Rising Gold and Silver Prices Cripple Jewelers and Artisans in Meerut बोले मेरठ: सोने-चांदी की 'चमक' में फीका पड़ा हुनर, Meerut Hindi News - Hindustan
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बोले मेरठ: सोने-चांदी की 'चमक' में फीका पड़ा हुनर

Meerut News - सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों ने मेरठ की सर्राफा मंडी में व्यापार को प्रभावित किया है। ज्वेलरी की मांग घटकर शून्य के करीब पहुँच गई है। कारीगरों के पास काम नहीं है और रोजी-रोटी का संकट बढ़ रहा है। कई कारीगर मजबूरी में दूसरे कामों की तलाश में निकल गए हैं।

Thu, 29 Jan 2026 12:58 AMNewswrap हिन्दुस्तान, मेरठ
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बोले मेरठ: सोने-चांदी की 'चमक' में फीका पड़ा हुनर

सोने और चांदी की लगातार बढ़ती जा रही कीमतों ने व्यापार के साथ ही कारीगरों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। एशिया की प्रमुख मेरठ सर्राफा मंडी में सन्नाटा पसरा है। हालात यह है कि ज्वेलरी की डिमांड शून्य की तरफ जा रही है। शादी एवं अन्य कार्यक्रमों के मद्देनजर लोग मजबूरी में ज्वेलरी खरीद रहे है। इस बिक्री को सर्राफा व्यापारी पांच से दस फीसदी के बीच मान रहे है। सर्वाधिक निवेशक सर्राफा बाजार पहुंच रहे है। जो सोने और चांदी में खूब निवेश कर रहे है। ऐसे में सर्राफा मंडी के 50 हजार से अधिक कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो रहा है।

पिछले दस-15 दिनों से जेवर गढ़ने वाले हुनरमदों के हाथ खाली है। दो जून की रोटी की तलाश में अब सर्राफा कारीगरों ने पलायन शुरू कर दिया। दस फीसदी के आसपास कारीगर काम नहीं मिलने से दूसरे कामों की तलाश में मजदूरी के लिए निकल गए। सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों से प्रभावित सर्राफा व्यापार एवं रोजी-रोटी के बढ़ते संकट से परेशान ज्वेलरी कारीगरों की स्थिति पर सलीम अहमद एवं लेखचंद सिंह की रिपोर्ट। सराफा बाजारों में आज हालात यह हैं कि चारों ओर सन्नाटा पसरा है। दुकानों के शीशों के पीछे सजी चमचमाती ज्वैलरी ग्राहकों की राह ताकती रहती है, मगर कदम रुकते नहीं। अब उपहार के तौर पर सोना-चांदी लेने वाले ग्राहक लगभग न के बराबर रह गए हैं। खरीदारी के लिए वही आते हैं जिनके घर में शादी-ब्याह है या जो निवेश की मजबूरी समझते हैं। शौक अब ज़रूरत में बदल गया है। पिछले एक महीने में चांदी एक लाख रुपये से अधिक बढ़ गई है। वहीं सोना भी अपनी रफ्तार में पीछे नहीं है। 10 से 15 हजार रुपए एक महीने में बढ़ गया है। वर्तमान में चांदी की कीमत 3.17 लाख रुपये और सोना 1.52 लाख रुपये ऊपर चल रहा है। चांदी के दाम मानों आसमान छू रहे हैं और उम्मीद एक साल में 5 लाख रुपये से ऊपर पहुंचने की जताई जा रही है। ऐसे में महंगाई का असर यह हुआ है कि ग्राहक दुकान तक तो आते हैं, मगर हाथ बहुत हल्का रहता है। भारी गहनों की जगह बेहद हल्की ज्वेलरी ली जा रही है, वह भी सोच-समझकर। वजह साफ है, कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि वजन के हिसाब से खरीदारी करने का बजट ही नहीं बन पाता। सोना पहले ही आम आदमी की पहुंच से दूर हो रहा था, अब चांदी भी उसी राह पर चल पड़ी है। इस महंगाई के बीच पिस रहा है आम आदमी और कारीगर का सपना। सूने पड़े सराफा बाजार में कारीगरों को काम भी नहीं मिल पा रहा है। हिन्दुस्तान बोले मेरठ टीम ने बाजार में सराफा कारोबारियों और उनके कारीगरों से संवाद किया। जहां कारीगर काम के इंतजार में बैठे