Serial killer Raja Kolandar and his accomplice sentenced to life imprisonment documentary made on the brutality सीरियल किलर राजा कोलंदर और उसके साथी को उम्रकैद, दरिंदगी पर बन चुकी है डाक्यूमेंट्री, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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सीरियल किलर राजा कोलंदर और उसके साथी को उम्रकैद, दरिंदगी पर बन चुकी है डाक्यूमेंट्री

सीरियल किलर राजा कोलंदर और उसके साथी बच्छराज को लखनऊ हाईकोर्ट ने शुकवार को एक और मामले में उम्रकैद की सजा सुना दी। लंबे समय से जेल में बंद राजा कोलंदर दहशत का पर्याय माना जाता था। उसकी दरिंदगी की कहानियां लोगों को हैरान करती रही हैं।

Fri, 23 May 2025 11:17 PMYogesh Yadav लखनऊ, विधि संवाददाता।
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सीरियल किलर राजा कोलंदर और उसके साथी को उम्रकैद, दरिंदगी पर बन चुकी है डाक्यूमेंट्री

नरपिशाच और सीरियल किलर राजा कोलंदर उर्फ राम निरंजन को शुक्रवार को एक और मामले में उम्रकैद की सजा सुना दी गई। लखनऊ से किराए पर टाटा सूमो बुक कराकर चालक तथा गाड़ी मालिक के बेटे की हत्या कर टाटा सूमो लूटने के मामले में प्रयागराज के नैनी के राजा कोलंदर और शंकरगढ़ थाने के वेरी बसहरा निवासी बच्छराज कोल को आयुर्वेद घोटाला प्रकरण के विशेष न्यायाधीश रोहित सिंह ने आजीवन कारावास तथा ढाई-ढाई लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की 40 फीसदी धनराशि मृतकों के परिजनों को बतौर प्रतिकर दी जाएगी। शेष धनराशि राज्य सरकार को उचित व्यय चुकाने के लिए दी जाएगी। दो दशक पहले राजा कोलंदर दहशत का पर्याय था। उसकी दरिंदगी पर नेटफिलिक्स पर डाक्यूमेंट्री तक बन चुकी है। इसके पिपर फार्म हाउस से बड़ी संख्या में नरमुंड बरामद हुए थे।

अभियोजन की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता एमके सिंह एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कमलेश कुमार सिंह ने बताया कि इस दोहरे हत्याकांड की रिपोर्ट शिवहर्ष सिंह ने 26 जनवरी 2000 को नाका थाने में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक शिवहर्ष सिंह की टाटा सूमो लखनऊ से इलाहाबाद के बीच चलती थी। 23 जनवरी को उनका बेटा मनोज कुमार सिंह तथा चालक रवि श्रीवास्तव उर्फ गुड्डू कानपुर रोड से 6 सवारियों को लेकर चाकघाट रींवा मध्य प्रदेश के लिए गए थे।

ये लोग रास्ते में हरचंदपुर में शिवहर्ष के घर रुके और खाना खाया। वहां पर शिवहर्ष एवं उसके भाई शिव शंकर ने सवारियों को अच्छी तरह से पहचाना था। जब उसकी टाटा सूमो गाड़ी वापस नहीं आई तो उन्हें किसी अनहोनी की आशंका हुई। अदालत को बताया गया कि जब पुलिस गाड़ी की तलाश कर रही थी तो सूचना मिली कि ग्राम गढ़वा के वन विभाग की जमीन पर गिट्टी के चट्टे के पास दो लाशें पड़ी हुई हैं। सूचना पर शिवहर्ष और उनके परिवार के लोग पहुंचे और पहचान की।

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एमके सिंह के मुताबिक पुलिस विवेचना के दौरान अभियुक्त राजा कलंदर उर्फ और राम निरंजन, फूलन देवी एवं उसके नाबालिग बेटे बच्छराज कोल, दिलीप गुप्ता एवं दद्दन सिंह का नाम आया था। इसमें से दिलीप गुप्ता की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी। अदालत को यह भी बताया गया कि सबसे पहले आरोपित राजा कलंदर व बच्छराज को गिरफ्तार किया गया तथा उन्हें इलाहाबाद के कीडगंज लाया गया तो उन्हें शिवहर्ष व उनके परिवार ने पहचाना। राजा कलंदर के घर से पुलिस ने मृतक मनोज कुमार सिंह का कोट बरामद किया था। अदालत को बताया गया कि सबसे पहले फूलन देवी एवं उसके नाबालिग बेटे के खिलाफ मुकदमा चला। बेटे का मामला जुवेनाइल कोर्ट भेज दिया गया तथा फूलन देवी को अदालत ने 8 जुलाई 2013 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस मामले में मुकदमे की विचरण के दौरान आरोपी दद्दन सिंह की मृत्यु हो गई।

