दुष्टों का संहर करके ही सुरक्षित रह सकता है राष्ट्र, योगी बोले- सुरक्षा से ही समृद्धि
सीएम योगी ने कहा कि दुष्टों का संहार करके ही राष्ट्र सुरक्षित रह सकता है। सुरक्षा से ही समृद्धि आएगी। सीएम योगी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं और महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में हुए आयोजन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सुरक्षा के माहौल में ही स्मृद्धि के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। राष्ट्र की सुरक्षा के लिए नागरिकों का संरक्षण और दुष्टों का संहार जरूरी है। योगी, शुक्रवार को पूर्व गोरक्षपीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं और महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में समसामयिक विषयों पर संगोष्ठी शृंखला के पहले दिन ‘भारत के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां’ विषयक संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे थे।
मुख्य अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) अनिल चौहान का अभिनंदन करते हुए योगी ने आचार्य चाणक्य के एक उद्धरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कोई राष्ट्र वाह्य रूप से सुरक्षित हो और आंतिरक रूप से सुरक्षित न हो तो उसे अराजक राष्ट्र माना जाता है। ऐसा अराजक राष्ट्र शीघ्र समाप्त होने के कगार पर होता है। पाकिस्तान इसी तरह के अराजक राष्ट्र का उदाहरण है। आंतरिक अराजकता से वह पूरी तरह खोखला हो चुका है।
भारत मां के प्रति दुस्साहस बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि वैदिककाल से ही भारत में यह शिक्षा दी गई है कि धरती हमारी माता है और हम धरती के पुत्र हैं। कोई भी सुयोग्य पुत्र मां के साथ अराजकता बर्दाश्त नहीं कर सकता। भारत मां की आन, बान, शान के प्रति किसी ने दुस्साहस किया तो उसके खिलाफ हर भारतीय खड़ा होगा।
सेना के जवानों के कठिन परिश्रम से नागरिक सोते हैं चैन की नींद
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिए गए पंचप्रण का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सेना के जवानों के प्रति सम्मान का भाव रखने का भी एक संकल्प है। उन्होंने कहा कि नागरिक चैन की नींद इसलिए सो पाते हैं कि हमारे सैनिक देश के मोर्चे पर माइनस 50 डिग्री तापमान में कठिन परिश्रम करते हुए देश की सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं।
भारतीयों के लिए यह गर्व की बात है कि भारतीय सेना दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं में से एक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध के तौर तरीके बदले हैं। बदली परिस्थितियों में भी हमारी सेना ने दुश्मन को उसकी सीमाओं का एहसास कराया है।




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