Police third degree torture beating a milk vendor on the soles with sticks and pulling out his nails पुलिस ने दूध विक्रेता को दी थर्ड डिग्री, तलवों पर मारे डंडे, नाखून उखड़ा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पुलिस ने दूध विक्रेता को दी थर्ड डिग्री, तलवों पर मारे डंडे, नाखून उखड़ा

यूपी पुलिस ने फिर बर्बरता दिखाई है। आगरा में एक दूध विक्रेता को बेरहमी से पीटा गया। तलवों पर डंडे बरसाए गए, जिससे उसके पैर के अंगूठे का नाखून उखड़ गया। पीड़ित की चीख-पुकार पर भी पुलिस कर्मियों को दया नहीं आई। बाद में शांतिभंग में चालान कर दिया गया।

Sun, 4 Jan 2026 06:03 AMPawan Kumar Sharma मुख्य संवाददाता, आगरा
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पुलिस ने दूध विक्रेता को दी थर्ड डिग्री, तलवों पर मारे डंडे, नाखून उखड़ा

यूपी के आगरा के से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां किरावली में किसान के पैर तोड़ने के मामले में पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। इसके बाद 2 जनवरी को छत्ता थाना क्षेत्र की जीवनी मंडी चौकी पुलिस ने फिर बर्बरता दिखाई। एक दूध विक्रेता को बेरहमी से पीटा गया। तलवों पर डंडे बरसाए गए, जिससे उसके पैर के अंगूठे का नाखून उखड़ गया। पीड़ित की चीख-पुकार पर भी पुलिस कर्मियों को दया नहीं आई। बाद में शांतिभंग में चालान कर दिया गया। पीड़ित का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपना टेंपो साथ ले जाने से इनकार कर दिया था। वजह यह थी कि वह टेंपो चलाना नहीं जानता।

घटना सुबह करीब 11 बजे की है। सैंया क्षेत्र के गांव वीरई निवासी नरेंद्र कुशवाह ने शनिवार को डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास से शिकायत की। उसने बताया कि वह और उसका भाई धीरज कुशवाह आगरा में टेंपो से दूध सप्लाई करते हैं। टेंपो धीरज चलाता है, क्योंकि उसे खुद चलाना नहीं आता। जीवनी मंडी क्षेत्र के गरीब नगर के बाहर उनका टेंपो खड़ा था। नरेंद्र टेंपो में बैठा था, जबकि धीरज गली में दूध देने गया हुआ था।

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चौकी इंचार्ज ने पकड़ा

इसी दौरान किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार और सिपाहियों ने कुछ लोगों को पकड़ लिया। उन्हें ले जाने के लिए टेंपो के साथ चलने को कहा गया। नरेंद्र ने पुलिस कर्मियों को बताया कि उसे टेंपो चलाना नहीं आता, उसका भाई ही चालक है। यह बात पुलिस कर्मियों को नागवार गुजरी। मौके पर ही उसके साथ मारपीट की गई और घसीटते हुए चौकी ले जाया गया। चौकी पर जमीन पर गिराकर लात-घूंसों से पीटा गया। इसके बाद लेटाकर तलवों पर डंडे बरसाए गए। दो डंडे टूट गए।

पीड़ित रहम की भीख मांगता रहा, लेकिन पुलिस कर्मी धमकाते रहे कि जेल में सड़ा देंगे। बाद में शांतिभंग में उसका चालान कर दिया गया। देर शाम परिजनों ने जमानत पर उसे छुड़ाया। डीसीपी सिटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित चौकी इंचार्ज जीवनी मंडी रविंद्र कुमार को निलंबित कर दिया है। उनकी जगह गौरव राठी को नया चौकी प्रभारी बनाया गया है।

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1800 रुपये छीनने का भी आरोप

पीड़ित भाजपा नेता राकेश कुशवाह का रिश्तेदार है। राकेश कुशवाहा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मारपीट के दौरान नरेंद्र से 1800 रुपये भी छीन लिए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र का कसूर क्या था, यह पुलिस बताए। जब वह टेंपो चलाना जानता ही नहीं, तो पुलिस को कैसे साथ ले जाता। कड़ाके की सर्दी में हुई बेरहमी से वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है और भयभीत हो गया है। उसने आगरा आकर दूध सप्लाई बंद करने की बात कही है। गरीब आदमी का पुलिस के डर से काम-धंधा छोड़ देना बेहद शर्मनाक है।

आखिर पुलिस के लिए कानून क्यों अलग

कानून सबके लिए बराबर माना जाता है, लेकिन जब सवाल पुलिस कर्मियों का होता है तो नियम बदल जाते हैं। मारपीट या अवैध वसूली के मामलों में भी अक्सर मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता। निलंबन या लाइन हाजिर कर मामला खत्म कर दिया जाता है। सवाल यह है कि आरोपित पुलिस कर्मियों को यह संरक्षण क्यों मिलता है। जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, पुलिस के व्यवहार में बदलाव कैसे आएगा। नजीर पेश करने की बात आम नागरिकों पर लागू होती है, लेकिन पुलिस कर्मियों के मामले में नियम अलग क्यों हो जाते हैं।

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