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अभियुक्त असाधारण व दु:साहसी

न्यायाधीश रोहित सिंह ने अपने निर्णय में कहा कि मामले की परिस्थितियों एवं तथ्यों को देखते हुए निःसंदेह यह मामला पेशेवर व संगठित अपराध से संबंधित है तथा मृतकों की क्रूरतम ढंग से हत्या की गई है। इसमें अभियुक्तों की अन्य व्यक्तियों के साथ संलिप्तता रही है और अपराध के हर कदम की जानकारी उन्हें रही है। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता है कि वह सामान्य व्यक्ति है, अपितु अभियुक्त असाधारण व दु:साहसी हैं। ऐसी स्थिति में इस मामले में अभियुक्तों के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति मात्र यह कह देने से कि वह वृद्धि तथा गरीब है तथा कम से कम सजा देना न्याय की मंशा के विपरीत होगा।

अभियोजन ने फांसी की मांग की

विशेष अधिवक्ता द्वारा सजा के प्रश्न पर सुनवाई के दौरान कहा गया कि अभियुक्त राजा कलंदर एवं बच्छराज व अन्य ने सुनियोजित साजिश रचकर मनोज कुमार सिंह एवं ड्राइवर रवि श्रीवास्तव का अपहरण लूट एवं हत्या के इरादे से किया गया। अपने इरादे को अंजाम देने के लिए टाटा सूमो लूटा तथा क्रूरतम ढंग से हत्या कर दी। उनकी लाश को गढ़वा के जंगल में जंगली जानवरों की हवाले कर दिया, ताकि शिनाख्त ना हो सके। अभियुक्त पेशेवर अपराधी हैं और संगठित तरीके से घटना को अंजाम देते आ रहे हैं। वर्ष 2001 में इलाहाबाद के कीडगंज थाने के हत्या एवं अपहरण के मुकदमे में अभियुक्तों आजीवन कारावास की सजा हुई थी । अभियुक्त मुख्य आरोपी है तथा उन्हें मृत्युदंड एवं भारी जुर्माना से दंडित किया जाए। जिससे कि ऐसे पेशेवर एवं संगठित अपराधियों में एक कठोर संदेश हो सके।

अभियुक्तों के फार्म से नर कंकाल व नरमुंड बरामद हुए थे

बहस के दौरान अदालत के संज्ञान में यह भी लाया गया कि अभियुक्तों के पिपरी फार्म से बहुत अधिक संख्या में नर कंकाल तथा नरमुण्ड बरामद हुए थे। इसके अलावा अभियुक्तों के ऊपर हत्या एवं अन्य गंभीर धाराओं में अनेकों मुकदमे चल चुके हैं। विशेष रूप से अदालत को यह भी बताया गया कि अभियुक्तों के द्वारा किए गए अपराध से संबंधित फिल्म निर्माता द्वारा वेब सीरीज भी निर्मित की गई है। अभियुक्तों के डर के कारण न्यायालय में लोग गवाही देने से कतराते हैं।

कलंदर ने गवाहों से खुद जिरह की

राजा कलंदर उर्फ राम निरंजन को पेशेवर अपराधी की श्रेणी में रखा जाना अनुचित न होगा क्योंकि जेल में रहते हुए अपराध की दुनिया में उसे अच्छी तरह से विधि का ज्ञान हो चुका था। जिसके कारण अधिकतर उसने जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अथवा अदालत आकर खुद गवाहों से जिरह किया। सरकारी वकील द्वारा बताया गया कि अभियुक्त राजा कलंदर द्वारा अपनी जिरह के दौरान ऐसे ऐसे प्रश्न गवाहों से पूछे गए जिन्हें केवल एक कुशल अधिवक्ता ही पूछ सकता है।

राजा कोलंदर की दरिंदगी पर बन चुकी है 125 मिनट की डॉक्यूमेंट्री

प्रयागराज। सीरियल किलर राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर की दरिंदगी पर डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। इंडियन प्रीडेटर: दी डायरी ऑफ एक सीरियल किलर, नाम की यह डॉक्यूमेंट्री ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफिल्क्स पर सात सितंबर 2022 को रिलीज की गई थी। 125 मिनट की यह डॉक्यूमेंट्री तीन एपीसोड में है, जिसमें उस समय से पुलिस अफसर, पत्रकार और पीड़ित परिवार के सदस्यों के हवाले से उसकी दरिंदगी के किस्से दिखाए गए हैं।

पत्रकार की हत्या से खुला था राज

इसका पहला एपीसोड 38 मिनट का है। डॉक्यूमेंट्री की शुरूआत प्रयागराज के पत्रकार धीरेंद्र सिंह की दिसंबर 2000 में हुई हत्या के प्रकरण से होती है। राजा कोलंदर का नाम इसी घटना के बाद प्रकाश में आया था। इस घटना के बाद हुई पुलिस की छानबीन में उसकी पूर्व की घटनाओं का खुलासा हुआ था। पता चला कि उसने सिर्फ पत्रकार धीरेंद्र ही नहीं, 14 लोगों की हत्या की है। इन हत्याओं के पीछे उसकी सोच सामने आई तो लोग कांप उठे। उससे दहशत खाने लगे थे। डॉक्यूमेंट्री में धीरेंद्र सिंह के बड़े भाई वीरेंद्र सिंह, भतीजे जीतेंद्र सिंह, उस समय कीडगंज थाने के एसओ रहे श्रीनारायण त्रिपाठी सहित घटना के वक्त प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में तैनात रहे पुलिस अधिकारियों, उस समय के पत्रकारों से घटना को लेकर बातचीत भी दिखाई गई है।

