चार लाशें, टूटा कुनबा, अपनो ने फेरा मुंह, कुलदीप सेंगर की रंजिश ने हंसते-खेलते परिवार को किया बर्बाद
यूपी के उन्नाव में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से रंजिश ने हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर डाला। इसकी कीमत पीड़िता ने परिवार के चार अपनों की जान देकर चुकाई। हालात ऐसे हैं कि खौफ से अपनों ने भी मुंह मोड़ लिया है। रिश्तेदारों ने भी उसका साथ छोड़ दिया है।

उन्नाव रेप कांड में सजा पाए भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को जमानत से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। न्याय के लिए उन्नाव रेप पीड़िता की जंग सिर्फ अस्पताल के बेड तक ही सीमित नहीं रही। तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर से रंजिश ने हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर डाला। इसकी कीमत पीड़िता ने परिवार के चार अपनों की जान देकर चुकाई। हालात ऐसे हैं कि खौफ से अपनों ने भी मुंह मोड़ लिया है। रिश्तेदारों ने भी उसका साथ छोड़ दिया है। जमानत के बाद मंगलवार की रात जब पीड़िता इंडिया गेट पर धरने के लिए पहुंची तब भी उसके साथ कोई अपना नहीं था। उसे पुलिस ने जबरिया धरने से उठा भी दिया है।
उन्नाव के माखी गांव के सराय थोक मोहल्ले में कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का घर अगल-बगल में है। जनचर्चाओं के मुताबिक, साल 2002 में प्रधानी के चुनाव से दोनों परिवारों में तकरार का बीज पड़ा। प्रधानी चुनाव में पीड़िता के ताऊ मैदान में उतरे। दूसरी ओर कुलदीप सेंगर की मां चुन्नी देवी चुनाव लड़ रही थीं। आरोप है कि कुलदीप ने पीड़िता के ताऊ के खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों को हथियार बनाकर उनकी उम्मीदवारी खारिज करवा दी। इसके बाद ताऊ ने अपने करीबी देवेंद्र सिंह की मां को चुनाव मैदान में उतारा।
चुनाव प्रचार के दौरान दोनों परिवारों में पहली बार खुलेआम हिंसा हुई। हथियार और गोलियां चलीं। कई लोग घायल हुए। पुलिस ने कुलदीप के पक्ष के दबाव में पीड़िता के चाचा के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर दिया। इसी के बाद परिवार पर पहला कहर टूटा। पीड़िता के ताऊ की गांव में ही ईंट-पत्थरों से कूचकर हत्या कर दी गई। परिजनों ने उस वक्त भी हत्या का आरोप विधायक पर लगाया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। डर और दबाव के चलते पीड़िता का चाचा फरार हो गया, जिसे 17 साल बाद 2017 में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
2017 में रंजिश ने खौफनाक मोड़ लिया
चार जून 2017 को 17 वर्षीय पीड़िता ने आरोप लगाया कि कुलदीप सिंह सेंगर ने उसके साथ अपने घर में रेप किया। इसके बाद परिवार पर कहर टूट पड़ा। आरोप है कि कुलदीप के भाई अतुल सिंह ने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने भी कुलदीप सेंगर का साथ दिया और पिता को आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया। दो दिन बाद जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। यह परिवार की दूसरी मौत थी।
इसके बाद रायबरेली में हुए संदिग्ध सड़क हादसे ने पूरे देश को हिला दिया। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई। चाची रेप केस में सीबीआई की अहम गवाह थीं। हादसे में पीड़िता भी गंभीर घायल हुई। लखनऊ के ट्रामा सेंटर में इलाज चला। आज हालात यह हैं कि पीड़िता का चाचा जेल में बंद है। डर के चलते कोई रिश्तेदार साथ देने को तैयार नहीं है।
तत्कालीन माखी एसओ व दरोगा हुए थे गिरफ्तार
पीड़िता के पिता की जेल में हत्या के मामले में गिरफ्तार कुलदीप सिंह सेंगर की अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने वाले माखी के तत्कालीन थानेदार अशोक सिंह भदौरिया और दरोगा कामता प्रताप सिंह को सीबीआई ने 16 मई 2018 को गिरफ्तार किया था। उस वक्त सीबीआई के आईजी जीएन गोस्वामी ने प्रेस नोट जारी कर बताया था कि दोनों को आईपीसी की धारा 120बी, 193, 201, 218 और 3/25 शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। वहीं, दोनों आरोपितों सहित माखी थाने के छह पुलिसकर्मियों को एसआइटी की जांच के बाद निलंबित कर दिया गया था।
मार्च में आया था सुरक्षा हटाने का फैसला
माखी रेप कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पीड़िता, उसके परिजनों, गवाहों और वकील को सीआरपीएफ सुरक्षा मिली थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा हटाए जाने की मांग की थी। केंद्र की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलीलें दी थीं कि मुकदमे का निर्णय हो चुका है। आरोपी पर दोष सिद्ध है। ऐसे में सीआरपीएफ सुरक्षा की जरूरत नहीं रह गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि दोषसिद्ध हो चुका है। सीआरपीएफ सुरक्षा हटाने का फैसला इसी साल मार्च में आया था।




साइन इन