यूपी में SIR : 24 घंटे में 1.14 करोड़ फार्म हुए डिजिटल, CEO ने दिया ये आदेश
यूपी में अभी तक 6.40 करोड़ फॉर्म का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। औरैया, चित्रकूट, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, पीलीभीत, सहारनपुर और मुरादाबाद में अब तक कुल 50 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। SIR में लगे बीएलओ को अभी हर महीने 500 रुपये मानदेय मिलता है, जो 1000 रुपये कर दिया जाएगा।

SIR in Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के काम में तेजी आ गई है। मतदाताओं से गणना प्रपत्रों को भरवाकर बीएलओ एप के माध्यम से तेजी से अपलोड किया जा रहा है। पिछले 24 घंटे में 1.14 करोड़ फॉर्म का डिजिटलीकरण किया गया। शामली, गोंडा, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, अमरोहा, संतकबीर नगर, औरैया और मिर्जापुर में प्रति बीएलओ औसतन 80 फार्मों को डिजिटल किया गया। बाकी जिलों में 70 फॉर्म प्रति बीएलओ औसत रहा।
इस बीच बुधवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने प्रगति की समीक्षा की और तय समय चार दिसंबर तक काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कम प्रगति वाले बूथों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए और तकनीकी रूप से दक्ष कर्मचारियों की तैनाती की जाए। यूपी में अभी तक 6.40 करोड़ फॉर्म का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। औरैया, चित्रकूट, अंबेडकर नगर, बाराबंकी, पीलीभीत, सहारनपुर और मुरादाबाद में अब तक कुल 50 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।
बीएलओ को दोगुना मानदेय मिलेगा, 8वीं तक परीक्षा टली
मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे बीएलओ का मानदेय दोगुना होगा। उन्हें अभी हर महीने 500 रुपये मानदेय मिलता है, जो 1000 रुपये कर दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया है। वहीं एसआईआर के चलते परिषदीय स्कूलों की कक्षा एक से 8 तक की 28 नवम्बर से शुरू होने वाली अर्द्धवार्षिक परीक्षा टाल दी गई है। अब यह परीक्षा 10 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक होगी। कक्षा 8 तक की विषयवार नई समय सारणी जारी कर दी गई है। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने बुधवार को इसका निर्देश जारी कर दिया। यूपी में कुल 1.62 लाख बीएलओ मतदाता सूची के पुनरीक्षण के कार्य में लगाए गए हैं। यूपी में चार दिसंबर तक गणना प्रपत्रों को भरकर जमा कराया जाना है। बीएलओ और अन्य अधिकारियों को विशेष भत्ता भी मिलेगा। यह धनराशि दो हजार रुपये से अलग-अलग श्रेणी में और एकमुश्त दी जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस दलील को सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि देश में पहले कभी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) नहीं हुआ है, इसलिए निर्वाचन आयोग का फैसला अवैध है। शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु द्वारा भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि देश में पहले, एसआईआर नहीं किया गया, इस दलील को निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यों में कराई जा रही इस प्रक्रिया को चुनौती देने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग के पास फॉर्म-6 में एंट्री की सच्चाई तय करने का अंदरूनी अधिकार है। फॉर्म-6 किसी व्यक्ति को खुद को वोटर के तौर पर रजिस्टर करने के लिए भरना होता है। पीठ ने यह भी दोहराया कि आधार कार्ड नागरिकता का पक्का सबूत नहीं है और इसीलिए हमने कहा कि यह दस्तावेजों की सूची में से एक होगा। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आधार सरकारी योजना का लाभ पाने के लिए बनाया गया कानून है। मान लीजिए कोई पड़ोसी देश का है और मजदूर के तौर पर काम करता है। तो क्या उसे भी वोटर बना दिया जाए।




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