यूपी में कैसा रहेगा इस बार मानसून? मौसम विभाग ने की किसानों के लिए चिंता वाली भविष्यवाणी
उत्तर प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने सोमवार को जारी दीर्घकालिक पूर्वानुमान में 'अल नीनो' के सक्रिय होने को इसका मुख्य कारण बताया है। प्रशांत महासागर में हो रहे बदलाव और उत्तरी गोलार्द्ध में कम बर्फबारी के कारण मानसूनी हवाएं कमजोर रहेंगी।

UP News: उत्तर प्रदेश के किसानों और आम जनता के लिए मौसम विभाग ने एक चिंताजनक पूर्वानुमान जारी किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के सोमवार शाम जारी दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक समुद्री परिस्थितियों और वायुमंडलीय बदलावों के कारण मानसूनी हवाएं इस बार अपनी पूरी ताकत नहीं दिखा पाएंगी, जिससे खेती-किसानी पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने इस शुष्क मानसून के पीछे तीन प्रमुख प्राकृतिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है।
मानसून कमजोर रहने के तीन बड़े भौगोलिक कारण
पहला 'अल नीनो' का खतरा: इस साल मानसून की बेरुखी का सबसे बड़ा कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में 'अल नीनो' (El Niño) का सक्रिय होना है। पिछले कुछ वर्षों से समुद्र में 'ला निना' की स्थिति थी, जो अच्छी बारिश के लिए उत्तरदायी मानी जाती है। हालांकि, अप्रैल से जून के बीच यह स्थिति तटस्थ होकर मुख्य मानसून अवधि के दौरान अल नीनो में बदल सकती है। अल नीनो को भारतीय मानसून का 'दुश्मन' माना जाता है, क्योंकि यह मानसूनी हवाओं की नमी को सोख लेता है, जिससे मानसूनी दबाव कमजोर हो जाता है।
दूसरा उत्तरी गोलार्द्ध में कम बर्फबारी: उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत में मानसून की सक्रियता यूरेशिया और उत्तरी गोलार्द्ध में होने वाली बर्फबारी पर भी निर्भर करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल सर्दियों और वसंत के मौसम में इन क्षेत्रों में बर्फ का फैलाव सामान्य से काफी कम रहा है। यह कम बर्फबारी मानसूनी दबाव तंत्र (Monsoon Pressure System) के विकास में बाधक बनती है, जिससे बारिश का वितरण असमान और कम हो जाता है।
तीसरा हिंद महासागरीय द्विध्रुव (IOD) की असमर्थता: हालांकि, हिंद महासागरीय द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole) के मानसून के अंत तक सकारात्मक होने की उम्मीद है, जो आमतौर पर बारिश के लिए मददगार होता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार 'अल नीनो' का नकारात्मक प्रभाव इतना प्रबल होगा कि सकारात्मक IOD भी उसकी भरपाई नहीं कर पाएगा।
किसानों की बढ़ेगी चुनौती
उत्तर प्रदेश की कृषि मुख्य रूप से मानसूनी बारिश पर निर्भर है। धान, मक्का और गन्ने जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के लिए समय पर और पर्याप्त बारिश अनिवार्य है। मौसम विभाग की इस भविष्यवाणी ने कृषि विभाग और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि बारिश कम होती है, तो किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों जैसे ट्यूबवेल और नहरों पर निर्भर रहना होगा, जिससे खेती की लागत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कम पानी वाली फसलों और उन्नत सिंचाई तकनीकों पर ध्यान दें।




साइन इन