बोले मेरठ : विकास की दौड़ में शहर को चाहिए सुविधाएं और साफ हवा-पानी भी
Meerut News - मेरठ में विकास के लिए विजन डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया गया है, जिसमें हरियाली, साफ आसमान, और युवाओं के लिए डिजाइन सेंटर की मांग की गई है। 14-15 सितंबर को विभिन्न वर्गों के लोगों ने सुझाव दिए कि शहर में...

विकास तो ठीक है, लेकिन हरियाली भी चाहिए क्रांतिधरा मेरठ को। युवाओं के लिए डिजाइन सेंटर चाहिए। खुली हवा में सांस लेने के लिए साफ आसमान हो। पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस उपाय होने चाहिए। शहर में जलनिकासी की उचित व्यवस्था हो। ट्रैफिक की ऐसी व्यवस्था हो कि परतापुर से मोदीपुरम, परतापुर से गंगानगर शहर में कहीं भी जाना हो तो बेहतर सुविधा मिले। यह है मेरठ शहर का विजन डॉक्यूमेंट। शहर के बुद्धिजीवियों, चिकित्सकों, खिलाड़ियों, कृषकों, उद्यमियों का का कहना है कि शहर का विकास तो हो रहा है। यह अच्छी बात है लेकिन सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए। समृद्ध उत्तर प्रदेश, विकसित उत्तर प्रदेश-2047, अभियान को लेकर 14 और 15 सितंबर को शहर के विभिन्न वर्ग के लोगों से पूर्व मुख्य सचिव दुर्गाशंकर मिश्र, नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने खुलकर बात की।
सरकार के विजन को लोगों के सामने रखा। लोगों को बताया कि आजादी के 100 वर्ष अर्थात 2047 तक उत्तर प्रदेश समृद्ध होगा। विकसित होगा। इसके तहत 14 और 15 सितंबर को लगातार चार सत्रों में 10 घंटे मेरठ शहर से लेकर उत्तर प्रदेश के विजन पर बात की गई। शहर के लोगों ने एक से बढ़कर एक सुझाव दिए। बताया कि क्रांतिधरा मेरठ में विकास की अपार संभावनाएं हैं। बस थोड़ी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं। मेरठ हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शहर के लोगों की अपेक्षाओं को पूर्ण किया जाए। विकास की बातें हुईं। विजन-2047 को लेकर सुझाव दिए गए। बताया गया कि खिलाड़ियों के लिए बेहतर इनडोर स्टेडियम हो। डिजाइन सेंटर की सुविधा उपलब्ध हो। दिल्ली हाट की तर्ज पर मेरठ हाट की सुविधा हो, ताकि स्थानीय उद्यमियों, छोटे कारोबारियों को एक जगह मिल सके। इन्होंने रखे विचार -स्वयं सहायता समूह/एमएसएमई हथकरघा इकाइयों, स्टार्टअप, इनोवेटर्स, राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार से सम्मानित लोगों, खेल जगत में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त खिलाड़ियों एवं अपनी विधा में ख्याति प्राप्त बुद्धिजीवियों, श्रमिक संगठनों आदि के प्रतिनिधि। - आईएमए-नीमा पदाधिकारियों, प्रतिनिधियों, औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों-प्रतिनिधियों, विभिन्न उत्पादन इकाइयों, भारतीय उद्योग परिसंघ, विभिन्न व्यापार संघों के पदाधिकारी। -जिले के अग्रणी, विकासशील किसान, औद्यानिक इकाइयों, मधुमक्खीपालन से जुड़े व्यवसयायों, मत्स्य पालकों, कृषि उत्पादक समूहों के पदाधिकारियों-सदस्यों, दुग्ध उत्पादकों, नगर विकास, अवस्थापना, संतुलित विकास, समाज कल्याण, पर्यटन, कृषि उत्पादन मंडी समितियों के साथ पदाधिकारी। -उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, व्यवसायिक शिक्षा, आईटी एवं इमर्जिंग प्रौद्योगिकी, चिकित्सा शिक्षा, खेल शिक्षा आदि के शिक्षकों एवं छात्रों, शिक्षा, सुरक्षा और सुशासन से जुड़े अधिकारी आदि। 