Many Dalit faces are trying their luck for the post of UP BJP state president, these names are also in the race यूपी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के लिए कई दलित चेहरे भी जोर आजमाइश में जुटे, ये नाम भी रेस में शामिल, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के लिए कई दलित चेहरे भी जोर आजमाइश में जुटे, ये नाम भी रेस में शामिल

यूपी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के लिए कई दलित चेहरे भी जोर आजमाइश में जुट गए हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया, विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर सहित कई नाम शामिल हैं।

Thu, 31 July 2025 06:15 AMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष के लिए कई दलित चेहरे भी जोर आजमाइश में जुटे, ये नाम भी रेस में शामिल

यूपी भाजपा के नए प्रदेशाध्यक्ष के ऐलान में जितना विलंब हो रहा है, दावेदारों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। कई ओबीसी व ब्राह्मण चेहरों के अलावा कुछ दलित चेहरे भी जोर आजमाइश में जुटे हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री रामशंकर कठेरिया, विधान परिषद सदस्य विद्यासागर सोनकर सहित कई नाम शामिल हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो ये दावेदार लगातार दिल्ली में लॉबिंग के साथ ही संघ दरबार में भी हाजिरी लगाने में जुटे हैं। हालांकि भाजपा ने अभी तक कभी प्रदेश अध्यक्ष पद पर किसी दलित पर दांव लगाने का प्रयोग नहीं किया है।

भाजपा में इन दिनों एक ही चर्चा है कि नया राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष कौन होगा। हालांकि इस चर्चा को उस समय बड़ा झटका लगा, जब उपराष्ट्रपति पद से जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। उसके बाद से धनखड़ के इस्तीफे के कारणों और नये उपराष्ट्रपति को लेकर चर्चाएं अधिक तेज हो गईं। इस बीच प्रदेश अध्यक्ष पद पर कोई फैसला न हो पाने का असर पार्टी के कामकाज पर भी पड़ता दिख रहा है। दरअसल मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी लोकसभा चुनाव के बाद ही पार्टी नेतृत्व के समक्ष पद छोड़ने की इच्छा जता चुके हैं।

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क्या नया प्रयोग करेगा भगवा दल

जहां तक नये प्रदेश अध्यक्ष का सवाल है तो फिलहाल यह मामला लगातार टलता चला आ रहा है। दावेदारों की बात करें तो पार्टी किसी पिछड़े या ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगा सकती है। इन चेहरों की संख्या आधा दर्जन से अधिक है। इनके अलावा कई दलित दावेदार भी सक्रिय हैं। पहला नाम रामशंकर कठेरिया का है, जो आगरा व इटावा से सांसद रहे हैं। वर्ष 2024 का चुनाव वे हार गए थे। इटावा के सांसद रहते हुए कई विवादों से भी घिरे रहे। दूसरा नाम एमएलसी विद्यासागर सोनकर का है। तीसरा राष्ट्रीय मंत्री रहे विनोद सोनकर का बताया जा रहा है। हालांकि इनमें से कोई जाटव समाज से आने वाला चेहरा नहीं है जबकि दलितों में सर्वाधिक हिस्सेदारी जाटव समाज की ही है। जहां तक जाटव चेहरों का सवाल है तो योगी सरकार में मंत्री बेबीरानी मौर्य व असीम अरुण इस समाज से आते हैं। लाख टके का सवाल यह है कि भाजपा क्या किसी दलित के हाथ सूबे के संगठन की कमान सौंपेगी और यदि हां तो वह चेहरा जाटव होगा या गैर जाटव। नये अध्यक्ष के नेतृत्व में ही पार्टी 2027 के रण में उतरेगी।

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