अहिल्याबाई होलकर विरासत हैं...मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर एक्शन पर संजय राउत बोले- महाराष्ट्र सीएम, योगी से करें बात
यूपी के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चला। वहां लगी मूर्तियों को तोड़ा गया। इनमें से एक मूर्ति अहिल्याबाई होल्कर की भी थी। बुलडोजर चलने के बाद से इस पर देशभर में राजनीति हो रही है। विपक्षी दलों ने इस एक्शन का विरोध किया है।

यूपी के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चला। वहां लगी मूर्तियों को तोड़ा गया। इनमें से एक मूर्ति अहिल्याबाई होल्कर की भी थी। बुलडोजर चलने के बाद से इस पर देशभर में राजनीति हो रही है। विपक्षी दलों ने इस एक्शन का विरोध किया है। इस पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई देश की विरासत हैं और उनकी मूर्ति तोड़े जाना बेहद दुखद कृत्य है। इसपर महाराष्ट्र के सीएम को विचार करते हुए यूपी के सीएम योगी से बाद करनी चाहिए।
संजय राउत ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर इस देश की बहुत बड़ी विरासत हैं। उनकी विचारधारा, उनका प्रशासन और उनका काम, वो योद्धा थीं। महाराष्ट्र से थीं। काशी में बहुत से सामाजिक कार्य उन्होंने किया। धर्मशाला, घाट बनवाए। अब नई सरकार आई है योगी जी की उन्होंने तोड़ना शुरू कर दिया है। मुझे बहुत दुख हुआ कि अहिल्याबाई का स्टैच्यू तोड़ दिया। उनका वहां किया काम खत्म कर दिया। इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भी इसका दुख होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई महाराष्ट्र की ही थीं। होलकर जो राणा है वो महाराष्ट्र के थे बाद में वहां गए थे। मध्य प्रदेश की जनता को गुस्सा आना चाहिए। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को योगी जी से बात करनी चाहिए। उनका स्टैच्यू तोड़ दिया गया है। हम लोग इसपर क्या कर रहे हैं? अहिल्याबाई महाराष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। जीर्णोद्धार के दौरान उनकी प्रतिमा और ऐतिहासिक संरचनाओं को हटाना दुखद है और महाराष्ट्र के नेतृत्व को इस मुद्दे को उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।
मणिकर्णिका की पवित्र माटी माथे पर लगाकर दोहराया संकल्प
खासगी देवी अहिल्याबाई होल्कर ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं इंदौर राजपरिवार के प्रतिनिधि यशवंत होल्कर काशी से इंदौर लौट गए। जाने से पहले उन्होंने मणिकर्णिका घाट की पवित्र माटी माथे लगाई। घाट पर तोड़ी गई मढ़ी के निकट उन्होंने पुन: क्षमायाचना की और काशी में महारानी की विरासत संरक्षित और सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।
जिला प्रशासन के आला अधिकारियों द्वारा आश्वस्त किए जाने के बाद वह यहां से रवानगी के लिए तैयार हुए। उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि खंडित मूर्तियों के अवशेष जल्द खोज लिए जाएंगे। उनके मणिकर्णिका घाट पहुंचने से पहले ही काफी संख्या में पीएसी के जवानों को तैनात कर दिया गया था। मणिकर्णिका घाट की मौजूदा स्थिति देखने के बाद वह निकट स्थित तारकेश्वर मंदिर भी गए। प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि रानी मां की चारों मूर्तियां यही रखी जाएंगी। जो दो साबूत मूर्तियां हैं उन्हें यथाशीघ्र इस मंदिर में भेजवाया जाए। अधिकारियों ने जल्द से जल्द मूर्तियां तारकेश्वर मंदिर भेजने पर सहमति जता दी है




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