राकेश टिकैत की गिरफ्तारी से उबाल, मेरठ से मुजफ्फरनगर तक किसान यूनियन का बवाल
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत को ओडिशा में एक किसान पंचायत के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया है। इस खबर के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों का भारी आक्रोश फूट पड़ा है। मुजफ्फरनगर, मेरठ और बिजनौर के थानों का घेराव शुरू हो गया है।

UP News: भारतीय किसान यूनियन के कद्दावर नेता राकेश टिकैत को ओडिशा में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। सोमवार शाम जैसे ही टिकैत की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई, भाकियू कार्यकर्ताओं ने आनन-फानन में रणनीति बनाकर सड़क पर उतर गए और प्रदेश भर के थानों और सीओ कार्यालयों का घेराव शुरू कर दिया। मेरठ से लेकर मुजफ्फरनगर तक किसान सड़कों पर हैं और चक्काजाम जैसी स्थिति भी बनी हुई है।
ओडिशा में किसान पंचायत के दौरान कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, राकेश टिकैत अपनी टीम के साथ ओडिशा में एक विशाल किसान पंचायत में शामिल होने पहुंचे थे। वहां किसानों की समस्याओं को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। भाकियू के मुजफ्फरनगर जिलाध्यक्ष नवीन राठी ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया है। उन्होंने तत्काल प्रभाव से जनपद के सभी थानों के घेराव का ऐलान कर दिया, जिसके बाद शाम 6 बजे से ही कार्यकर्ता थानों पर जुटने लगे।
मेरठ और बिजनौर में थानों पर कब्जा
मेरठ के मवाना में भाकियू कार्यकर्ताओं ने सीओ दफ्तर का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि जब तक टिकैत को ससम्मान रिहा नहीं किया जाता, उनका धरना खत्म नहीं होगा। भाकियू ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द रिहाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा और अन्य थानों को भी पूरी तरह जाम कर दिया जाएगा।
वहीं, बिजनौर में भी हालात संवेदनशील बने हुए हैं। शहर कोतवाली में जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने थाने के भीतर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। सुनील प्रधान ने कहा कि जनपद के प्रत्येक थाने में कार्यकर्ता एकजुट हो रहे हैं और यह विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक ओडिशा सरकार अपना फैसला वापस नहीं लेती।
पश्चिमी यूपी में अलर्ट पर पुलिस
राकेश टिकैत की गिरफ्तारी की सूचना से भाकियू में भारी 'उबाल' है। मुजफ्फरनगर के सिसौली (भाकियू मुख्यालय) से लेकर मेरठ के कस्बों तक किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर निकलने की तैयारी में हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल को अलर्ट कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का प्रयास है कि प्रदर्शनकारियों को समझा-बुझाकर शांत किया जाए, लेकिन किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है।भाकियू नेताओं का स्पष्ट संदेश है कि टिकैत की आवाज को दबाने की कोशिश महंगी पड़ेगी। अब देखना होगा कि ओडिशा सरकार और केंद्र इस बढ़ते दबाव पर क्या रुख अपनाते हैं।




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