बोले मेरठ: स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने के साथ ही बदल जाएगी शहर की अर्थव्यवस्था
Meerut News - एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ में हाल ही में कई नई सुविधाएं शुरू की गई हैं, जिनमें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, क्यूआर कोड, ओपीडी में टोकन मशीन और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी शामिल हैं। मरीजों को अब रजिस्ट्रेशन से लेकर ओपीडी में नंबर आने का वेटिंग समय कम हो गया है।

एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ में हाल ही में एम्स की तर्ज पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, क्यूआर कोड पर पर्चा शुल्क, आधार नंबर, आभा आईडी से नया पर्चा बनाने की सुविधा समेत ओपीडी में टोकन मशीन, नम्बर का डिस्पले, मरीजों की पुकार के लिए माइक, सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा के लिए चार सौ एक्स आर्मी मैन समेत अन्य तमाम सुविधाएं शुरू की गई हैं। ऐसे में मरीजों को पर्चा काउंटर पर रजिस्ट्रेशन से लेकर ओपीडी में नंबर आने का वेटिंग समय बहुत कम हो गया है। वर्तमान में सभी वार्ड, अस्पताल, ओपीडी को इंटरकॉम से जोड़ा जा रहा है। इन्हें सीसीटीवी कैमरों के पास लगाया जा रहा है, ताकि अगर कोई उपचार में लापरवाही बरते तो इसे रोका जा सके।
वेस्ट यूपी के तमाम जिलों से मेडिकल आने वाले मरीजों के लिए मेरठ पहुंचने को सड़क मार्ग की लगातार कनेक्टीविटी बेहतर हो रही है। जल्द रैपिड सेवाएं शुरू होने वाली हैं। मेडिकल पहुंचने के लिए सिटी ट्रांसपोर्ट के लिए प्रीपेड ई-रिक्शा, ट्रैक्सी, ई-सिटी, एम्बुलेंस बस समेत अन्य तमाम परिवहन सुविधाएं संचालित हो रही हैं। मेरठ शहर चिकित्सा सुविधाओं का हब है। हजारों की संख्या में इलाज करने के लिए दूसरे जिलों से मरीज यहां पहुंचते हैं। 151 एकड़ के विशाल परिसर में फैला एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश के सबसे पुराने और नामचीन कॉलेजों में शुमार है। अगस्त 1966 से अब तक हजारों छात्र यहां से पढ़कर निकल चुके हैं। मेडिकल के इन विभागों का हो रहा विस्तार बर्न यूनिट, कार्डियोलोजी लैब, कैंसर मरीजों की रेडियोथैरेपी, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, वेंटिलेटर युक्त टॉमा सेंटर, न्यूरो सर्जरी, डायलिसिस, पीजीआई से जुड़ा टेली आईसीयू जैसी सुविधाओं का यहां विस्तार हो रहा है। हर कोई बोला एम्स मेरठ मेडिकल कॉलेज को एम्स जैसा संस्थान बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। डॉक्टर, दवा कारोबारी, युवा, नौकरीपेशा हर वर्ग के लोग और प्रमुख संगठन इसके समर्थन में हैं। उनका कहना है सरकार हर शहर में मेडिकल कॉलेज खोल रही है तो पुराने मेडिकल कॉलेजों को एम्स का दर्जा मिलना चाहिए। एम्स बनने से बढ़ जाएंगी यह सुविधाएं -अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदेश सरकार पर निर्भरता खत्म होगी। -चिकित्सकों की कमी खत्म होगी, संस्थान खुद नियुक्ति कर सकेगा। -विशेषज्ञ डॉक्टरों के आने से चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा। -नए विभाग बनने से शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। -विशेषीकृत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। -बजट बढ़ने से दवाओं