One Nation One Election: When simultaneous elections were held in UP, the public expressed trust in one party. वन नेशन वन इलेक्शन: यूपी में जब साथ-साथ चुनाव हुए तो जनता ने ज्यादातर एक दल पर जताया भरोसा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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वन नेशन वन इलेक्शन: यूपी में जब साथ-साथ चुनाव हुए तो जनता ने ज्यादातर एक दल पर जताया भरोसा

One Nation One Election: उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एक साथ हुआ तो यहां की जनता ने ज्यादातर मौकों पर दोनों चुनाव में एक दल को सर माथे पर बिठाया। हालांकि कुछ मौकों पर कभी उसकी पसंद केंद्र सरकार के लिए अलग रही और राज्य सरकार के लिए अलग।

Fri, 20 Sep 2024 08:54 AMDeep Pandey हिन्दुस्तान, लखनऊ। अजित खरे
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वन नेशन वन इलेक्शन: यूपी में जब साथ-साथ चुनाव हुए तो जनता ने ज्यादातर एक दल पर जताया भरोसा

उत्तर प्रदेश ने 10 मौकों पर लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव एक साथ देखा है। यहां की जनता ने ज्यादातर मौकों पर दोनों चुनाव में एक दल को सर माथे पर बिठाया। कुछ मौकों पर कभी उसकी पसंद केंद्र सरकार के लिए अलग रही और राज्य सरकार के लिए अलग। यही नहीं जब अलग अलग चुनाव हुए हैं तो राज्य की अर्थव्यवस्था पर अपेक्षाकृत प्रतिकूल प्रभाव भी देखने को मिले हैं। यह असर राजकोषीय घाटे से लेकर ग्रोथ रेट में दिखने को मिलता है।

एक देश एक चुनाव के बाबत पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की हाल में आई रिपोर्ट में इस पहलुओं का भी विश्लेषण किया है। इसमें कहा गया है कि राज्य में अब तक 18 बार चुनाव हुए। 1961 से 1971 तक तीन बार, 1971 से 1980 तक दो बार, 1991 से 2000 के बीच तीन बार विधानसभा चुनाव हुए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि साथ साथ चुनाव कराने के बाद देश व राज्यों में जीडीपी में वृद्धि अधिक होती है। जबकि अलग अलग चुनाव कराने में इसमें कमी आती है। यह अंतर करीब 1.5 प्रतिशत अंक के बराबर होता है। यही नहीं मुद्रा स्फीति की दर अलग अलग चुनाव के मुकाबले एक साथ चुनाव कराने पर कम थी। बार बार होने वाले चुनाव प्रत्यक्ष रूप से गतिविधियों को बाधित कर सकते हैं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से अधिक अनिशिचतता के माध्यम से अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव कार्यों के कारण शिक्षकों की अनुपस्थिति और विभिन्न चुनावी संबंधी गतिविधियों के लिए स्कूलों का उपयोग तुलनात्मक रूप से खराब शैक्षिक परिणामों की व्याख्या कर सकता है।

कभी किसी दल को कभी किसी दल को मौका

1951-52 , 1957, 1962, 1967 1974 तक साथ चुनाव हुए तो एक दल कांग्रेस पर जनता ने भरोसा जताया। 1977 में साथ साथ चुनाव हुए तो केंद्र व यूपी से कांग्रेस से सत्ता से बाहर हो गई। 1980 में केंद्र में कांग्रेस की वापसी हुई तो यूपी में भी कांग्रेस की सरकार बन गई। अगला लोकसभा चुनाव विधानसभा लगभग साथ-साथ हुआ। कांग्रेस को प्रचंड बहुत दोनों जगह मिला। 1989 में फिर साथ-साथ चुनाव हुए तो फिर जनता ने कांग्रेस को बाहर किया। जनता दल की केंद्र व यूपी में सरकार बनी। लेकिन 1991 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी तो यूपी में भाजपा की। 1996 में केंद्र में किसी को बहुमत नहीं मिला। ऐसा ही हाल यूपी में हुआ। गठबंधन सरकारें दोनो जगहें बनीं। इसके बाद दो लोकसभा चुनाव व विधानसभा चुनाव की राहे अलग अलग हो गईं।

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