पौराणिक विरासत को सुविधा और सुंदरीकरण की जरूरत
पौराणिक काशी की परिकल्पना 56 विनायकों के बिना अधूरी मानी जाती है लेकिन उनमें कुछ विनायकों की ही होती है क्योंकि वे आमजन की पहुंच में हैं, उन पर प्रशासन का भी फोकस रहता है।

वाराणसी। पौराणिक काशी की परिकल्पना 56 विनायकों के बिना अधूरी मानी जाती है लेकिन उनमें कुछ विनायकों की ही होती है क्योंकि वे आमजन की पहुंच में हैं, उन पर प्रशासन का भी फोकस रहता है। जबकि महत्व की दृष्टि से समान कई विनायक उपेक्षित हैं। उनमें कूष्मांड विनायक भी हैं। खराब सड़क के कारण उन तक पहुंच मुश्किल है। कंक्रीट के जंगल से घिरे इस सिद्धपीठ की पहचान गंदगी, पेयजल की कमी और बिजली के अव्यवस्थित तारों के चलते धूमिल हो रही है। इसे सुविधा और सुंदरीकरण की दरकार है।
काशी के पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग में 12 आदित्य, अष्ट भैरव के साथ 56 विनायक भी विभिन्न स्थानों पर स्थापित हैं। इनका उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड समेत कई पुस्तकों में मिलता है। उन 56 विनायकों में कूष्मांड विनायक भी हैं। फुलवरिया के पुराने इलाके में स्थित यह स्थान कभी पंचक्रोशी यात्रियों का श्रद्धा स्थल था। यहां आए बिना उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती थी। कालांतर में आबादी बसने के साथ यह देवस्थान कंक्रीट के जंगल से घिरता चला गया। फिर भी काशी की अन्तर्गृही परिक्रमा के यात्री यहां आने से नहीं चूकते। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी और प्रशासनिक अनदेखी के चलते यह पौराणिक मंदिर अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा है। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत के दौरान मंदिर के महंथ पं. कैलाशनाथ द्विवेदी समेत कई नेमियों ने कहा कि इस सिद्धपीठ की संकरी गलियां बदहाल हैं। उनमें निकले नुकीले पत्थर भक्तों की परीक्षा लेते हैं। गंदगी, स्ट्रीट लाइट की कमी, पेयजल के मुकम्मल इंतजाम का अभाव अखरता है। महंत ने कहा कि स्थानीय लोगों और नेमी श्रद्धालुओं का सहयोग न मिले तो यहां कोई व्यवस्था नहीं हो सकती। वह नगर निगम से बहुत निराश दिखे। प्रेमा देवी ने बताया कि परिसर में मां फूलेश्वरी का मंदिर भी बन रहा है। सुमन देवी ने कहा कि मेनरोड से मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क बदहाल हो गई है। उस पर पैदल चलना भी कठिन है। सड़क पर जगह-जगह पत्थर निकले हुए हैं। प्रेमकुमार यादव ने बताया कि बारिश के दिनों में जलजमाव के कारण रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। इन सब अव्यवस्था के चलते ही यहां आम दर्शनार्थियों की संख्या घटती जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि यदि सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के साथ उसे पक्का बनवा दिया जाए तो काफी सहूलियत होगी।
भक्तों ने लगवाई लाइट
बबिता पाल, देवेन्द्र सिंह ने कहा कि मंदिर परिसर में नगर निगम की ओर से स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी हैं। स्थानीय निवासियों ने स्वयं चंदा एकत्रित कर लाइटें लगवाई हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय लोगों के सहयोग से मंदिर में थोड़ा-बहुत निर्माण और रखरखाव का कार्य होता है। सुमन बोलीं कि बदहाल और संकरे पहुंच मार्ग के चलते यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या दिन-प्रतिदिन घटती जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि काशी की इस अनमोल विरासत को सहेजने के लिए नगर निगम को पहल करनी चाहिए।
भगवान भरोसे सफाई व्यवस्था