रहते हैं और बड़ी संख्या में कारीगर काम नहीं होने से घर लौट गए हैं। सूने हाथ, भारी सपने और महंगाई की मार कभी जिन हाथों की उंगलियों से चांदी पिघलकर गहनों का रूप लेती थी, आज वही हुनरमंद हाथ हफ्तों से खाली बैठे हैं। हथौड़ी की ठक-ठक, भट्टी की आंच और नक्काशी की बारीक लकीरों के बीच पलने वाली जिंदगी आज खामोशी ओढ़े हुए है। चांदी और सोने की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने सिर्फ बाजार नहीं बदला, बल्कि कारीगरों के घरों का चूल्हा भी ठंडा कर दिया है। सहालग का सीजन, जो कभी कारीगरों के लिए सबसे व्यस्त वक्त होता था, इस बार भी उम्मीद नहीं बन सका। ऑर्डर नहीं हैं, काम ठप है और करीब पचास फीसदी से अधिक कारीगर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। चारों ओर पूरे उत्तर प्रदेश में यही तस्वीर है। अकेले मेरठ में ही चालीस हजार से ज्यादा कारीगर ज्वेलरी निर्माण से जुड़े हैं, जिनकी रोजी-रोटी आज अधर में लटकी है। व्यापारियों की समस्या, कारीगरों की पीड़ा सराफा में काम करने वाले कारीगरों की पीड़ा सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह एक पिता की चिंता है, जो बच्चों की फीस समय पर भरने के लिए गहनों को उलटता-पलटता है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि कई कारीगरों के सामने पेशा छोड़ने की मजबूरी खड़ी हो गई है, वहीं पेशा, जिसे पीढ़ियों से उन्होंने सहेजा, संवारा और जिया। व्यापारियों का कहना है कि बाजारों में आने वाले ग्राहकों की कभी चार-पांच ग्राम से लेकर एक तौले तक सोने के झुमकों की मांग रहती थी, वहां अब एक से डेढ़ ग्राम में ही सपने पूरे किए जा रहे हैं। तीन से चार ग्राम की अंगूठी में पूरे हो रहे आठ ग्राम के सपने, यह सिर्फ बाजार का बदलाव नहीं, आम आदमी की सिकुड़ती जेब की सच्चाई है। व्यापारी भी मानते हैं कि अब ठीक-ठाक ज्वेलरी के ही कभी-कभार ऑर्डर आते हैं, वह भी गिनती के। व्यापारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें सराफा बाजार में मौजूद व्यापारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। बाजार में एक अजीब-सी अस्थिरता है। कोई नहीं जानता कि आने वाले दिनों में हालात किस करवट बैठेंगे। कुछ व्यापारी अंतरराष्ट्रीय महंगाई को वजह बताते हैं, तो कुछ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों को दोष देते हैं। कई कहते हैं कि चांदी का औद्योगिक इस्तेमाल बढ़ने से उसकी खपत और कीमत दोनों बढ़ गई हैं। वजहें चाहे जो भी हों, असर सीधा कारोबार पर पड़ रहा है। जहां कारोबारी के साथ कारीगर भी इस समस्या को झेल रहा है। उन्हें पहले ऑर्डर आने के साथ ही अच्छा खासा काम मिलता था, कारीगरों का बढ़िया काम भी चलता था, लेकिन अब हालात ऐसे हो गए हैं कि उन्हें अपना खाली समय मोबाइल पर रील देखकर बिताना पड़ रहा है। ग्राहक लेकर चल रहे बजट, जितना आ जाए उतना सही व्यापारियों का कहना है कि महंगाई ने लोगों की सोच भी बदल दी है। पहले लोग गहनों का बजट बनाते थे, इतने ग्राम की चेन, इतनी वजनी चूड़ियां। अब तस्वीर उलट हो गई है, लोग अब रुपयों का बजट बनाकर आते हैं, इतने पैसों में जो बन जाए, वही दिखा दीजिए। यह बदलाव धीरे-धीरे नहीं, बल्कि मजबूरी में आया है। कुछ ही सालों में मध्यमवर्ग ने अपने सपनों को पैसों की सीमाओं में बांध लिया है। इसी कारण व्यापार पर काफी असर पड़ रहा है। कारोबार घट रहा है, जिसके चलते टैक्स की समस्या भी बढ़ जाएगी। जिसकी मांग बीते वर्षों के टर्नओवर के हिसाब से होगी। सवाल यह है कि जब बाजार ही