ऑफिस में सीनियर परेशान करते हैं, सहन नहीं होता, प्रेमानंद महाराज ने बताया उपाय
संत प्रेमानंद महाराज ने एक युवती के पूछने पर एक ऐसी समस्या का हल बताया जिससे रोजाना लाखों लोग दो-चार होते हैं। एक युवती ने महाराज से कहा कि ऑफिस में सीनियर परेशान करते हैं। सहन नहीं होता क्या करें। निंदा और उपहास होता है। ऐसे में क्या करना चाहिए।

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज अपने केलीकुंज आश्रम में लगातार लोगों की समस्याओं का समाधान बातचीत के आधार पर करते हैं। लोग महाराज को अपनी समस्या बताते हैं और प्रेमानंद जी उसे हल करने की विधि समझाते हैं। ऐसी ही एक समस्या शनिवार को महाराज के सामने एक युवती ने रखी। यह ऐसी समस्या थी जिससे लाखों लोग रोजाना दो-चार होते हैं। एक युवती ने महाराज से कहा कि ऑफिस में सीनियर परेशान करते हैं। सहन नहीं होता क्या करें। निंदा और उपहास होता है। ऐसे में क्या करना चाहिए।
महाराज ने कहा कि ऐसे में तो और उत्साह के साथ काम करना चाहिए। अगर हम गलत हैं तो सही करना चाहिए और गलत नहीं हैं तो हमें बेपरवाह हो जाना चाहिए। मस्त रहना चाहिए। किसी की बातों में नहीं आना चाहिए। इस पर युवती ने कहा कि कभी-कभी सहन नहीं होता। इस पर महाराज ने नाम जप की सलाह दी। महाराज ने कहा नाम जप करने से सहनशीलता बढ़ेगी। जब पूछा गया कि कब तक सहन करें तो महाराज जी ने कहा कि हमें जीवन भर सहन करना पड़ेगा। जो सहन कर गया वहीं महात्मा है। जो सहन नहीं कर सका, वह सांसरिक है।
परिस्थिति परिवर्तन के लिए क्या करें
महाराज से जब पूछा गया कि परिस्थिति परिवर्तन के लिए क्या करें तो प्रेमानंद ने कहा कि परिस्थिति को परिवर्तन करने के लिए नहीं परिस्थिति में हृदय को परिपक्व करने के लिए ईश्वर ने बनाया है। हमारे हृदय को परिपक्व करने के लिए परिस्थिति को भगवान ने दिया है। हम परिस्थित को परिवर्तन करने की मांग न करें, हम उस परिस्थिति में डट कर लड़ने की क्षमता प्राप्त करें। हम जहां भागकर जाएंगे, वहां माया है। इस परिस्थिति में भगवान ने हमें रखा है तो बहुत सोच समझकर रखा है। भगवान द्वारा रखी गई परिस्थिति में हमें बलवान बनना है। हमें बलवान बनना है कमजोर नहीं बनना है।
सहनशील बनना है, तब बुरा नहीं लगेगा
हमें सहनशील बनना है। अगर आप सहन करने लगेंगे तो बुरा ही नहीं लगेगा। बुरा तब तक लगेगा जब अहंकार रहता है। नाम जप करते हुए जब अहंकार भगवान के चरणों में समर्पित होता है तो बुरा नहीं लगता है बल्कि तब हंसी आती है। जैसा पागल आदमी आपको कुछ बोले तो आपको बुरा नहीं लगेगा। ऐसे ही यह माया में पागल लोग हैं। यह निंदा करते हैं, अपमान करते हैं तो हमें मुस्कुरा कर चल देना चाहिए। हमें बुरा नहीं मानना चाहिए। जितना भजन करेंगे उतना ही सहनशीलता बढ़ेगी।




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