लाची पाल ने कहा कि नगर निगम की ओर से यहां सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। मंदिर परिसर या आसपास एक डस्टबिन भी नहीं है। इस नाते कूड़ा-कचरा के साथ गंदगी जमी रहती है। रिंकू सिंह ने कहा कि सफाईकर्मी मंदिर के पास भी नहीं फटकते कभी। अमृता सिंह बोलीं कि मंदिर की पवित्रता और परिसर की स्वच्छता बनाए रखने के लिए स्थानीय निवासी अपने स्तर से सफाई करते हैं। प्रतिदिन परिसर की सफाई न होने से श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
तार बने खतरनाक
रेनू पाल, रंजना ने ध्यान दिलाया कि मंदिर परिसर के बगल से गुजर रहे बिजली के तार श्रद्धालुओं के लिए खतरा बन गए हैं। हरे पेड़ों की डालियों के स्पर्श से उनमें चिंगारियां निकलती रहती हैं। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालु सहमे रहते हैं। टोनी मिश्रा, राजकुमारी आदि ने कहा कि यहां के लोगों ने विभाग का कई बार ध्यान दिलाया है मगर इन तारों को व्यवस्थित और सुरक्षित रखने की अब तक पहल नहीं हुई है।
कुछ देर की जलापूर्ति
प्रेमा पाण्डेय ने कहा कि मंदिर परिसर में पेयजल की समुचित सुविधा न होने के कारण श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर में पानी का कनेक्शन तो है, लेकिन सुबह-शाम जलापूर्ति कुछ देर के लिए ही होती है। बीच की अवधि में जल के लिए भक्तों को भटकना पड़ता है। शिवकुमारी ने कहा कि विकल्प के तौर पर परिसर में लगा समर्सिबल पंप बिजली पर निर्भर है। बिजली रही तो चला वरना बंद रहता है। बबिता बोलीं, मंदिर परिसर में एक सरकारी हैंडपंप लग जाए तो पूजन की जरूरत पूरी होने के साथ पेयजल की भी दिक्कत कम होगी। बताया कि गर्मी और पर्वों के समय भक्तों को पीने के पानी के लिए दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
गंदगी से पटा प्राचीन कुआं
रामचंद्र गुप्ता ने ध्यान दिलाया कि मंदिर के ठीक सामने का प्राचीन कुआं कूड़ेदान में तब्दील हो गया है। सफाई और उचित रखरखाव के अभाव में ऐतिहासिक कुआं गंदगी से पटा हुआ है। इसकी पहचान मिटती जा रही है। श्रद्धालुओं के अनुसार, एक समय यह कुआं जल का मुख्य स्रोत था, मंदिर की शोभा में भी चार चांद लगाता था। आज इसकी बदहाली देख मन कचोट उठता है। देवेन्द्र सिंह ने बताया कि नगर निगम के स्तर से इसके संरक्षण की कभी ठोस योजना नहीं बनी।
गड्ढों में गंदा पानी
सुमन ने बताया कि मंदिर के ठीक सामने स्थित घरों में सीवर पाइप लाइन की कोई व्यवस्था नहीं है। जगह के अभाव में यहां नालियां बनाना भी निवासियों के लिए संभव नहीं है। मजबूरी में लोग अपने घरों के भीतर ही गड्ढे खोदकर गंदा पानी एकत्रित करते हैं और फिर उसे बाल्टी से भरकर मंदिर के सामने वाली जर्जर सड़क पर फेंक देते हैं। संजू देवी, बबिता पाल ने कहा कि इसके कारण मंदिर का मुख्य मार्ग हमेशा गंदगी और दुर्गंध से भरा रहता है। इससे श्रद्धालुओं की आस्था आहत हो रही है। स्थानीय स्वच्छता और स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सीवर नेटवर्क न होने से पैदा हुई इस नारकीय स्थिति ने निवासियों के जीवन को दुश्वार कर दिया है।
एक नजर में
- 300 सौ साल से अधिक पुराना कुष्माण्ड विनायक मंदिर है।
- निवासियों के अनुसार, मंदिर पर मुगल हमला कर चुके हैं।
- 5,000 मंदिर के आसपास की लगभग आबादी
- वार्ड नं-3 फुलवरिया
हमारी व्यथा सुनें
1. यह मंदिर धर्मसंघ से जुड़ा हुआ है लेकिन इसके रखरखाव और कायाकल्प की ओर कोई ध्यान नहीं देता। मोहल्लेवासी ही सहयोग करते हैं।
- कैलाशनाथ द्विवेदी, महंथ।
2. काशी के 56 विनायकों में शुमार कूष्माण्ड विनायक के दरबार का अब तक कायाकल्प नहीं हो सका है। आखिर प्रशासन की नजर इधर कब पड़ेगी?
