यूपी के इस शहर में ऐक्टिव है मरीज माफिया, अब चलेगा पुलिस का चाबुक; ऐक्शन शुरू
जिला अस्पताल में मेडिकल स्टोर के एजेंट घूमते रहते हैं। वे मरीजों को बरगला कर सस्ते दामों पर दवा दिलाने का झांसा देकर अपने दुकान पर ले जाते हैं और फिर महंगी दवाएं दिलाते हैं। जबकि, प्रधानमंत्री मंत्री जनऔषधि केंद्र पर ऐसी सभी दवाएं सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं।

यूपी के गोरखपुर के मरीज माफिया पर एक बार फिर पुलिस का चाबुक चलेगा। जिला अस्पताल में भर्ती गरीब मरीजों को जबरन दवा बेचने वाले दुकानदारों के ड्रग लाइसेंस को पुलिस निरस्त कराएगी। पिछले दिनों जिला अस्पताल में दवा न लेने पर मारपीट मामले में दर्ज केस के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी पुलिस ने पकड़ा था। सात लोगों का शांतिभंग में चालान किया गया था। पकड़े गए लोगों से पूछताछ के आधार पर उनके दुकानों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं दुकानों के ड्रग लाइसेंस को निरस्त करने के लिए पुलिस पत्राचार करेगी। ड्रग विभाग को पत्र भेजने के साथ ही डीएम को भी इससे अवगत कराया जाएगा, ताकि कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
दरअसल, जिला अस्पताल में मेडिकल स्टोर के एजेंट घूमते रहते हैं। वह मरीजों को बरगला कर सस्ते दामों पर दवा दिलाने का झांसा देकर अपने दुकान पर ले जाते हैं और फिर महंगी दवाएं दिलाते हैं। जबकि, प्रधानमंत्री मंत्री जनऔषधि केंद्र पर वे सभी दवाएं सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। इसी तरह एक मरीज के तीमारदार को इसकी जानकारी लग गई थी और वह बाहर एजेंट के जरिए दवा न लेकर खुद दूसरे दुकान से सस्ते दामों पर दवा लेकर आया था। इसके बाद दुकान के एजेंटों ने जिला अस्पताल में घुसकर उसके साथ मारपीट की थी। पुलिस ने इस मामले में 20 अगस्त को जैतपुर निवासी सुशील कुमार भारती की तहरीर पर केस दर्ज किया था।
इस मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी की गई थी। वहीं अगले ही दिन सीओ कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे थे तो पांच दवा दुकानों के एजेंट मिल गए थे। उन्हें पुलिस ने दबोच लिया था और शांतिभंग में चालान किया था। अब इन्हीं एजेंटों के जरिए मिले नाम के आधार पर पुलिस मेडिकल स्टोर के लाइसेंस को निरस्त कराने की तैयारी में है।
अभियान चला तो थमी थी दलाली, नहीं खुली चौकी
सरकारी अस्पतालों में मरीज माफिया के खिलाफ करीब डेढ़ वर्ष पहले पुलिस ने अभियान चलाया था तो उसका असर भी सामने आया था। सरकारी अस्पतालों से दलाल भी साफ हो गए थे और एंबुलेंस माफिया भी मरीजों को बरगला कर बाहर नहीं ले जा रहे थे। उसी समय जिला अस्पताल में एक चौकी भी खुलने का फैसला हुआ था, जिसके लिए जगह भी चिन्हित कर दी गई थी। लेकिन अफसरों के तबादले के बाद पहल नहीं की गई और चौकी नहीं खुल सकी।




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