धीरेंद्र सिंह कीडगंज में रहते थे, दिसंबर 2000 में उनके अचानक गायब होने पर एफआईआर कीडगंज थाने में दर्ज कराई गई थी। डॉक्यूमेंट्री के पहले एपीसोड दी मर्डरर में धीरेंद्र के मोबाइल की कॉल डिटेल से किस तरह से उनकी हत्या का राज खुला था, इसे बहुत रोचक तरीके से दिखाया गया है। धीरेंद्र की ओर से अवैध खनन को लेकर लिखी गई खबरें भी इस डॉक्यूमेंटी में दिखाई गई हैं।

लाला की खोपड़ी उबल कर पीने का है आरोप

इसका दूसरा एपीसोड 45 और तीसरा 42 मिनट का है। दूसरे एपीसोड का नाम नरभक्षक है, जिसमें राजा कोलंदर के घर से मिली डायरी के बाद अन्य घटनाओं के हुए खुलासे को दिखाया गया है। इस एपीसोड में उस घटना पर खास तौर से फोकस किया गया है, जिसमें राजा कोलंदर पर आरोप है कि उसने सीओडी छिवकी में अपने सहकर्मी काली प्रसाद श्रीवास्तव की हत्या कर उनकी खोपड़ी को उबाल कर उसके रस को अपने साले के साथ इसलिए पी लिया था क्योंकि वह (काली प्रसाद श्रीवास्तव ) कहा करते थे कि लाल की खोपड़ी बहुत तेज होती है। डॉक्यूमेंट्री में यह सारी बातें मामले के विवेचक रहे श्री नारायण त्रिपाठी के हवाले से दिखाई गई है। बताया गया है कि राजा कोलंदर ने जिनकी हत्या की उनके शव को अपने पिगरी फॉर्म में गाड़ा था। खुलासे के बाद हुई खुदाई में कई कंकाल मिले थे।

बेटी का नाम आंदोलन, बेटे का अदालत

राजा कोलंदर ने अपनी बेटी का नाम आंदोलन और बेटे का अदालत रखा था, दूसरे एपीसोड में इन दोनों से बातचीत भी है, जिसमें दोनों अपने पिता को एक अच्छा इंसान बताते हुए उन पर लगे आरोपों को गलत बता रहे हैं। तीसरा एपीसोड दी किंग के नाम से है, जिसमें जेल में बंद राजा कोलंदर से बातचीत दिखाई गई है। जेल अधीक्षक और जेल के कर्मियों से उसके व्यवहार पर बातचीत भी इस एपीसोड में है।

कभी सरकारी कर्मचारी था

राजा कोलंदर उर्फ राम निरंजन केन्द्र सरकार का कर्मचारी था। शंकरगढ़ के हिनौती गांव का कोलंदर सीओडी छिवकी में चतुर्थ श्रेणी पर तैनात था। उसकी हरकतों से उसे सस्पेंड कर दिया गया था।

सजा सुनकर हंसा था कोलंदर

पत्रकार धीरेंद्र की हत्या के आरोप में राजा कोलंदर को जब 2012 में सजा सुनाई गई थी तो वह हंस पड़ा। सजा सुनने के बाद मुस्कुराते हुए कहा था कि दस हजार रुपये होते ही क्या हैं, इसे जमा कर देंगे। मगर फिर तुरंत कहा कि उम्रकैद की सजा जेल में रहते हुए जान गया हूं, कैसी होती है। राजा कोलंदर जरा भी डरा नहीं। न सहमा। बल्कि बेबाकी से बोला था कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा।

ऐ सुनो, मुझे कोलंदर नहीं राजा कोलंदर बोलो

दिसंबर 2000 में पत्रकार धीरेंद्र सिंह की हत्या के आरोप में पकड़े गए राजा कोलंदर और उसके साले से कीडगंज थाने में पूछताछ चल रही थी। राजा कोलंदर को थाने में एक बेंच पर बैठाया गया था। एक पुलिस वाला उससे कुछ पूछ कर अपने रजिस्टर में दर्ज कर रहा था। एक पुलिस वाले ने उसे कोलंद कह कर संबोधित किया तो वह नाराज हो गया। और बोला कि ऐ सुनो कोलंदर नहीं बल्कि राजा कोलंदर बोलो। इस दौरान एक पत्रकार ने उससे कुछ पूछा तो कोलंदर बोला, ऐसा छापो कि पूरा लखनऊ हिल जाए। उस समय एक अन्य संवाददाता से उसने कहा था क्या मेरी फोटो छपेगी, क्या मेरी फोटो टीवी पर दिखाई जाएगी। मेरे जैसे लोग ही एमपी एमएलए बनते हैं, अब मैं भी एमपी बनूंगा।

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