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स्मार्ट मीटर की जांच को बनी समिति ने सरकार को भेजी रिपोर्ट, क्यों उठे फिर सवाल?

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटरों की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें मीटरों को 'सटीक' बताया गया है। हालांकि, बिजली कंपनियों के ही पुराने आंकड़ों ने इस रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Tue, 12 May 2026 07:22 AMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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स्मार्ट मीटर की जांच को बनी समिति ने सरकार को भेजी रिपोर्ट, क्यों उठे फिर सवाल?

स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता की जांच के लिए बनी चार सदस्यीय समिति की अंतरिम रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है। रिपोर्ट में मीटर सटीक पाए गए हैं। अब इस रिपोर्ट पर सवाल बिजली कंपनियों के ही उन आंकड़ों के आधार पर खड़े हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने स्मार्ट मीटर के बाद रीडिंग में इजाफे की बात स्वीकार की है।

इस साल मार्च-अप्रैल में नियामक आयोग ने बिजली की नई दरों पर सुनवाई की थी। सुनवाई के पहले नियामक आयोग ने सभी विद्युत वितरण निगमों से स्मार्ट मीटर लगने के पहले और बाद के आंकड़ों का तुलनात्मक ब्योरा मांगा था। वितरण निगमों ने नियामक आयोग को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके यहां की रीडिंग में इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि, बढ़ोतरी के ये आंकड़े सभी वितरण कंपनियों में फर्क थे।

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पश्चिमांचल में थी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की रिपोर्ट पश्चिमांचल ने दी थी। उसने पाया था कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की रीडिंग में 84 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। प्रति उपभोक्ता औसतन 100 यूनिट की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। दक्षिणांचल ने 8 प्रतिशत जबकि पूर्वांचल ने 16 प्रतिशत बढ़ोतरी की रिपोर्ट दी थी। वहीं, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने प्रति उपभोक्ता खपत में औसतन 3 प्रतिशत बढ़ोतरी पाई थी। ऐसे में इस बढ़ी खपत की रिपोर्ट के बाद मीटरों के सटीक चलने की रिपोर्ट पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच का मामला पहुंचा नियामक आयोग

स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता के जांच की अंतरिम रिपोर्ट के बाद अब मामला नियामक आयोग पहुंच गया है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सोमवार को नियामक आयोग लोक महत्व याचिका दायर करते हुए इनकी जांच बेंगलुरु स्थित सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपीआरआई) से करवाने की मांग की है। याचिका में आयोग से मांग की गई है कि वह पावर कॉरपोरेशन को आदेश दे कि सीपीआरआई से जांच करवा कर रिपोर्ट सौंपे।

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उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश में लगभग 85 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे हैं। पूरे प्रदेश से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्मार्ट मीटर तेज चल रहे हैं और उपभोक्ताओं का बिजली खर्च असामान्य रूप से बढ़ गया है।

कई जिलों में विरोध प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पावर कॉरपोरेशन ने चार सदस्यीय समिति बनाकर विभाग की ही लैब में मीटरों की जांच करवा कर उन्हें सटीक बता दिया। वर्मा ने कहा कि 2020 में जब स्मार्ट मीटरों की जांच तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने सीपीआरआई से करवाई थी तो बड़े पैमाने पर तकनीकी खामियां सामने आई थीं।

आईआईटी कानपुर या कहीं और जांच करवाना अनुचित

उत्तर प्रदेश में चल रही स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना केंद्र सरकार द्वारा जारी स्टैंडर्ड बिडिंग गाइडलाइन (एसबीडी) के तहत चल रही है। इसमें प्रावधान है कि जब भी मीटर की गुणवत्ता पर प्रश्न उठे तो उसकी जांचसीपीआरआई, यूटिलिटी लैब या एनएबीएल लैब से करवाई जाएगी। ऐसे में आईआईटी कानपुर या किसी अन्य संस्थान से जांच कराने का प्रयास निर्धारित मानकों और एसबीडी के प्रावधानों के विपरीत है।

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