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जनगणना ड्यूटी में लगाए जा सकेंगे ये कर्मचारी भी, हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी पर लगाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि एलआईसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के दायरे में आता है और इसके कर्मचारियों को प्रगणक या पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करना पूरी तरह कानूनी है।

Tue, 2 June 2026 10:16 PMDeep Pandey प्रयागराज, विधि संवाददाता
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जनगणना ड्यूटी में लगाए जा सकेंगे ये कर्मचारी भी, हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि भारतीय जीवन बीमा निगम के कर्मचारियों को जनगणना ड्यूटी पर लगाया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि एलआईसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान के दायरे में आता है और इसके कर्मचारियों को प्रगणक या पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करना पूरी तरह कानूनी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक ने नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्प्लॉइज यूनियन की याचिका पर उसके अधिवक्ता, केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह और स्थायी अधिवक्ता बृजेश कुमार श्रीवास्तव व अन्य को सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए दिया है।

​नॉर्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्प्लॉइज यूनियन की याचिका में कहा गया था कि जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 4-ए के तहत केवल स्थानीय अधिकारियों के कर्मचारियों को ही जनगणना कार्य के लिए बुलाया जा सकता है। एलआईसी कर्मचारी स्थानीय प्राधिकरण की परिभाषा में नहीं आते इसलिए उन्हें जनगणना ड्यूटी पर लगाना कानूनन गलत है। केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम की धारा 4-ए को अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसे अधिनियम की धारा 6(1)(ई) और 7(सी) के साथ मिलाकर पढ़ा जाना चाहिए, जो कारखानों, फर्मों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाने की अनुमति देती हैं। इसके अलावा जनगणना नियमावली 1990 के नियम 3 के तहत प्रगणक के रूप में शिक्षकों, क्लर्कों या किसी भी अधिकारी या किसी भी व्यक्ति को नियुक्त करने का व्यापक अधिकार प्रशासन को मिला है।

​हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि जनगणना अधिनियम के तहत प्रतिष्ठान शब्द को संकीर्ण रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। एलआईसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान है इसलिए इसके कर्मचारी भी इसके दायरे में आते हैं। जनगणना नियमावली 1990 के नियम 3 की तालिका का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रगणक के पद के लिए कोई भी अधिकारी या कोई भी व्यक्ति शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यह दायरा काफी बड़ा है और इसे सिर्फ सरकारी या स्थानीय निकायों के कर्मचारियों तक सीमित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जनगणना कार्य के लिए नियुक्त होने के बाद संबंधित कर्मचारी को लोक सेवक माना जाता है और कानूनी रूप से वह अपनी ड्यूटी करने के लिए बाध्य है। इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई बरतने पर दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। ​कोर्ट ने यह भी संज्ञान में लिया कि उत्तर प्रदेश सरकार की अधिसूचना के अनुसार भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण (मकानों की सूची और मकानों की जनगणना) का कार्य मई-जून 2026 के दौरान निर्धारित है, जिसके लिए इन कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं।

गौरतलब है कि ​हाईकोर्ट की ही एक डिवीजन बेंच ने पूर्व में एलआईसी कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाने के फैसले को सही ठहराया था हालांकि यह भी कहा था कि एलआईसी का काम प्रभावित न हो, इसके लिए अधिकतम 25 प्रतिशत कर्मचारियों को ही इस काम में लगाया जाना चाहिए।

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