवंटित किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रदेश में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई लिंक एक्सप्रेस-वे बनाए जाने हैं। कुछ का काम चल भी रहा है। बजट में इनके लिए रकम की व्यवस्था की जाएगी। अनुपूरक बजट आवंटित हो जाने के बाद बन रहे लिंक एक्सप्रेसवे के कामों में तेजी आएगी और नए के लिए प्रक्रिया शुरू होगी। इसके अलावा डिफेंस कॉरिडोर में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने और जमीनों के अधिग्रहण के लिए बजट में इंतजाम होगा।

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