सुस्त है, ग्राहक ही नहीं आ रहे, तो पुराना टर्नओवर कहां से पूरा होगा। व्यापारी चाहते हैं, कि हालात को समझते हुए राहत दी जाए, ताकि यह पारंपरिक कारोबार पूरी तरह हाथ से न निकल जाए। ना बेच रहे, ना ही खरीद रहे सोना व चांदी चांदी और सोने में आई महंगाई से व्यापारी भी बेबस हैं। उनका कहना है कि अब हल्की ज्वेलरी के ही कभी-कभार ऑर्डर मिलते हैं। बाजार में ऐसा सन्नाटा पहले कभी नहीं देखा गया, न खरीद, न बिकवाली। सर्राफ बताते हैं कि लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं, कि सोने की कीमत तीन लाख और चांदी पांच लाख से ऊपर जाएगी। महंगाई की वजह से खरीद नहीं रहे और इस उम्मीद में बेच भी नहीं रहे कि दाम और बढ़ेंगे। इस इंतज़ार ने बाजार को जकड़ लिया है। इस ठहराव का सबसे गहरा असर कारीगरों पर पड़ा है। रोज़ कमाने-खाने वाले इन हाथों के लिए खाली बैठना सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, आत्मसम्मान की चोट भी है। घर की जरूरतें, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों का खर्च, सब कुछ सवाल बनकर खड़ा है। हुनर है, मेहनत है, पर काम नहीं। वेल्यू एड - सर्राफा व्यापारी: 5000 (सप्लायर, होल सेलर, रिलेटर) - कारीगर : 5000 सूचीबद्ध, कुल संख्या- 30 हजार से 50 हजार के बीच - सर्राफा व्यापार सरकारी आंकड़े में : करीब 15 हजार करोड़, जीएसटी जाता है 442 करोड़ - एक दिन में सर्राफा व्यापार : 40 से 50 करोड व्यापार पर असर : बढ़ती कीमतों से ज्वेलरी के वजन पर आया सीधा असर - पहले 90 से 100 ग्राम तक वजन की ज्वेलरी लेते थे, अब यह घटकर 30-40 ग्राम पर आ गया सर्राफा व्यापारी यह चाहते है- - ज्वेलरी पर जीएसटी तीन फीसदी से शून्य हो अथवा इसे .5 फीसदी किया जाए - कस्टम ड्यूटी को छह फीसदी से घटाकर दो अथवा तीन फीसदी किया जाए इनका कहना- सोने और चांदी की महंगाई से व्यापर पर खासा असर पड़ा है, पहले दस लाख में सौ ग्राम सामान आता था, अब पचास ग्राम आ रहा है, ग्राहक का बजट ही बदल गया है। - अमित अग्रवाल अब बाजार में वही लोग आ रहे हैं जिन्हें बहुत जरूरत है, शादी विवाह के लिए ज्वेलरी चाहिए, लेकिन पहले बजट के रूप में ग्राम होता था अब रुपये हो गए हैं, इतनें जो आ जाए। - प्रदीप अग्रवाल, अध्यक्ष, मेरठ बुलियंस ट्रेडर्स एसोसिएशन कारोबार में फर्क केवल खरीदारी में आया है, कुछ लोग इन्वेस्ट के लिए खरीदारी कर रहे हैं और कुछ लोग मजबूरी में शादी विवाह के लिए, सोने चांदी पर महंगाई ही इतनी है। - विजय आनंद अग्रवाल, महामंत्री, मेरठ बुलियंस ट्रेडर्स एसोसिएशन अब उपहार के तौर पर सोना-चांदी लेने वाले ग्राहक लगभग न के बराबर रह गए हैं। खरीदारी के लिए वही आते हैं जिनके घर में शादी-ब्याह है या जो निवेश की जरूरत समझते हैं। - संदीप अग्रवाल ग्राहक दुकान तक तो आते हैं, मगर हाथ बहुत हल्का रहता है, भारी गहनों की जगह बेहद हल्की ज्वेलरी लेते हैं, वजह साफ है, कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि वजन के हिसाब से खरीदारी करने का बजट ही नहीं बनता। - निखिल अग्रवाल बाजार में व्यापार ही नहीं रहा तो ऐसे में कारीगर भी खाली रहते हैं, पहले जहां लोग अच्छा खासा सोना चांदी खरीदते थे अब वही बहुत हल्का हो गया है, ऐसे में कारोबार पर और कारीगरों पर फर्क पड़ रहा है। - सौरभ गर्ग महंगाई ने लोगों की सोच भी बदल दी है। पहले लोग गहनों का बजट बनाते थे, इतने ग्राम की चेन, इतनी वजनी चूड़ियां, अब तस्वीर उलट है। अब लोग रुपयों का बजट बनाकर आते हैं, इतने पैसों में जो बन जाए। - अरिहंत जैन अगर महंगाई