poster about Rajbhar murders was put up outside SP office Om Prakash said names of murderers also be written सपा कार्यालय के बाहर लगा राजभर हत्याओं का पोस्टर, ओम प्रकाश का तीखा पलटवार- कातिलों के नाम भी लिखें, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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सपा कार्यालय के बाहर लगा राजभर हत्याओं का पोस्टर, ओम प्रकाश का तीखा पलटवार- कातिलों के नाम भी लिखें

सपा ऑफिस के बाहर पिछले 2 सालों में  राजभर समाज के लोगों की हत्याओं का एक बैनर लगा है। वहीं, इस पोस्टर ओम प्रकाश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन हत्याओं के कातिलों का नाम भी लिखना चाहिए। जो ज्यादातर यादव हैं।

Wed, 27 May 2026 11:23 AMPawan Kumar Sharma लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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सपा कार्यालय के बाहर लगा राजभर हत्याओं का पोस्टर, ओम प्रकाश का तीखा पलटवार- कातिलों के नाम भी लिखें

UP News: यूपी के लखनऊ में समाजवादी पार्टी ऑफिस के बाहर एक पोस्टर लगाया गया है। जिसमें 2024 से लेकर 2026 तक राजभर समाज के लोगों की हत्याओं का जिक्र है। वहीं, इस पोस्टर पर योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा चीफ ओम प्रकाश यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन हत्याओं के कातिलों का नाम भी लिखना चाहिए। जो ज्यादातर यादव हैं।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश यादव ने इस पोस्टर पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए बोला, 'हत्या करने वाला कौन है, यह भी दिखाना चाहिए। बाराबंकी में दिनदहाड़े राजभर समाज के व्यक्ति की हत्या हुई। अगर आरोपी यादव था, तो उसके आगे यह भी लिखना चाहिए कि हत्या किसने की। मऊ में राजभर समाज की बेटी की हत्या हुई, वहां भी आरोपी का नाम साफ-साफ लिखा जाना चाहिए। कौशांबी समेत जिन घटनाओं को पोस्टर में दिखाया गया है, उनमें हत्या करने वाला कौन था, यह भी बताना चाहिए। समाजवादी पार्टी के जो लोग यह बैनर लगा रहे हैं, उन्हें सिर्फ गिनती नहीं दिखानी चाहिए, बल्कि यह भी बताना चाहिए कि अपराध किसने किया। हर समाज में अच्छे और बुरे लोग होते हैं। बाराबंकी में एक गरीब युवक बर्फ बेच रहा था। किसी ने उससे आइसक्रीम मांगी। जब उसने पैसे मांगे, तो उसकी हत्या कर दी गई। अगर दम है, मर्द हो तो पोस्टर में यह भी लिखें कि हत्या किसने की थी?'

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बैनर पर 2 सालों में 22 राजभर की हत्या का जिक्र

सपा कार्यालय के बाहर जो बैनर लगा है। उस पर बड़े अक्षरों में लिखा है, 'भाजपा सरकार में 2024 से 2026 के बीच में हुए राजभर समाज के लोगों की हत्याएं।' वहीं, निवेदक में समाजवादी युवजनसभा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज राजभर का नाम है। इस पोस्टर में वाराणसी के सुरेश राजभर, फया राजभर, छोटू राजभर, डॉ. सचिन राजभर, इंजि. रोहित राजभर, फत्ते राजभर, बलिया के दिग्विजय राजभर, चंदन राजभर, विक्की राजभर, गाजीपुर के शिवमूरत राजभर, दीपक राजभर, सुधारन राजभर, मऊ के सुनील राजभर, सुरेश राजभर, अमित राजभर, अनिल राजभर, सशिवबचन राजभर, जौनपुर के पंकज और सुनील राजभर, बाराबंकी के बबलू राजभर, कुशीनगर की रिंकी और संतकबीर नगर की नंदिनी राजभर के नाम का जिक्र है। पोस्टर के मुताबिक ये सभी की हत्याएं साल 2024 से लेकर 2026 के बीच में हुई हैं।

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अगर पिछड़े और बहुजन के नाम पर ठगी न की गई होती तो सुभासपा न बनती

इससे पहले ओपी राजभर ने कहा था कि अगर पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज के नाम पर ठगी न हुई होती और उनके साथ बराबरी का व्यवहार किया गया होता तो सुभासपा बनती ही नहीं।अखिलेश यादव के लिए कहा कि इनके पीडीए का मतलब है, 'पहला दावा अहिर' और वह भी सिर्फ सैफाई वाला। सपा की तरफ से आजमगढ़ का स्थानीय यदुवंशी युवक कभी सांसद नहीं बन सकता। नहीं तो 'हाऊ कैन यू रोक' वाले धर्मेन्द्र यादव की जगह मेरे आजमगढ़ का कोई 'यदुवंशी लाल सांसद' होता। वोट यदुवंशियों का लेना है लेकिन कुर्सी सिर्फ 'सैफई के नवाबों' को मिलती है। बदायूं में आदित्य यादव और कन्नौज में डिम्पल यादव की जगह कोई राजभर, चौहान, निषाद, बिंद, केवट, मल्लाह, कश्यप, प्रजापति, पाल, लोहार, बढ़ई, कहार, धीमर, कुशवाहा, मौर्य, शाक्य, धोबी, सैनी, गुर्जर जैसी जाति का सांसद बनता।

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