14 सितंबर : सत्र एक में यह आए विचार - अर्जुन अवार्डी अलका तोमर ने कहा, मेरठ में मल्टीपर्पज इंडोर स्टेडियम होना चाहिए -एथलेटिक्स कोच गौरव त्यागी ने कहा पैरा खिलाड़ियों को हॉस्टल की सुविधा दी जाए -एमआईटी इन्क्यूवेशन फोरम के सीईओ रेहान अहमद ने कहा स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए इन्क्यूवेशन सेंटर और डिजाइन सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता है। -नागेन्द्र प्रताप सिंह तोमर ने कहा शहर में यातायात सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए रोड सेफ्टी पार्क और सड़क सुरक्षा को शिक्षा से जोड़ा जाए। -महिला उद्यमी शिप्रा शर्मा ने दिल्ली हाट की तर्ज पर मेरठ हाट की स्थापना की बात कही। 14 सितंबर : सत्र 2 में लोगों ने रखी राय -आईएमए सचिव डॉ. सुमित उपाध्याय ने कहा, मेडिकल कालेज परिसर में बनें बहुमंजिला भवन, ताकि खुला-खुला सा वातावरण मिले -अन्य चिकित्सकों ने कहा कि वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में ग्रीन बेल्ट, उपवन योजना पर काम हो। -नीमा के डा.नागेन्द्र ने योग और आयुर्वेद के चिकित्सालयों की व्यवस्था बेहतर किए जाने की बात कही -चिकित्सकों ने यह भी कहा कि जेनरिक दवाओं के मूल्य में एकरूपता होनी चाहिए। -शहर को प्रदूषण से बचाने के लिए विवाह मंडपों को बाहर होना चाहिए। 15 सितंबर : सत्र एक में यह आए विचार - फसलें ऑर्गेनिक आधार पर होनी चाहिए, केमिकल को कम किया जाए। - जिस तरह लोगों को दवाएं डॉक्टर के पर्चे पर मिलती हैं, उसी तरह खेती के लिए भी दवाएं मिलें। - फलों को पकाने के लिए चाइनीज केमिकल का प्रयोग होता है, इससे बेहतर हो कि वैज्ञानिक शोध कर ऐसी दवाएं बनाएं जो फलों के साथ नुकसान ना पहुंचाएं। - टूरिज्म को बढ़ावा मिले, यहां भोला झाल और हस्तिनापुर को टूरिस्ट पैलेस बनाया जाए, उनको विकसित किया जाए। - प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले, इसी मॉडल पर खेती तैयार की जाए, ताकि शहरीकरण के साथ गांवों को नुकसान ना हो। - जिस तरह शहरों में हाईवे और सड़कों का जाल बिछ रहा है उसी तरह गांव तक मशीनों की पहुंच को अच्छी सड़कें बनाई जाएं। 15 सितंबर : सत्र दो में लोगों ने रखी यह राय - स्कूलों में इनोवेटिव शिक्षा दी जाए, ताकि छात्र जब स्कूल या कॉलेज से निकलें तो उनको रोजगार मिले। - स्कूलों में अच्छी लाइब्रेरी बनाई जाएं, ताकि बच्चों को पढ़ाई में परेशानी ना हो, अच्छी किताबें मौजूद रहें। - शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन किया जाए, इनोवेटिव शिक्षा से छात्रों में बेहतर विकास होगा। - रिसर्च को मिलने वाला फंड छात्रों के लिए कम ना पड़े, ताकि शोध में कोई परेशानी ना हो, शोधार्थी अपना काम करते रहें। - बच्चों को वोकेशनल ट्रेनिंग मिले और उनको रोजगारपरक बनाया जाए, ताकि पढ़ाई कर बाहर जाएं तो परेशानी ना हो। कहना इनका... ट्रैफिक प्लान बेहतर हो दिल्ली से परतापुर तक रैपिड ट्रेन से 45 मिनट में आ जाते हैं। परतापुर से बेगमपुल तक 45 मिनट में नहीं पहुंच सकते। ट्रैफिक प्लान शून्य है। आरआरटीएस स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं नहीं। देश से युवा पढ़ाई कराने, पीएचडी करने और जॉब के लिए विदेश चले जाते हैं। सरकार को यहीं पर इंतजाम करते हुए विदेश जाने वाले युवाओं को रोकना होगा -गौरव जैन, सचिव, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिशन, मेरठ चैप्टर औद्योगिक क्षेत्र की भूमि फ्री होल्ड हो निजी तौर पर औद्योगिक पार्क विकसित करने वाले डेवलेपर्स को विकास शुल्क में विशेष छूट दी जाए। रैपिड-मेट्रो कॉरीडोर में दिल्ली में बैठकर टीओडी जोन, कॉमर्शियल गतिविधियों, मॉल आदि को लेकर तैयारी कर प्लान कर लिया, जबकि शेप चेंज की जाए। ग्रुप हाउसिंग पर फोकस हो। औद्योगिक इलाकों में लीज डीड भूमि को फ्री होल्ड किया जाए। - कमल ठाकुर, निदेशक, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीयल एस्टेट बागपत रोड। ड्रेनेज सिस्टम में हो बेहतर सुधार शहर के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के बजाए ओवरलोड कर दिया गया है। नालों में कितना पानी कहां से आ रहा है और जा रहा है, नगर निगम के पास न तो इसकी जानकारी है, न ही ड्रेनेज सिस्टम को ठीक करने की इच्छाशक्ति। हर साल जो बजट आता है, मरहम-पट्टी पर खर्च कर देते हैं, समस्या का स्थायी इलाज नहीं हो पाता। ड्रेनेज सिस्टम बेहतर हो -अंकित सिंघल, चेयरमैन, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिशन, मेरठ चैप्टर। मेरठ में बने डिजाइन सेंटर मेरठ में स्टार्ट अप को लेकर बड़ा काम हो रहा है। काफी युवा इससे जुड़े हैं। मेरठ में एमआईईटी में इन्क्यूवेशन सेंटर और डिजाइन सेंटर स्थापित करने की काफी आवश्यकता है। डिजाइन सेंटर स्थापित होने से युवाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा। मेरठ में बाहर से भी युवा आ सकेंगे। रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। -रेहान अहमद, सीईओ, एमआईईटी इन्क्यूवेशन सेंटर। जी फॉर प्लस भवन बने ताकि हरियाली बची रहे 100 एकड़ में बना एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज लगातार हरियाली से दूर हो रहा है। कॉलेज में जी-टू प्लस भवनों के निर्माण के बजाए जी-फॉर प्लस का निर्माण किया जाए, ताकि हरियाली को बचाकर पर्यावरण को स्वच्छ रख सकें। दवाओं के साल्ट की गुणवत्ता में कोई कमी नहीं तो एमआरपी अलग-अलग क्यों। एक साल्ट की दवा का एकदाम होना चाहिए। स्कूलों में सहजन के पेड़ लगाए जाएं, ताकि मिड-डे मील में इसके पत्तों को डालकर बच्चों में प्रोट्रीन की कमी को दूर कर कुपोषण से बचा सकते हैं। - डॉ. सुमित उपाध्याय, सचिव आईएमए कहना इनका गांवों के लिए मेट्रो ओरिएंटेड डेवलपमेंट नहीं होना चाहिए, बल्कि यह रूरल ओरिएंटेड होना चाहिए, ताकि गांवों का विकास हो। ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर एनर्जी को बढ़ावा मिले। - राजकुमार सभी ब्लॉकों में सरकार की ओर से देशी गायों के सीमन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि अच्छी नस्ल की गाय पैदा हों, बेहतर दूध उपलब्ध हो सके। - जहादिया सिंह गुर्जर लगातार हो रहे सड़कों के निर्माण से गांव पहुंचने में लगने वाला समय अब कम हो गया है, लेकिन अभी भी मशीनों या बड़ी गाड़ियों के लिए ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें बेहतर नहीं हैं। - जयबीर सिंह सोम बासमती धान का कल्टीवेशन एरिया बढ़ रहा है, ऐसे में एक राइस मिल मेरठ में होना चाहिए, ताकि किसान का धान वहां पहुंचे और फिर निर्यात हो, जिससे किसानों की आमदनी बढ़े। - विनोद सैनी जिस तरह से लगातार प्रोजेक्ट आ रहे हैं, उसके अनुसार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलना चाहिए, ताकि शहर और गांव के बीच बढ़ने वाला गैप मेंटेन किया जा सके। - सुनील फौजी फसलों पर छिड़काव की दवा या फिर फलों को पकाने के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाइयों का विकास हमारे यहां वैज्ञानिक करें, ताकि चाइनीज की दवाइयों पर निर्भरता कम हो। - डॉ. हरीशचंद्र शर्मा प्राकृतिक मॉडल पर खेती होनी चाहिए, हाइड्रोलिक तकनीक प्रयोग की जाए, ताकि गांवों में फसलें बेहतर हों, केमिकल का प्रयोग कम से कम होना चाहिए। - देवेंद्र सिंह मैं पूरी खेती ऑर्गेनिक करता हूं, मैंने घर में गोबर गैस लगवा रखा है, गैस के साथ ही खाद भी मिलता है, जिसका प्रयोग खेती में किया जाता है, इस तरह की खेती को बढ़ावा मिले। - धीरेंद्र सिंह मैं एक विजन देखती हूं, जो बच्चे कक्षा एक से बारह तक वोकेशनल ट्रेनिंग लेकर निकलते हैं, तो समझो कि वे अपनी आजीविका लेकर जाते हैं, इसलिए स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग मिले। - कौशर जहां हमारे यहां सीनियर सिटिजन भी हैं, जो रिटायर हो चुके हैं उनको भी इस मिशन में शामिल किया जाए, ताकि वे इस विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ा सकें। - डॉ. देवी सिंह हुण स्कूल एजूकेशन के क्षेत्र में इनोवेटिव शिक्षा का प्रावधान किया जाए, एक स्कूल में एक इनोवेशन लैब होनी चाहिए, जिसका लाभ बच्चों को मिले, रचनात्मक कार्य हों। - प्रशांत कुमार गुप्ता हस्तिनापुर को टूरिस्ट पैलेस की तरह डेवलप किया जाए, ताकि मेरठ को भी एक नई दिशा मिले, इससे अच्छा प्रभाव भी पड़ेगा। - रितु इस उद्देश्य को गांव से लेकर चलें और शिक्षा, स्वास्थ्य व कौशल पर सरकार को ध्यान देना चाहिए, साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाए। - रीना काकरान मातृभूमि के प्रति अपनी धारणा को बदलना पड़ेगा, यह हमारे लिए क्यों आवश्यक है, शिक्षा, स्वास्थ्य या विकास के क्षेत्र में ऐसे इनोवेशन करने हैं जिससे आने वाली पीढ़ियां उसका लाभ ले सकें। - आदेश मिश्रा मेरठ की इंडस्ट्री की ओर से जो सोशल के लिए फंड होता है वह रिसर्च के लिए कॉलेजों में छात्रों के लिए उपलब्ध कराया जाए, ताकि हायर एजूकेशन में रिसर्चर को कोई परेशानी ना हो। - प्रोफेसर निवेदिता ओडीओपी प्रोजेक्ट को विद्यालय शिक्षा और उच्च शिक्षा के साथ जोड़ दिया जाए तो रोजगारपरक शिक्षा की उपलब्धता होगी, इससे छात्रों को अच्छा लाभ भी मिलेगा। - विद्योत्मा मिश्रा माध्यमिक शिक्षा विभाग में आमूल-चूल परिवर्तन हो रहे हैं, जिसमें कुछ अच्छा भी हो रहा है, हमारे ग्रामीण परिक्षेत्र के छात्रों को जो किताबों की परेशानी रहती है उसके लिए सभी विद्यालयों में लाइब्रेरी बनाई जाए। - डॉ. नारायण शरण इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो रहा है और हमें आत्मनिभर्र होना जरूरी है इसके लिए छात्रों को इनोवेटिव शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि छात्र रोजगार के लिए ना भटकें। - यश
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