- प्रेमा देवी
3. कभी देश-विदेश के भक्तों की भीड़ खींचने वाला यह ऐतिहासिक विनायक मंदिर आज संकरी और उबड़-खाबड़ गलियों में सिमट गया है।
- राजमनी देवी
4. मंदिर जाने वाली सड़क पर निकले नुकीले पत्थर भक्तों की कठिन परीक्षा लेते हैं। पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
- सुमन देवी
5. बरसात के दिनों में जलजमाव और कीचड़ में भक्तों के कदम रूक जाते हैं। इस सिद्धपीठ की रौनक लगातार कम होती जा रही है।
- प्रेमा पाण्डेय
6. मंदिर परिसर में बिजली के लटकते तार और उनमें टकराहट से निकलती चिंगारियां अक्सर अनहोनी का संकेत करती हैं। इन्हें व्यवस्थित कराया जाए।
- प्रेम कुमारी यादव
7. सफाई कर्मचारियों के दर्शन दुर्लभ हैं। भक्त और स्थानीय निवासी खुद झाड़ू लगाते हैं। परिसर में एक डस्टबिन भी नहीं रखवाई गई है।
- बबिता पाल
8. सीवर लाइन न होने से घरों का गंदा पानी सड़क पर फेंका जाता है। इससे गंदगी फैलने के साथ मंदिर की पवित्रता भी खंडित हो रही है।
- सुमन
9. पेयजल की जरूरत पाइप लाइन और सबमर्सिबल से पूरी होती है। सरकारी हैंडपंप के अभाव में भक्तों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
- देवेन्द्र सिंह
10. पंचक्रोशी यात्रियों का कभी यहां सैलाब उमड़ता था, लेकिन आज बदहाल सड़क के कारण लोग यहां आने से कतराने लगे हैं।
- रिंकू सिंह
11. मां फुलेश्वरी मंदिर के अधूरे निर्माण से कष्ट होता है। विकास की मुख्यधारा से यह कोना आज भी कोसों दूर है। जिम्मेदारों को ध्यान देना चाहिए।
- शिवकुमारी
12. मंदिर परिसर के सामने स्थित पौराणिक कुएं की बदहाली बताती है कि हम अपनी विरासत को सहेजने में कितने लापरवाह हो चुके हैं।
- रामचंद्र गुप्ता
सुझाव और शिकायतें
सुझाव
1. कूष्माण्ड विनायक मंदिर मार्ग को चौड़ा किया जाए। इंटरलॉकिंग या पक्की सड़क का निर्माण हो ताकि स्थानीय लोगों के साथ पंचक्रोशी यात्रियों का आवागमन सुगमता से हो सके।
2. परिसर के सामने स्थित प्राचीन कुएं की सफाई कराकर उसे उचित जाली से ढंका जाए। फूलेश्वरि माता मंदिर का निर्माण पूर्ण कराया जाए। पूरे परिसर का कायाकल्प कराने की जरूरत है।
3. मंदिर परिसर के पास से गुजरने वाले बिजली के तारों को अंडरग्राउंड किया जाए या उन्हें सुरक्षित दूरी पर व्यवस्थित किया जाए। हादसे का डर कम होगा।
4. मंदिर परिसर में दो सरकारी हैंडपंप लगाए जाएं। इसके अलावा, नगर निगम की ओर से कूड़ेदान की व्यवस्था हो, स्थायी सफाई कर्मचारी नियुक्त हों।
5. कूष्माण्ड विनायक मंदिर के आसपास सीवर पाइप लाइन बिछाई जाए और उसे मुख्य सीवर लाइन से जोड़ा जाए ताकि वहां मलजल निस्तारण की समस्या दूर हो।
शिकायतें
1. कूष्माण्ड विनायक मंदिर जाने वाली सड़क कच्ची और उबड़-खाबड़ है, पत्थर उखड़ गए हैं। इससे भक्तों को आवागमन में परेशानी होती है।
2. ऐतिहासिक कुआं अपनी पहचान खो रहा है। फूलेश्वरि माता का मंदिर का निर्माण अधूरा पड़ा है। वर्षों से विनायक परिसर में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
3. बरसात में पेड़ों से टकराने से बिजली के तारों से चिंगारियां निकलती हैं। इससे मंदिर आने वाले भक्तों को खतरा रहता है।
4.पाइप लाइन से सीमित समय के लिए पानी मिलता है। डस्टबिन न होने और सफाई कर्मचारी के न आने से स्थानीय लोगों को खुद सफाई करनी पड़ती है।
5. सीवर पाइप लाइन न होने से घरों के गंदे पानी के लिए लोगों ने गड्ढे बना रखे हैं। हर दो दिन पर बाल्टी से गंदा पानी दूर फेंकना पड़ता है। यह मंदिर की पवित्रता के साथ सेहत के लिए भी सही नहीं है।
बोले जिम्मेदार
विवादित होने के कारण
नहीं बन पा रही सड़क
कूष्माण्ड विनायक मंदिर जाने वाली सड़क विवादित है। इस कारण उसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। मंदिर क्षेत्र समेत पूरे वार्ड में सीवर पाइप लाइन जल्द बिछवाई जाएगी। मंदिर में कूड़ेदान रखवाने के साथ प्राचीन कुएं की सफाई कराई जाएगी।
- मंजू देवी-पार्षद, फुलवरिया वार्ड-3




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