Prateek murder case wife and her lover were sentenced to life imprisonment their daughter became key eyewitness पति की हत्या कर दिया अंतिम संस्कार, पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद, बेटी बनी चश्मदीद गवाह, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पति की हत्या कर दिया अंतिम संस्कार, पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद, बेटी बनी चश्मदीद गवाह

कानपुर में पति की जहर देकर हत्या और अंतिम संस्कार करने वाली पत्नी व उसके प्रेमी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीलांजना ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

Sat, 17 Jan 2026 04:58 PMDinesh Rathour कानपुर, प्रमुख संवाददाता
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पति की हत्या कर दिया अंतिम संस्कार, पत्नी और उसके प्रेमी को उम्रकैद, बेटी बनी चश्मदीद गवाह

यूपी के कानपुर में पति की जहर देकर हत्या और अंतिम संस्कार करने वाली पत्नी व उसके प्रेमी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीलांजना ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। घटना की चश्मदीद मृतक की बेटी, उसके पिता और होटल मैनेजर की गवाही से ही दोनों को दोषी करार दिया गया था। दोनों को कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया। कोर्ट ने इस मामले में सवा साल के भीतर सुजा सुनाई है।

किदवईनगर वाई ब्लॉक निवासी पुनीत कुमार शर्मा के मुताबिक एकलौते बेटे प्रतीक की शादी फैजाबाद की नेहा के साथ वर्ष 2017 में हुई थी। बेटा मेडिकल स्टोर संभालता था। शादी के सात साल बाद 6 मार्च 2024 को नेहा प्रतीक और पांच साल की बेटी मान्या व तीन साल के बेटे अबिराज को लेकर फैजाबाद गई। 12 मार्च को वह बच्चों के साथ आ गई लेकिन प्रतीक नहीं आया। पूछने पर बहू ने बताया कि रास्ते में गाड़ी खराब हो गई थी। दो-तीन दिन में वापस आ जाएंगे। चार दिन बाद 16 मार्च को बहू पोते अबिराज को दवा दिलाने की बात कहकर दोनों बच्चों को लेकर चली गई और वापस नहीं लौटी।

उन्होंने नौबस्ता थाने में बेटे, बहू और दोनों बच्चों की गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस को जांच में पता चला कि नेहा के संबंध प्रतीक के दोस्त आयुष से हो गए थे। इन लोगों ने साजिश के तहत लखनऊ के होटल में ले जाकर आयुष को जहर दे दिया और वहीं अंतिम संस्कार कर दिया। पंचनामे के दौरान आयुष ने खुद को प्रतीक का चचेरा भाई बताया था। प्रतीक के पिता पुनीत की तहरीर पर नौबस्ता पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि मंगलवार को इस मामले में न्यायालय ने दोनों को दोषी करार दिया था। शुक्रवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई होनी थी। इसी बीच आरोपी नेहा शर्मा की ओर से अधिवक्ता ने सफाई साक्ष्य प्रस्तुत करने का प्रार्थना पत्र दिया। हालांकि कोर्ट ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया। सजा के बिंदु पर उन्होंने फांसी की मांग की पर न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई।

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प्रेमी आयुष ने चचेरा भाई बन किया था अंतिम संस्कार

एडीजीसी संजय झा ने बताया कि आयुष ने ही चचेरा भाई बनकर पुलिस को सूचना दी थी। नेहा उसे एंबुलेस से अस्पताल ले गई थी। मौत के बाद आयुष और नेहा ने पंचायतनामा भरा था। पोस्टमार्टम होने के बाद एंबुलेंस से ही लखनऊ में गोमती नदी के पास गुलाला घाट पर विद्युत शवदाह गृह में प्रतीक का अंतिम संस्कार कर दिया। 6 मार्च से 11 मार्च के बीच पूरी घटना को अंजाम देने के बाद नेहा बच्चों के साथ 12 मार्च को किदवई नगर ससुराल आ गई थी।

यह साक्ष्य भी रहे महत्वपूर्ण

होटल मैनेजर अन्नू तिवारी रजिस्टर लेकर गवाही देने आए थे। होटल रजिस्टर में इंट्री, पुलिस को सूचना, अस्पताल के रिकॉर्ड, पंचायतनामा और अंतिम संस्कार के रिकाॅर्ड मुकदमे को न्याय तक ले जाने में अहम बने।

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बेटी ने आयुष को गिलास में कुछ पिलाते देखा था

एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि मृतक की कक्षा दो में पढ़ने वाली बेटी भी घटना के समय होटल में मौजूद थी। कोर्ट में उसकी गवाही कराई गई। बच्ची ने कोर्ट को बताया कि मम्मी, पापा, भाई के साथ वह लोग लखनऊ गए थे। आयुष भी साथ था। होटल में पांच दिन रुके थे। कहीं घूमने नहीं गए थे। पापा और आयुष खाना लेने ही बाहर जाते थे। एक दिन मैंने कंबल के नीचे से देखा था कि आयुष ने गिलास में कुछ सफेद मिलाया था और मम्मी ने सोते हुए पापा को पिलाया था। इसके बाद पापा के खर्राटे बंद हो गए। एंबुलेंस से मम्मी पापा को हास्पिटल लेकर गईं थीं। मैं और मेरा भाई आयुष के साथ गाड़ी में गए थे। थोड़ी देर बाद पापा को हास्पिटल में छोड़कर हम लोग होटल आ गए। उसके बाद हम लोग वापस घर आ गए। आयुष अंकल अपने घर चले गए। एडीजीसी ने बताया कि बच्ची के साथ मृतक के पिता वादी पुनीत शर्मा के यह बयान आरोपियों को दोषी साबित करने में अहम साक्ष्य बने।

हत्या की साजिश रच मायके बता ले गई थी लखनऊ

एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि प्रतीक मेडिकल स्टोर चलाता था। उसका दोस्त आयुष भी इसी काम से जुड़ा था। इसी सिलसिले में उसका प्रतीक के घर आना जाना था। इसी दौरान नेहा के आयुष से संबंध हो गए। दोनों ने हत्या की साजिश रची और इसी के तहत वह प्रतीक को फैजाबाद चलने की बात कहकर लखनऊ ले गई। लखनऊ के चारबाग स्थित आशीर्वाद होटल में वह लोग छह दिन रुके। वहां शराब में कुछ मिलाकर पिला दिया। जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। आयुष ने प्रतीक का चचेरा भाई बनकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। आयुष ने ही पुलिस को सूचना दी थी। अस्पताल में अमीनाबाद थाने के एसएसआई अवधेश कुमार चतुर्वेदी ने पंचनामा भरा और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पंचनामा में नेहा के साथ ही आयुष का भी पंच के तौर पर नाम शामिल है।

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