मेरठ: स्वास्थ्य सेवाओं में जिंदगी का हिस्सा बनने लगा एआई
Meerut News - - एआई तकनीक से आगे बढ़ रहा स्वास्थ्य विभाग - आंखों से लेकर टीबी और
- डायबिटिक रेटिनोपैथी, टीबी और ऑपरेशन में एआई से हो रही मरीजों को स्क्रीनिंग- रोजाना एआई से स्क्रीनिंग की रिपोर्ट मधुमेह एआई व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जा रहीमेरठस्वास्थ्य सेवाओं में एआई की अहम भूमिका दर्ज हो रही। मरीजों की स्क्रीनिंग कर बीमारियों का आसानी से एआई से पता लगाया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में डायबिटिक रेटिनोपैथी, टीबी और ऑपरेशन में एआई से हो रही मरीजों को स्क्रीनिंग हो रही है। रोजाना एआई से स्क्रीनिंग की रिपोर्ट मधुमेह व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जा रही है। इस ग्रुप में प्रदेश के सरकारी चिकित्सक जुड़े हैं, चिकित्सकों के लिए एआई जांच से उपचार करना आसान हुआ है।
शासन भी चिकित्सकों को एआई से जोड़ते हुए उन्हें जागरुक करने की पहल शुरू कर रहा है। इस वर्ष की थीम स्वास्थ्य के लिए एकजुट विज्ञान के साथ खड़े रहे हैं।शुगर मरीजों की आंखें कितनी होंगी खराब, बता रहा एआईएलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में एआई का प्रयोग कर शुगर मरीजों की आंखों की स्क्रीनिंग की जा रही है। डायबिटिक रेटिनोपैथी लेजर फोटो कोएगुलेशन द्वारा (लेजर, इंजेक्शन, सर्जरी) कर आंखों के पीछे की झिल्ली से जुड़ी बीमारी ठीक करने में एआई की मदद ली जा रही है। हर रोज दो शुगर मरीज की एआई से स्क्रीनिंग की जा रही है।टीबी की स्क्रीनिंग की जा रही हैजिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. विपुल कुमार ने बताया कि जनवरी से एआई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। चार आधुनिक तकनीक एआई बेस्ड पोर्टेबल मशीनें मिली हैं। इन मरीजों से शहर, गांव-गांव में पहुंचकर स्क्रीनिंग कर टीबी के मरीजों की तलाश की जा रही है। टीबी के मरीजों खोजने में तेजी आई है। मशीन की खासियत है कि यह एआइ बेस्ड एक्स-रे मशीन छोटी और हल्की है, जिसे कहीं भी ले जाने में आसानी है। जो एक्स-रे होते ही चंद सेकेंड में फेफड़ों की संदिग्ध स्थिति का विश्लेषण कर देती है।एआई से सफल ऑपरेशन बढ़े, संक्रमण में आई कमीहेल्थ एआई विशेषज्ञ डॉ. अनुज त्यागी ने बताया कि एआई के उपयोग से ऑपरेशन करने में आसानी और सफलता दर में सुधार हो रहा है। रेडियोलॉजी जांच, लेप्रोस्कोपिक प्रक्रियाएं सर्जन को सूक्ष्मता से काम करने में मदद करती हैं, जिससे चीर-फाड़ कम होती है और रिकवरी तेज होती है।128 मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी मिलीजेआर डॉ. भावना चौधरी एवं डॉ. प्रियांशी जैन के अनुसार अक्तूबर से अब तक 256 मरीजों की स्क्रीनिंग एआई से की गई। जिसमें 128 मरीजों में डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी मिली। इन मरीजों में 102 मरीज ऐसे थे जो दूसरे विभागों से डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी की जांच को रेफर हुए थे। एआई से स्क्रीनिंग के बाद बीमारी पता करने में जो रिजल्ट सामने आए वह 95 फीसदी सही पाए गए।एआई जांच से आसान हो रहा उपचारडायबिटिक रेटिनोपैथी मधुमेह की गंभीर जटिलता है, जो आंख के पीछे के प्रकाश-संवेदनशील ऊतक (रेटिना) की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। रोजाना एआई से स्क्रीनिंग की रिपोर्ट मधुमेह एआई व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर की जा रही है। - डॉ. प्रियांक गर्ग, रेटिना सर्जन एलएलआरएम मेडिकल कॉलेजजांच में समय की बचतएआई से स्क्रीनिंग करने में डायबिटिक रेटिनोपैथी बीमारी का पता करने में चंद मिनटों का समय लग रहा है। इसके परिणाम 95 फीसदी सटीक आ रहे हैं। एआई से एमबीबीएस चिकित्सक शुगर मरीजों का इलाज कर समय-समय पर जांच कर पता लगा सकता है कि शुगर का असर आंखों पर तो नहीं है। - डॉ. लोकेश कुमार सिंह, विभागाध्यक्ष नेत्ररोग विभाग
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