Major jolt for Maulana Tauqeer Raza Khan accused Bareilly unrest High Court rejects bail plea बरेली बवाल के आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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बरेली बवाल के आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के मुख्य आरोपी तौकीर रजा खान की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। तौकीर पर दंगे की साजिश रचने और लोगों को उकसाने का आरोप लगा है। 

Fri, 5 June 2026 11:27 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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बरेली बवाल के आरोपी मौलाना तौकीर रजा खान को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी

Allahabad Highcourt: बरेली में हुए बवाल के मुख्य आरोपी और आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को हाईकोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। तौकीर पर दंगे की साजिश रचने और लोगों को उकसाने का आरोप है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम परितोष कुमार मालवीय ने जमानत का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया था कि 26 सितंबर को बरेली में नमाज के बाद हिंसा सुनियोजित थी। शहर में कई स्थानों पर आगजनी, फायरिंग और पुलिस पर हमले किए गए। हिंसा के पीछे तौकीर रजा की मुख्य भूमिका थी। हिंसा से जुड़े 10 मामलों में रिपोर्ट दर्ज की गई। सभी में मौलाना तौकीर रजा नामजद है। पुलिस ने उसे हिंसा का मास्टरमाइंड बताया है। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि तौकीर रजा को राजनीतिक दबाव में फंसाया गया है।

आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है। ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और जमानत का आधार नहीं है। मौलाना तौकीर रजा खान फिलहाल फर्रुखाबाद की फतेहगढ़ जेल में बंद है। उसके खिलाफ बरेली के बारादरी, कोतवाली, कैंट, किला और प्रेम नगर थाने में मुकदमा दर्ज है। उसने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत अर्जी दाखिल की थी। उसका तर्क था का राजनैतिक षड़यंत्र के तहत उसे फंसाया गया है।

विदेश में रहने वालों की याचिका पर प्रक्रिया का पालन करें वकील: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिकों अथवा विदेश में रह रहे वादकारियों की ओर से याचिकाएं दायर करने में निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर जोर देते हुए वकीलों को इस संबंध में जागरूक करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने निजामुद्दीन वारसी एवं अन्य मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। अदालत ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को भेजी जाए, ताकि अधिवक्ताओं को विदेशी अथवा देश से बाहर निवास कर रहे मुवक्किलों के मामलों में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के प्रति शिक्षित किया जा सके।

मामले में याचिकाकर्ता, जो वर्तमान में अबू धाबी में रह रहा है, ने पासपोर्ट जब्त किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिका के समर्थन में दाखिल वकालतनामा 12 मार्च 2026 को निष्पादित दिखाया गया था, जबकि याचिकाकर्ता उस समय भारत में मौजूद नहीं था। अदालत ने यह भी पाया कि अधिवक्ता यह स्पष्ट नहीं कर सके कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर वास्तव में किसने किए। प्रक्रियागत खामियों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, हालांकि याचिकाकर्ता को विधि अनुसार नई याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान की। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और अखंडता बनाए रखने के लिए नियमों का कड़ाई से पालन आवश्यक है।

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