माघ मेला में ‘ऑटोमेटिक बाबा’, चलते-चलते करते हैं डांस, 12 साल से ऐसे ही तय कर रहे सफर
पिछले साल दिव्य-भव्य महाकुम्भ की आभा से गदगद अनेक संत-महात्मा भी इस बार के माघ मेला में पधारे हैं, जिनकी तप-साधना आकर्षक का केंद्र है। ऐसे संतों में शामिल हैं चित्रकूट के रहने वाले 48 वर्षीय संत देशराज गर्ग ‘दीनबंधु’ उर्फ ऑटोमेटिक बाबा।

पिछले साल दिव्य-भव्य महाकुम्भ की आभा से गदगद अनेक संत-महात्मा भी इस बार के माघ मेला में पधारे हैं, जिनकी तप-साधना आकर्षक का केंद्र है। ऐसे संतों में शामिल हैं चित्रकूट के रहने वाले 48 वर्षीय संत देशराज गर्ग ‘दीनबंधु’ उर्फ ऑटोमेटिक बाबा। बाबा की खासियत यह है कि वे 12 साल से प्रत्येक पांच पग चलने के बाद अचानक दाएं से बांए चक्रीय रूप से घूमकर पांच बार नृत्य करते हैं। इस दौरान वे आंगिक भाव नृत्य की मुद्रा में रहते हैं और नृत्य पूरा होते ही सामान्य तौर पर चलने लगते हैं।
राह चलते नृत्य करने की अद्भुत कला के कारण उन्हें ‘ऑटोमेटिक बाबा’ कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति बाबा को पहली बार राह चलते हुए अचानक एक ही स्थान पर घूमते हुए देखता है तो लगता है कि उन्हें चक्कर आया होगा और जमीन पर गिर जाएंगे। लेकिन नृत्य का पंच चक्र पूरा होते ही सामान्य मुद्रा में आ जाते हैं। ऑटोमेटिक बाबा महाशिवरात्रि तक माघ मेला में रहेंगे और शिव तांडव की प्रस्तुति करके चित्रकूट प्रस्थान करेंगे।
चित्रकूट के भगवतपुर के रहने वाले ‘ऑटोमेटिक बाबा’ के माता-पिता का निधन हो चुका है। 15 साल की उम्र से वे चित्रकूट के आश्रम में रहने लगे। उसके बाद 12 वर्ष तक वृंदावन में रहे। संन्यास धारण करने के बाद गुरुभाई शिवानंद के सानिध्य में रहकर धर्म-अध्यात्म का ज्ञान प्राप्त किया। खुद को अर्द्धनारीश्वर का रूप मानने वाले बाबा ने बताया कि राह चलते नृत्य की तप-साधना जीवन पर्यंत जारी रहेगी। ‘ऑटोमेटिक बाबा’ ने बताया कि नृत्य कला मनुष्य ही नहीं, बल्कि देवी देवताओं को भी पसंद है। नृत्य एक सार्वभौम कला ईश्वर प्राप्ति का साधन है। इसका जन्म मानव जीवन के साथ हुआ है। नृत्य मनोरंजन ही नहीं बल्कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का साधन भी है। ‘ऑटोमेटिक बाबा’ का पहनावा भी विशिष्ट है। हाथ में कमंडल, सिर पर पीली पगड़ी और कमर में एक अंगौछा बांधकर चलते हैं।




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