सपा नेता आजम खां को झटका, रिटायर्ड कर्मी बना सरकारी गवाह, कोर्ट ने दी मंजूरी
आजम खां को कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने सरकारी गवाह बनने के अभियोजन के प्रार्थना पत्र को मंजूर करते हुए सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तारीख नियत की है। यह मुकदमा रिकार्ड रूम के सहायक लेखाकार मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराया था।

सपा नेता आजम खां को कोर्ट से मंगलवार को झटका लगा है। कोर्ट ने सरकारी गवाह बनने के अभियोजन के प्रार्थना पत्र को मंजूर करते हुए सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तारीख नियत की है। यह मुकदमा रिकार्ड रूम के सहायक लेखाकार मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में 9 मई 2020 को लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद और अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराया था। जिसमें आरोप है कि रिकार्ड रूम के अभिलेखों में इमामउद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी की जगह आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया।
विवेचना के दौरान आजम खां, आजम के बड़े बेटे अदीब आजम खां, अब्दुल्ला आजम और पत्नी तजीन फात्मा सहित ट्रस्ट के पदाधिकारियों को आरोपी बनाया गया, जिसमें रिकार्ड रूम के रिटायर्ड कर्मचारी भगवत सिंह को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन उसके द्वारा पुलिस को दिए गए बयान में खुद सरकारी गवाह बनने की मंशा जाहिर की जिस पर भगवंत सिंह ने अपने अधिवक्ता के जरिये कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया।
जिस पर आजम खां के अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल की और प्रार्थना पत्र का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए सोमवार की तारीख नियत की थी। मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। एपीओ स्वदेश शर्मा के मुताबिक कोर्ट ने सरकारी गवाह बनने के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया है। सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख नियत की है।
जबरन बेदखली मामले में आजम की याचिका अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न
इससे पहले इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जबरन बेदखली के एक मामले में आजम खान द्वारा दायर याचिका को अन्य आरोपियों की याचिकाओं के साथ संलग्न किया था। इस मामले में पूर्व सांसद मोहम्मद आजम खान और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ पूर्व में अलग-अलग 12 प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं।
आजम खान द्वारा दायर याचिका को अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न करने का आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति समित गोपाल ने इस मामले की सुनवाई की तीन जुलाई के लिए निर्धारित कर दी है। इससे पूर्व 11 जून को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आजम खान और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ जबरन बेदखली मामले में दर्ज 12 प्राथमिकियों के समेकित मुकदमे में अंतिम आदेश पारित करने पर रोक लगा दी थी।




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