On the insult of kathawachak Mukut Mani his father said that cannot forget incident of cutting off braid कथावाचक मुकुट मणि के अपमान पर पिता ने तोड़ी चुप्पी, बोले -चोटी काटने की घटना नहीं भूल सकता, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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कथावाचक मुकुट मणि के अपमान पर पिता ने तोड़ी चुप्पी, बोले -चोटी काटने की घटना नहीं भूल सकता

इटवा में भागवताचार्य मुकुट मणि के साथ हुई बदसलूकी को लेकर परिवार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। पिता का कहना है कि मुकुट मणि ने गुरु से दीक्षा ली। वह 15 साल से कथा वाचने का काम कर रहा है। उसके साथ जो अपमान हुआ है वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है।

Sat, 28 June 2025 05:01 PMPawan Kumar Sharma लाइव हिन्दुस्तान, इटावा
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कथावाचक मुकुट मणि के अपमान पर पिता ने तोड़ी चुप्पी, बोले -चोटी काटने की घटना नहीं भूल सकता

इटवा में भागवताचार्य मुकुट मणि के साथ हुई बदसलूकी को लेकर अब परिवार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उनके पिता का कहना है कि बेटा ने गुरु से दीक्षा ली और 15 साल से कथा वाचने का काम कर रहा है। उसके साथ जो अपमान हुआ है वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है। सोचकर ही आहत हो जाते हैं, पूरा परिवार सदमे में है।

मुकुट मणि का घर सिविल लाइन के जवाहरपुरा गांव में है। उनके पिता रामप्रकाश यादव ने बताया कि उनके आठ बच्चे हैं। वह पिछले 15 साल से कथावाचक का काम कर रहा है। इन्होंने गुरु शिष्य परंपरा के अछल्दा के पास किसी गांव में अवधेश यादव को अपना गुरु बनाया और दीक्षा ली। पिता ने कहा कि बेटे की चोटी काटने की घटना से वह ही नहीं, पूरा गांव आहत है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार ठाकुर-ब्राह्मणों की होती है और कोई उसका अपना नहीं है। वह किराये के मकान में रहता था, केवल त्योहारों या किसी फंक्शन में ही गांव आता था। भाई रंजीत के मुताबिक कुछ दिन पांचवें नंबर के भाई की कैंसर से मौत होने पर मुकुटमणि गांव आया था।

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बायोलॉजी से बीएससी पास है संत सिंह

मुकुट मणि ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद बीए किया। बाद में अपने गुरु के साथ रहने लगा। वहीं, उनके साथ सहायक का काम करने वाले संत सिंह यादव ने बायोलॉजी से बीएससी किया है। पहले ये शिक्षक की नौकरी करते थे। लेकिन कोरोना के बाद शिक्षण कार्य छोड़कर कथावाचक मुकुट के संपर्क में आ गए और सहायक आचार्य बन गए। संत यादव ने कहा कि मुझे संस्कृत पढ़ना आता है। इसीलिये इस क्षेत्र में आ गए। सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल में पढ़ाया है, जिसके चलते आचार्य कहलाने लगे। जो घटना हुयी है वह भूलेंगे नहीं।

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