Health Department Initiates Accurate Testing for Diarrhea in Children in Saharanpur डायरिया का ‘वायरल खतरा’: अब वायरस पहचानकर मिलेगा सटीक इलाज, Saharanpur Hindi News - Hindustan
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डायरिया का ‘वायरल खतरा’: अब वायरस पहचानकर मिलेगा सटीक इलाज

Saharanpur News - लाइव पर न चलाएं: स्वास्थ्य विभाग ने ठोस कदम उठाया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर में पहली बार रोटावायरस और एडिनोवायरस की सटीक जांच शुरू की जा रही

Mon, 20 April 2026 12:16 AMNewswrap हिन्दुस्तान, सहारनपुर
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डायरिया का ‘वायरल खतरा’: अब वायरस पहचानकर मिलेगा सटीक इलाज

सहारनपुर, वरिष्ठ संवाददाता। वेस्ट यूपी में बच्चों में तेजी से बढ़ रहे डायरिया के मामलों को देखते हुए अब स्वास्थ्य विभाग ने ठोस कदम उठाया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर में पहली बार रोटावायरस और एडिनोवायरस की सटीक जांच शुरू की जा रही है। यह जांच इसी माह से शुरू होने की संभावना है, जिससे मासूमों में डायरिया के असली कारण की पहचान कर बेहतर और लक्ष्य आधारित उपचार संभव हो सकेगा। अब तक डायरिया के अधिकतर मामलों में सामान्य इलाज ही दिया जाता था, क्योंकि वायरस की सटीक पहचान नहीं हो पाती थी। लेकिन नई जांच सुविधा शुरू होने के बाद डॉक्टर यह तय कर सकेंगे कि डायरिया किस वायरस के कारण हुआ है और उसी के अनुसार इलाज किया जाएगा।

इससे बच्चों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार आने की उम्मीद है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में इसके लिए विशेषज्ञों की तैनाती कर दी गई है और आवश्यक उपकरण भी स्थापित किए जा रहे हैं। विभागीय स्तर पर जांच प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रमोद यादव के अनुसार, बच्चों में डायरिया के मामलों में रोटावायरस और एडिनोवायरस प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इन वायरस के संक्रमण से बच्चों में तेज दस्त, उल्टी और बुखार जैसी समस्याएं होती हैं, जिससे शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) तेजी से बढ़ जाती है। समय पर सही इलाज न मिलने पर बच्चों की हालत गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि बीते कुछ समय में डायरिया के साथ-साथ लीवर संक्रमण के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। नई जांच सुविधा शुरू होने से न सिर्फ गंभीर मामलों की समय रहते पहचान हो सकेगी, बल्कि संक्रमण के फैलाव को रोकने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों की सेहत के लिहाज से बेहद अहम साबित होगा।0-यह हैं रोटावायरस और एडिनोवायरस-रोटावायरस और एडिनोवायरस ऐसे वायरस हैं, जो छोटे बच्चों में डायरिया के प्रमुख कारण माने जाते हैं।-ये वायरस संक्रमित पानी, भोजन या संपर्क से तेजी से फैलते हैं।-इनसे होने वाले संक्रमण में दस्त, उल्टी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।-पांच साल तक के बच्चों में इनका खतरा सबसे अधिक रहता है।0-ऐसे बचाएं बच्चों को डायरिया सेबच्चों को हमेशा साफ और उबला हुआ पानी पिलाएं।हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।बाहर का दूषित खाना खिलाने से बचें।डायरिया के लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।बच्चे में पानी की कमी न होने दें, ओआरएस घोल देते रहें।0-वर्जन---बच्चों में डायरिया के मामलों में रोटावायरस और एडिनोवायरस की अहम भूमिका होती है। अब मेडिकल कॉलेज में इनकी सटीक जांच शुरू होने से हम बीमारी के वास्तविक कारण को पहचान कर टारगेटेड ट्रीटमेंट दे सकेंगे। इससे बच्चों की जान बचाने और जटिलताओं को कम करने में काफी मदद मिलेगी।डॉ. प्रमोद यादव, वरिष्ठ चिकित्सक, राजकीय मेडिकल कॉलेज

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