और अन्य सुविधाओं में इजाफा होगा। एक नजर में - कुल भूमि 151 एकड़, इसमें से 52 एकड़ भूमि रिक्त -1963 में नींव पड़ी, 66 में पहला बैच चला -कई एम्स से ज्यादा 151 एकड़ भूमि है एलएलआरएम के पास -प्रदेश का सबसे पुराना राजकीय नर्सिंग कॉलेज है यहां - फार्मेसी कॉलेज, छह पैरामेडिकल कोर्स हैं - यहां से पढ़े छात्र देश-दुनिया के कई बड़े अस्पतालों में प्रतिष्ठित डॉक्टर - रोजाना तीन से चार हजार मरीजों की ओपीडी - 1186 बेड का अस्पताल - फैकल्टी के कुल 236 पद स्वीकृत - नर्सिंग के 903 पोस्ट प्रदेश सरकार की ओर से मेरठ में एम्स और हाईकोर्ट बेंच की मांग का प्रस्ताव केंद्र सरकार के बजट में भेजे जाने पर सांसद अरुण गोविल, राज्यसभा सांसद डॉ.लक्ष्मीकांत वाजपेयी और पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा है कि यह मेरठ के लिए ही नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मांग है। इससे दिल्ली के एम्स पर बोझ घटेगा। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। बजट में निश्चित तौर से होगा विचार जिस तरह से प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रख मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स स्थापना का प्रस्ताव केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष रखा है तो निश्चित तौर से इस पर विचार होगा। मेरठ में एम्स को लेकर सारी स्थिति, परिस्थिति हैं। ऐसे में सरकार बजट में घोषणा करेगी। इसकी पूरी उम्मीद है -डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, राज्यसभा सांसद। दिल्ली के एम्स का लोड घटेगा गोरखपुर, रायबरेली में जब एम्स की सुविधा है तो निश्चित तौर से मेरठ में भी इसकी व्यवस्था होनी चाहिए। मैंने खुद सरकार का ध्यान आकृष्ट किया था। अब प्रदेश सरकार की ओर से वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। इसका सबसे बड़ा फायदा तो यह होगा कि दिल्ली के एम्स का लोड काफी घट जाएगा। मेरठ और आसपास के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। जल्द ही इस मामले में मैं केंद्र सरकार में बात करूंगा -अरुण गोविल, सांसद। 2009 से लगातार उठा रहा था एम्स के मामले को जब मैं पहली बार 2009 में सांसद बना था, तब से लगातार मैंने मेरठ में एम्स की मांग को प्रमुखता से उठाता रहा। तब दिल्ली से बाहर एम्स की बात पर विचार नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में गोरखपुर, रायबरेली में एम्स की स्थापना हो चुकी है। ऐसे में अब मेरठ की मांग पर विचार होना चाहिए। यह बड़ी बात है कि प्रदेश सरकार ने पहल की है, जिसका स्वागत है -राजेन्द्र अग्रवाल, पूर्व सांसद। एम्स मेडिकल के लिए उठायी आवाज एम्स का असली हकदार है एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज मेरठ मेडिकल कॉलेज एम्स का दर्जा पाने का हकदार है। प्रस्ताव तैयार कराकर भेजा है। लगातार इसके प्रयास जारी रहे। यहां जमीन समेत वह सभी संसाधन उपलब्ध हैं जो एम्स का दर्जा दिलाने के लिए जरूरी हैं। यह मेडिकल कॉलेज वेस्ट यूपी के 14 जिलों मरीजों के इलाज का जिम्मा उठाए हुए है। - डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, एलएलआरएम, मेडिकल कॉलेज पर्याप्त जमीन उपलब्ध मेडिकल कॉलेज के पास पर्याप्त जमीन है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा