अस्पतालों में पकड़ाया बड़ा खेल, तीन सीएमओ समेत आठ पर मुकदमा, पूर्व विधायक पर भी केस
यूपी में बलरामपुर के अस्पतालों में अनियमिततता और भ्रष्टाचार का बड़ा खेल पकड़ाया है। विजिलेंस की जांच में पुष्टि के बाद तीन सीएमओ समेत आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। एक पूर्व विधायक पर भी केस दर्ज किया गया है।

UP News: सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की खुली जांच में बलरामपुर के चिकित्सालयों में अनुरक्षण मदों में कराए गए कार्यों में अनियमितता के आरोप सही पाए गए हैं। विजिलेंस ने मामले में शासन के निर्देश पर बलरामपुर के तत्कालीन सीएमओ डा. घनश्याम सिंह, डा.सत्यदेव और डा. प्रवीन कुमार (अब सेवानिवृत्त), तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव, तत्कालीन अवर अभियंता राम मनोरथ मौर्या, (अब सेवानिवृत्त), तत्कालीन कनिष्ठ सहायक पूनम सिंह, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अजय कुमार श्रीवास्तव, पयागपुर (बहराइच) के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप श्रीवास्तव तथा मेसर्स आरपी ग्रुप आफ कंस्ट्रक्शन, बहराइच के संचालक राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की है।
विजिलेंस की एफआईआर के अनुसार आरपी कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा उसे आवंटित अनुरक्षण कार्य का भुगतान बिना काम कराए या आंशिक काम करा कर पूर्ण भुगतान हासिल किए जाने की वित्तीय अनियमितता के आरोप थे। शासन ने मामले में खुली जांच का आदेश दिया था। जांच में वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर वित्तीय वर्ष 2021-22 में बलरामपुर के चिकित्सालयों में आरवीएसके तथा सपोटिंग सुपरवीजन योजना से जुड़े स्वास्थ्य केंद्रों पर एक वाहन चला कर तीन वाहनों की धनराशि का भुगतान हासिल किए जाने का तथ्य सामने आया।
इसके अलावा टेंडर होने के बाद भी अपने लाभ के लिए तत्कालीन सीएमओ ने एमओआईसी को पूरी छूट देकर बड़े पैमाने पर अनियमितता की। इसमें तत्कालीन सीएमओ डा. घनश्याम सिंह के विरुद्ध आरोप प्रथम दृष्ट्या प्रमाणित होना पाए गए। बलरामपुर में स्वास्थ्य विभाग में वित्तीय वर्ष 2017-18 से लेकर वित्तीय वर्ष 2021-22 के मध्य बिना चिकित्सा प्रतिपूर्ति रजिस्टर बनाए चिकित्सा प्रतिपूर्ति बाउचरों के परीक्षण के नाम पर 10 से 25 प्रतिशत तक कमीशन वसूला गया। चिकित्सालयों में बिना टेंडर प्रिटिंग का कार्य कराकर भी बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई।
वीडीओ भर्ती परीक्षा में धांधली में तीन और आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ। आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 2018 में हुई वीडीओ (ग्राम विकास अधिकारी) भर्ती परीक्षा में धांधली के बहुचर्चित मामले में तीन और वांछित आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ईओडब्ल्यू की लखनऊ इकाई ने आरोपी आजमगढ़ निवासी गंगेश कुमार, संतकबीरनगर निवासी विपिन चौधरी और जौनपुर निवासी सुशील कुमार को पकड़ा है। मामले में इससे पूर्व भी कई आरोपित गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी में कुल 173 आरोपितों के खिलाफ अपराध प्रमाणित हुआ था।
उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 2018 में वीडीओ, समाज कल्याण पर्यवेक्षक तथा ग्राम पंचायत अधिकारी के कुल-1953 पदों पर कार्यदायी संस्था टीसीएस लिमिटेड से भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया पूर्ण कराई थी। परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायत पर शासन ने प्रकरण की जांच एसआईटी (ईओडब्ल्यू) को सौंपी थी। जांच में प्रथम दृष्टया धांधली/अनियमितता प्रमाणित होने पर लखनऊ के थाना विभूतिखंड में मुकदमा दर्ज कराकर विवेचना ईओडब्ल्यू को सौंपी गई थी।
विवेचना में उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तत्कालीन अधिकारी/कर्मचारियों, कार्यदायी संस्था टीसीएस लिमिटेड द्वारा अन्य संस्थाओं, दलालों तथा अभ्यर्थियों से साठगांठ कर गड़बड़ी किए जाने के तथ्य सामने आए थे। भर्ती की लिखित परीक्षा की ओएमआर शीट्स में व्यापक स्तर पर कूटरचना कर अपात्र अभ्यर्थियों को उच्चतम अंक प्राप्त दिलाए गए थे। धांधली प्रमाणित होने पर वीडिओ भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था।
विवेचना के दौरान बयानों, अभिलेख की जांच तथा वैज्ञानिक साक्ष्य की पड़ताल में कुल 173 आरोपितों की भूमिका सामने आई थी। ईओडब्ल्यू ने आपरेशन शिकंजा के तहत मामले में वांछित चल रहे तीन आरोपितों गंगेश कुमार, विपिन चौधरी और सुनील कुमार को गिरफ्तार किया गया।




साइन इन