राम मंदिर के चढ़ावा में चोरी के आरोपों की SIT करेगी जांच, 15 दिन में फाइनल रिपोर्ट
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित चोरी और अनियमितता के आरोपों की जांच के लिए यूपी सरकार ने एसआईटी गठित की है। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली टीम में आईजी किरन एस और विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। एसआईटी 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देगी।

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे में अनियमितता और चोरी के आरोपों की जांच अब स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) करेगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर एसआईटी का गठन किया गया है। सरकार ने जांच टीम को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। गठित एसआईटी में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को शामिल किया गया है। समिति की अध्यक्षता लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत करेंगे। इसके अलावा रेंज की आईजी किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को भी जांच दल का सदस्य बनाया गया है। जांच दल मंदिर में चढ़ावे से जुड़े सभी आरोपों, वित्तीय लेनदेन, सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित अभिलेखों की समीक्षा करेगा। शासन ने मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है।
एसआईटी में कौन-कौन शामिल?
1. विजय विश्वास पंत, IAS, मंडलायुक्त लखनऊ
2. किरन एस, IPS, आईजी रेज़
3. नील रतन विशेष सचिव , वित्त
ट्रस्ट ने एसआईटी गठन की उठाई थी मांग
जानकारी के मुताबिक जांच दल संबंधित पक्षों से जानकारी जुटाने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण करेगा। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मंदिर ट्रस्ट द्वारा मामले की जांच की मांग किए जाने के बाद शासन ने यह कदम उठाया है। आपको बता दें बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर मामले की जांच कराने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट का मानना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी तथा लोगों के मन में उठ रहे संदेह दूर होंगे।
राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी के आरोप लगे
विवाद की शुरुआत मंदिर परिसर में तैनात कुछ कर्मचारियों पर दान राशि में गड़बड़ी करने के आरोप लगने से हुई। बताया गया कि मंदिर की दान पेटियों से निकाली गई रकम के मिलान के दौरान कथित रूप से कुछ राशि कम पाई गई। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने आंतरिक स्तर पर मामले की जांच शुरू की। कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूछताछ की खबरें भी सामने आईं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब संत समाज और विभिन्न संगठनों ने पारदर्शी जांच की मांग उठाई। उनका कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिर में चढ़ावे को लेकर किसी भी तरह की अनियमितता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने की बात कही।




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