पर समय रहते अंकुश नहीं लगा, तो वह दिन दूर नहीं जब सोना-चांदी सिर्फ़ यादों की चीज बनकर रह जाएंगे और मध्यमवर्गीय परिवारों के सपने शायद ही पूरे होंगे, इस समय कारीगरों भी परेशान हैं। - विजय गोयल सोने-चांदी की रिकॉर्ड कीमतों ने कारीगरों का काम छीन लिया है, सहालग का सीजन चल रहा है, जो कभी रोज़गार की बहार लेकर आता था, पर इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं, न दुकानों पर रौनक है, न कारीगरों के पास ऑर्डर। - मानेज गर्ग पहले लोग अच्छी खासी वजन की ज्वेलरी खरीदते थे, लेकिन अब वह केवल यह सोचकर आते हैं कि हमारे पास इतने पैसे में जितना वजन का सामान बन जाए, दस ग्राम वाला गहना घटकर तीन ग्राम रह गया है। - मनोज वर्मा इस महंगाई ने व्यापार के साथ कारीगरों का काम भी प्रभावित किया है, इस समय हालात ऐसे हैं कि ग्राहक दुकानों पर नहीं आ रहे हैं और कारीगरों के पास काम नहीं है, पहले ऑर्डर आते थे अब वे भी नहीं आ रहे। - विकास रस्तोगी बाजार की स्थिति को देखते हुए सरकार को जीएसटी में कमी करनी चाहिए, ताकि व्यापारियों को राहत मिले, पहले जो टर्न ओवर होता था अब वह नहीं होगा, बाजार में ग्राहक ही नहीं हैं, निवेशक भी सोच समझ के बाद आ रहे हैं। - दीपक जौहरी सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का असर व्यापारी, कारीगर और ग्राहकों पर पड़ रहा है, कीमत बढ़े, लेकिन स्थिरता भी जरूरी है, तभी व्याापार चलता है। बढ़ती कीमतों के साथ गिरावट का बड़ा झटका नुकसान देता है। - रवि प्रकाश अग्रवाल सोने और चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच इस समय करीब 20 से 25 फीसदी ही काम रह गया है। कारीगरों के लिए रोजगार का संकट बढ़ रहा है। दस फीसदी कारीगर बचे हैं बाकी दूसरे कामों की तलाश में निकल गए। - संत कुमार सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का व्यापार और कारीगरों के काम पर 85 फीसदी तक असर है। ज्वेलरी बिक नहीं रही, निवेशक भी प्योर गोल्ड खरीद रहे है, ज्वेलरी नहीं बिकने से कारीगरों के पास काम का अभाव है। - विपुल अग्रवाल सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों ने ज्वेलरी व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है, कारीगर खाली बैठे है। काम नहीं मिल पा रहा सरकार सर्राफा व्यापार बचाने को जीएसटी खत्म करें और कस्टम ड्यूटी कम हो। - सर्वेश सर्राफ, संगठन मंत्री यूपी सर्राफा एसोसिएशन सोने और चांदी की कीमत उम्मीदों से अधिक बढ़ चुकी है। अभी कुछ भी नहीं कह सकते कि किस स्तर पर पहुंचकर कीमतें रूकेगी। ऐसे में अस्थिरता के हालात में व्यापारी, कारीगर परेशान है, कारीगरों के पास काम नहीं है। - आधार मांगलिक सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच जिस तरह से अप्रत्याशित रिटर्न निवेशकों को मिला है, इसके बाद अब बाजार में आम ग्राहक गिनती में और निवेशक बड़ी संख्या में आ रहे है, अब निवेश हो रहा। - आशुतोष अग्रवाल अब तो ऑर्डर ही नहीं आ रहे हैं, छोटी मोटी चीजें बनाने के ऑर्डर आते हैं, जिनसे कारीगर का काम नहीं चलता, महंगाई इतनी हो गई है कि लोग छोटी चीजें बनवाने में भी दस बार सोचते हैं, काम मिलेगा तो काम चलेगा। - श्रीजाजुल बहुत सारे कारीगर तो खाली हैं, जब बाजार से काम ही नहीं मिल रहा तो करें क्या, ऐसे में तो हम लोगों के पास रोजी रोटी के लाले पड़ जांएगे, जल्द ही सोने-चांदी के दाम गिरें तो लोग खरीदारी करने के लिए आएं, और हमारा काम भी चले। - शेख नाजिर

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