Renounce your ego and come to Magh Mela, Baba Ramdev speaks in Sangam City on Avimukteshwaranand controversy अहंकार त्याग कर अध्यात्म के माघ मेले में आएं, शंकराचार्य विवाद पर संगमनगरी में बोले बाबा रामदेव, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अहंकार त्याग कर अध्यात्म के माघ मेले में आएं, शंकराचार्य विवाद पर संगमनगरी में बोले बाबा रामदेव

शंकराचार्य विवाद पर संगमनगरी में बाबा रामदेव ने कहा कि मेले में अहंकार त्यागकर आएं। उन्होंने कहा कि यह अध्यात्म का मेला है, यहां पर अगर कोई अहंकार के साथ आता है तो गलत है। 

Thu, 22 Jan 2026 10:22 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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अहंकार त्याग कर अध्यात्म के माघ मेले में आएं, शंकराचार्य विवाद पर संगमनगरी में बोले बाबा रामदेव

संगम की रेती पर लगे माघ मेले में पुण्य की डुबकी लगाने के लिए योगगुरु बाबा रामदेव गुरुवार को प्रयागराज आए। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण पर योगगुरु ने कहा कि मेले में अहंकार त्यागकर आएं। उन्होंने कहा कि यह अध्यात्म का मेला है, यहां पर अगर कोई अहंकार के साथ आता है तो गलत है। हर व्यक्ति को यहां इसे छोड़कर आना चाहिए।

सीएम पर शंकराचार्य की टिप्पणी पर जब बाबा रामदेव से बात की गई तो उन्होंने इसकी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह अशोभनीय है। शंकराचार्य तो बहुत दूर की बात है, मुख्यमंत्री पर एक सामान्य साधु को भी ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। वो तो शंकराचार्य हैं, भाषा मर्यादित होनी चाहिए। योगगुरु ने संगम में स्नान किया और पक्षियों को दाना भी खिलाया। उन्होंने संगम की पावन धरा पर आने को ही सौभाग्य माना। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगा यहां का माघ मेला अद्भुत है। उन्होंने यहां किए गए प्रबंधों की प्रशंसा भी की। इसके बाद वो बड़े हनुमान मंदिर दर्शन के लिए गए। यहां से मेला क्षेत्र में पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिविर और फिर खाकचौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ के शिविर गए।

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संत शरण में जाकर प्रशासन मांगे माफी : अनिरुद्धाचार्य

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पहिया लगी पालकी लेकर संगम स्नान से रोकने के मामले में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि प्रशासन को माफी मांगनी चाहिए। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि उनकी शरण में जाएं और कहें कि महाराजजी हमसे गलती हो गई, अपराध हो गया, हमें माफ कर दीजिए। अगर उनसे माफी मांगी जाएगी तो निश्चित ही वह माफ करेंगे। संत हैं, उनका हृदय कोमल है। भगवान श्रीराम ने भी कहा है कि अगर रावण भी शरण में आता तो उसे क्षमा कर देते। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य इस वक्त माघ मेला के खाकचौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ के शिविर में कथा कह रहे हैं। तीसरे दिन कथा के ठीक पहले उन्होंने पत्रकारों से बात की। इस दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य को स्नान से रोके जाने पर उन्होंने अपनी राय रखी।

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