दे दिया जाए तो पश्चिमी उप्र में चिकित्सा सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी। इसकी जरूरत भी है -डॉ. अरविंद कुमार, प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज रेफर नहीं होगे मरीज चिकित्सा सेवाएं में विस्तार होने से यूजी, पीजी की सीटें बढ़ेंगी। असाध्य बीमारियों का मरीजों को सस्ती और अच्छी चिकित्सा सुविधा यहीं मिलने लगेगी। दिल्ली एम्स का भार कम होगा। मेडिकल कॉलेज को एम्स बनना चाहिए। डॉ. अमरजीत सिंह, प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज उच्चता के स्तर का दर्जा मिले एलएलआरएम से यूपी, पीजी और सुपर स्पेशलियटी के कोर्स की सीटों में इजाफा होगा। बेहतरीन चिकित्सक तैयार होंगे। फैकल्टी और संसाधनों मरीजों का इलाज, संस्थान को उच्चता के स्तर का दर्जा मिलना चाहिए। -डॉ. ललिता चौधरी, मेडिकल कॉलेज सरकार ध्यान दे इतने पुराने कॉलेज को अब तक उच्च स्तरीय संस्थान बन जाना था। मैंने 1984 में यहां से एमबीबीएस किया था तब से अब तक काफी बदलाव आ चुका है। गुणवत्ता का स्तर उच्च संस्थान का मिलना चाहिए। सरकार ध्यान दे तो सूरत बदल सकती है। -डॉ. तनुराज सिरोही, फिजिशियन सबसे पुराना मेडिकल दर्जा मिलें मेरठ मेडिकल कॉलेज प्रदेश के सबसे पुराने मेडिकल कॉलेजों में है। इसे एम्स का दर्जा देने से पूरे वेस्ट यूपी की चिकित्सा व्यवस्था में सुधार होगा। मरीजों को रेफर नहीं करना होगा। उन्हें दिल्ली के बजाय मेरठ में ही सस्ता और अच्छा इलाज मुहैया हो सकेगा। डॉ. श्वेता शर्मा, प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज एम्स बने तो आएंगी नई प्रतिभाएं पश्चिमी उप्र के तकरीबन सभी बड़े चिकित्सक एलएलआरएम के पढ़े हैं। मैंने 1983 में यहां से एमबीबीएस और 87 में एमडी किया। मेडिकल कालेज की साख प्रदेश में सर्वोच्च है। एम्स का दर्जा मिले तो मेडिकल कॉलेज नई प्रतिभाओं को आकर्षित कर सकेगा। -डा. राजीव अग्रवाल, हृदय रोग विशेषज्ञ चिकित्सा और शिक्षा स्तर में होगा सुधार चिकित्सा संस्थानों को इतना सक्षम बना देना चाहिए कि वहां हर प्रकार का इलाज मिल सके। मेरठ मेडिकल को एम्स बनाने पर सरकार ध्यान दे, यह एक जरूरी मुद्दा है। -मनोज अग्रवाल, दवा व्यापारी एम्स के अलावा दूसरा विकल्प नहीं वेस्ट यूपी में दो दशक में निजी व सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विकास हुआ है लेकिन एम्स की कमी पूरी नहीं हो पाई। मेरठ सबसे पुरानी कमिश्नरी है। इसका क्षेत्रफल काफी बड़ा है। एम्स बनने से नई सुविधाएं आएंगी। -घनश्याम मित्तल, महामंत्री, होलसेलर एंड रिटेलर केमिस्ट एसोसिएशन मेरठ सबसे बड़ा हकदार एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज को पहले ही एम्स जैसे संस्थान का दर्जा मिल जाना चाहिए था। ये वेस्ट यूपी की बहुत बड़ी जरूरत है। काफी समय से ये मांग की जा रही है। इसके बनने से 14 जिलों के मरीजों को फायदा होगा। -रजनीश कौशल, महामंत्री, जिला मेरठ केमिस्टस एंड ड्रगिस्टस एसोसिएशन गंभीर मरीजों का होगा इलाज कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों का इलाज आसान होगा। मेरठ को एम्स मिलता है तो शहर ही नहीं, वेस्ट यूपी के लोगों को अच्छे इलाज का मजबूत विकल्प मिल सकता है। अर्चना चौधरी, शिक्षिका
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