पहले सदन के फैसलों का सम्मान करना सीखें अफसर, सख्त नजर आईं महापौर, स्थगित की बैठक
लखनऊ नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक में महापौर और कार्यकारिणी सदस्यों ने प्रशासन पर पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया।

लखनऊ नगर निगम की कार्यकारिणी की बैठक गुरुवार को भारी हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। बैठक में महापौर और कार्यकारिणी सदस्यों ने प्रशासन पर पिछली बैठकों में पारित प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। महापौर सुषमा खर्कवाल ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक पुराने प्रस्तावों पर अमल नहीं होगा, तब तक नई बैठक नहीं बुलाई जाएगी।
बैठक शुरू होते ही माहौल गरमा गया। कार्यकारिणी सदस्य पृथ्वी गुप्ता और अरुण राय बैठक कक्ष में ही जमीन पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि नगर निगम प्रशासन जनहित के मुद्दों पर उदासीन रवैया अपनाए हुए है। कई पार्षद भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। पार्षदों का आरोप था कि सफाई व्यवस्था चरमरा गई है, सड़कों के गड्ढे महीनों से नहीं भरे गए हैं और नागरिक शिकायतों को अनदेखा किया जा रहा है। महापौर के बार-बार निर्देश देने के बावजूद अधिकारी काम में लापरवाही बरत रहे हैं।
महापौर ने जताई कड़ी नाराजगी, बैठक की कार्यवाही रोकी
महापौर ने बैठक के दौरान नगर निगम अधिकारियों से तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि पिछली कार्यकारिणी बैठकों में पारित प्रस्तावों पर अमल नहीं किया गया, जिससे जनता का विश्वास निगम पर से उठ रहा है। महापौर ने सख्त शब्दों में कहा “जब तक पुराने फैसलों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक नई योजनाओं पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं। अधिकारी पहले सदन के निर्णयों का सम्मान करना सीखें। इसके बाद उन्होंने कार्यकारिणी की बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
दो वर्षों से अधर में लटके हैं नगर निगम के प्रस्ताव
नगर निगम लखनऊ के सामान्य और विशेष सदनों में वर्ष 2023 से 2025 के बीच कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए थे, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। 13 अगस्त 2023 की बैठक में आलमनगर वार्ड में कल्याण मंडप निर्माण, अतिक्रमण हटाने, निगम कर्मचारियों के आश्रितों को कर छूट देने जैसे प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुए थे। बावजूद इसके, निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ और अतिक्रमणों की सूची आज तक नहीं बनी। इसी बैठक में संत गाडगे पार्क और शहीद लेफ्टिनेंट कमांडर रजनीकांत यादव के नाम पर सड़क का नामकरण भी तय हुआ था, लेकिन आज तक बोर्ड तक नहीं लगे।
मल्टीप्लेक्स शुल्क, अमृत 2.0 और कर छूट जैसे निर्णय भी अधर में
23 नवंबर 2023 की विशेष बैठक में निगम की आय बढ़ाने के लिए मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों से प्रति शो शुल्क 25 से बढ़ाकर 100 करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन इसका कार्यान्वयन नहीं हुआ। इसके बाद 2 सितंबर 2024 की बैठक में अमृत 2.0 परियोजना के तहत सरोजनी नगर और अमौसी क्षेत्र में एसटीपी निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने का फैसला हुआ था। एक वर्ष बीतने के बाद भी भूमि हस्तांतरण नहीं किया गया। 15 अप्रैल 2025 की बैठक में सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों को भवन कर, जलकर और सीवर कर से छूट देने का प्रस्ताव पारित हुआ, मगर छह माह बाद भी उस पर कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
प्रशासनिक सुस्ती बनी विकास में रोड़ा
बैठक के बाद पार्षदों ने कहा कि नगर निगम का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह निष्क्रिय हो गया है। सदन में पारित प्रस्तावों पर न तो कोई फॉलो-अप होता है, न प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाती है। पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी सप्ताहों में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे व्यापक आंदोलन करेंगे। महापौर ने भी स्पष्ट कहा कि निगम के अधिकारी पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना से काम करें, वरना वे स्वयं शासन को रिपोर्ट भेजेंगी।
आगामी बैठकों पर भी संशय
हंगामे और स्थगन के बाद नगर निगम की अगली कार्यकारिणी बैठक कब होगी, यह स्पष्ट नहीं है। महापौर सुषमा खर्कवाल ने कहा कि जब तक पुराने फैसलों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट नहीं दी जाती, तब तक नई बैठक नहीं बुलाई जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद निगम के भीतर प्रशासनिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। पार्षदों का कहना है कि जनता के हित में लिए गए निर्णयों को ठोस रूप देने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है, लेकिन वे सिर्फ बैठकों की खानापूरी में जुटे हैं।




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