...तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर संचालक ने दिया ये जवाब
नोटिस के जवाब में कहा गया कि आरोप निराधार और मनगढ़ंत प्रतीत होता है। शंकराचार्य पालकी में सवार होकर जा रहे थे, जिसे भक्तगण अपने कंधे पर रखकर ढकेलते हुए ले जा रहे थे। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस पालकी में छह इंच के व्यास के स्टील के पहिए लगे थे। इसमें घोड़े और मोटर का कोई प्रावधान नहीं है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज मेला प्राधिकरण के बीच मौनी अमावस्या के दिन से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या का स्नान किए बगैर लौटे शंकराचार्य ने विरोध स्वरूप अपने शिविर में प्रवेश नहीं किया, वह अपने शिविर के बाहर डेरा जमाए हुए हैं। इस बीच मेला प्रशासन ने उन्हें एक और नोटिस भेजकर उनकी संस्था को मेला में दी जा रही भूमि और सुविधाएं निरस्त कर मेला क्षेत्र में सदैव के लिए उनका प्रवेश प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है। शिविर के संचालक की ओर से नोटिस का जवाब भी दे दिया गया है। जिसमें लिखा गया है कि पत्र (नोटिस) भ्रामक, दुर्भावनापूर्ण तरीके से लिखा गया है। इसमें मिथ्या कथन हैं। भूमि और सुविधा समाप्त कर मेला में प्रवेश प्रतिबंधित करने के मसले पर चेतावनी दी गई है कि अगर गैर कानूनी तरीके से कोई कदम गया उठाया गया तो सक्षम न्यायालय में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए अपील करेंगे। इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोटिस के जवाब में कहा गया है कि नोटिस में बग्घी शब्द का इस्तेमाल करने पर यह कहते हुए आपत्ति की गई है कि बग्घी ऐसी गाड़ी को कहते हैं, जिसमें दो घोड़े और तीन से चार फीट व्यास के चार पहिए लगे होते हैं। वर्तमान में उनके पास न तो ऐसी बग्घी है और न ही कभी थी, जिससे यह आरोप निराधार और मनगढ़ंत प्रतीत होता है। शंकराचार्य पालकी में सवार होकर जा रहे थे, जिसे भक्तगण अपने कंधे पर रखकर ढकेलते हुए ले जा रहे थे। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। इस पालकी में छह इंच के व्यास के स्टील के पहिए लगे थे। इसमें घोड़े और मोटर का कोई प्रावधान नहीं है।
जवाब में यह भी बताया गया है कि जब शंकराचार्य शिविर से निकले थे तब थाने की पुलिस उन्हें एस्कॉर्ट करते हुए ले जा रही थी। पुलिस ने उनके अनुरोध पर बैरिकेड खुद ही खोला था। संगम नोज पहुंचने पर पुलिस अधिकारियों ने उनसे बदसलूकी की और मर्यादा को खंडित किया। अनुयायियों, संन्यासियों, वेद पाठियों और दंडी संन्यासियों को चोटी से खींचकर उनसे अलग किया गया। बिना वर्दी के पुलिस वालों ने शंकराचार्य की पालकी को खींचा और उनका उपहास उड़ाया। बाद में पालकी को ऐसी जगह खड़ा कर दिया, जहां ढलान पर होने के कारण वो नदी में गिर पड़े। शंकराचार्य लिखे जाने पर पूर्व में पट्टाभिषेक होने की बात एक बार फिर दोहराई गई है।
नोटिस की तारीख पर उठा विवाद
शंकराचार्य के प्रतिनिधि ने गुरुवार की सुबह सोशल मीडिया पर यह नोटिस डालते हुए आरोप लगाया कि मेला प्रशासन ने इसे बैकडेट में जारी किया है। उन्होंने कहा कि नोटिस बुधवार रात शिविर के पीछे की ओर चोरी से चस्पा कर दिया गया है। जिस पर 18 जनवरी की तारीख लिखी है। उधर, मेलाधिकारी ऋषिराज ने बताया कि यह नोटिस 18 जनवरी को ही दिया गया था। इस पर अब तक जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने नोटिस चस्पा करने के दौरान की एक तस्वीर साझा कर बताया कि यह वाहन उस दिन वहीं खड़ा था। जिसकी वीडियो फुटेज तारीख के साथ उनके पास उपलब्ध है।
प्राधिकरण की नोटिस में ये कहा गया
प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि मौनी अमावस्या के दिन वो (अविमुक्तेश्वरानंद) बिना अनुमति बग्घी लेकर संगम नोज पर आए। इसके पूर्व उस पांटून पुल संख्या दो का बैरियर तोड़ा गया, जिसे आपात स्थिति के लिए आरक्षित रखा गया था। समर्थकों ने मार्ग अवरुद्ध किया, जिससे भगदड़ और भारी जनहानि हो सकती थी। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी मेले में बोर्ड पर खुद को शंकराचार्य लिखने का जिक्र करते हुए कहा गया है, इससे न्यायालय के आदेश की अवहेलना हो रही है। 18 जनवरी की तारीख में जारी इस नोटिस में 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। चेतावनी दी गई है कि अगर निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है तो क्यों न आपकी संस्था (बद्रिकाश्रम हिमालय सेवा शिविर) को दी जा रही भूमि और सुविधाएं निरस्त कर आपका सदैव के लिए मेले में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कोर्ट में प्रार्थना पत्र
उधर, माघ मेला क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर के पास मौनी अमावस्या के दिन कथित रूप से हुए जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली है। अदालत ने थाना प्रभारी झूंसी से स्पष्ट पूछा है कि कोई मुकदमा इस संबंध में दर्ज है अथवा नहीं, अगली तिथि से पहले जवाब दाखिल किया जाए। कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 28 लगाई है। यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पार्चा ने आशुतोष ब्रह्मचारी के अधिवक्ता के तर्कों को सुनकर एवं पेश प्रार्थना पत्र पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दिया।
क्या है मामला?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट(आगरा) के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि माघ मेला 2026 में सेक्टर-6 स्थित श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति शिविर में चल रहे अनुष्ठान और महायज्ञ के दौरान 18 जनवरी को निकली श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास कथित रूप से हमला किया गया। उनके अनुयायियों ने आम रास्ते पर अवैध जाम लगाकर यात्रा रोकी और विरोध पर लोगों पर सामूहिक हिंसक हमला किया। साथ ही वादी का गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की गई। घटना में श्रीकृष्ण सेना के पदाधिकारी भी घायल हुए और ठाकुर श्री केशवदेव जी महाराज की प्रतिमा नीचे गिर गई। यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद भी लगातार फोन पर शिकायत वापस लेने का दबाव और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। प्रार्थना पत्र में अविमुक्तेश्वरानंद पर ‘शंकराचार्य’ पद का अवैध उपयोग कर श्रद्धालुओं को गुमराह करने का भी आरोप है। प्रार्थना पत्र में अविमुक्तेश्वरानंद, अरविंद मिश्रा, मुकुंदानंद एवं कई दर्जन अज्ञात लोगों को विपक्षी बनाया गया है तथा न्यायालय से बीएनएस की धारा 175 की उप धारा (3) के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश किए जाने की प्रार्थना की गई है।




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