मेरे जीवनसाथी का किसी से अवैध संबंध है, क्या करूं? प्रेमानंद महाराज ने बताया उपाय
पति-पत्नी के रिश्तों में पड़ती दरारों और समाज में बढ़ रही अवैध संबंधों की घटनाओं ने हर किसी को हैरान और परेशान कर रखा है। इससे अपराध में भी बढ़ोतरी हुई है। जीवनसाथी के अवैध संबंधों की जानकारी मिले तो पति या पत्नी को क्या करना चाहिए। इसी को प्रेमानंद महाराज ने विस्तार से बताया है।

आजकल शादी के बाद अवैध संबंध और इन संबंधों के कारण अपराध की खबरें आम हो गई हैं। पति ही नहीं पत्नियां भी अवैध संबंधों के चक्कर में पतियों को मौत के घाट उतारने से एक पल के लिए भी नहीं चूक रही हैं। समाज में बढ़ रही इन घटनाओं ने हर शादीशुदा कपल को झकझोरकर रख दिया है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग भी इन स्थितियों को देखकर हैरान और परेशान हैं। इसी समस्या से रूबरू एक सवाल वृंदावन के प्रेमानंद महाराज के सामने भी आया है। किसी ने महाराज से पूछा कि मेरे जीवनसाथी का किसी से अवैध संबंध है, क्या करूं? इस सवाल का महाराज ने विस्तार से जवाब दिया है।
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि जीवनसाथी किन कारणों से बहक गया है,उन स्थितियों को समझें। जीवनसाथी की मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक आवश्यकताओं को समझना जरूरी है। उन्हें धर्म की दृष्टि से शुद्ध करे। जैसे शरीर का कोई अंग सड़ जाए तो पहले दवा दी जाती है, फिर आपरेशन या उसे काटने पर फैसला होता है। महाराज ने यह भी कहा कि अगर लाख समझाने पर भी जीवन साथी प्रमाद में ही डूबी रहें तो फिर धर्म के मार्ग को अपनाना चाहिए। धार्मिक मर्यादा का पालन करते हुए, सरकार द्वारा दी गई व्यवस्था को अपनाया जा सकता है।
महाराज ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा, गाली-गलौच या प्रताड़ना का सहारा लेना पाप है। यह न केवल अवैध है, बल्कि आपके धर्म और पुरुषार्थ को भी गिराता है। पाप का जवाब पाप से देना सज्जन का मार्ग नहीं। लेकिन अगर जीवनसाथी सच में पछताए और कहे कि अब वह ऐसी गलती नहीं होगी। मैं भजन और साधना से अपना मन शुद्ध करूंगा या करूँगी तो उस दिन से उसे भगवत् शरणागत माना जाएगा। तब पति को भी पुराने दोष याद करके उसे प्रताड़ित नहीं करना चाहिए। बल्कि प्रेम, अपनापन और सच्चे सहयोग से जीवनसाथी को आगे बढ़ाना चाहिए। प्यार में इतनी शक्ति है कि वह पतित को भी पावन बना सकता है।
नाम-जप का प्रभाव
महाराज ने कहा कि धर्म विरुद्ध आचरण का शुद्धिकरण नाम-जप और सत्संग से संभव है। पिछली गलती पर पछतावा हो और भविष्य के लिए संकल्प तो मनुष्य भगवान की दृष्टि में पावन हो जाता है। यह बातें स्त्री और पुरुष दोनों पर समान रूप से लागू होती हैं। कोई भी अगर अपने जीवनसाथी से विश्वासघात करता है तो वह धर्म, प्रेम और पवित्रता सबका अपमान करता है।
ऐसे में पहले खुद शुद्ध बनिए और जीवनसाथी को प्रेम से समझाइए। इसके लिए बार-बार कोशिश करने की जरूरत है। लेकिन सीमा पार हो जाए, तो धर्म का मार्ग चुनना चाहिए। यदि जीवनसाथी सुधर जाए तो पुरानी बातों को भूलकर उसे अपनाइए।
प्रेम में अपार शक्ति
महाराज ने कहा कि प्रेम में बहुत शक्ति होती है। जो प्रेम भगवत् मर्यादा में बंधा हो वही जीवन को सफल बना सकता है। इस बात को हर उस इंसान को समझना चाहिए जिसे रिश्तों में ठोकर मिली है और जो फिर भी धर्म पूर्वक जीना चाहता है।




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