MBBS की सरकारी सीट के नाम पर सीआईसीएफ से लाखों की धोखाधड़ी, ऐसे फंसाया जाल में
MBBS के लिए सरकारी सीट दिलाने के नाम पर सीआईसीएफ से लाखों की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को काउंसलर बताकर लखनऊ के गोमती नगर में एक ऑफिस खोला और पीड़ित से रुपए वसूल कर फरार हो गए।

राजधानी लखनऊ में सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस एडमिशन दिलाने के नाम पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईसीएफ) में तैनात कर्मचारी से 7.30 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। आरोपियों ने खुद को काउंसलर बताकर लखनऊ के गोमती नगर में एक ऑफिस खोला और पीड़ित से रुपए वसूल कर फरार हो गए। पीड़ित सुरेश कुमार की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है।
वह मूलरुप से बिहार के रहने वाले हैं और लखनऊ में तैनात है। बताया जा रहा है ठगी करने वाले सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। पीड़ित ने मामले में रायबरेली निवासी तुषार बाजपेई, लखनऊ निवासी साहिस्ता इकाबाल और बाराबंकी निवासी सीमा शामिल हैं के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। विभूति खंड पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने इससे पहले भी कई अभिभावकों को सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिले का झांसा देकर ठगा है। पुलिस इसे संगठित रैकेट मान रही है।
सीआईएसएफ कर्मी की बेटी दे चुकी नीट की परीक्षा
शिकायतकर्ता सुरेश कुमार की बेटी कोमल भारती मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती है। उसने नीट-2025 की परीक्षा दी थी। बेटी के उज्जवल भविष्य की चिंता और एक सरकारी कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर रुपए ठग लिए। पीड़ित को 9 से 12 अक्टूबर 2025 के बीच एक्सपर्ट एजुकेशन, विशेष खंड गोमती नगर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को काउंसलर बताते हुए कहा कि आपकी बेटी को हमलोग एमबीबीएस के लिए अच्छा सरकारी कॉलेज दिलवा सकते हैं।
लिखित अंडरटेकिंग देकर ली गई बड़ी रकम
काउंसलर तुषार बाजपेई ने सीआईएसएफ कर्मी को बताया कि हम लोग आपकी बेटी को दरभंगा मेडिकल कॉलेज (डीएमसीएच, बिहार) में एडमिशन दिलवा सकते हैं, जो एक सरकारी मेडिकल कॉलेज है। सुरेश को आरोपियों ने गोमती नगर स्थित कार्यालय बुलाया। जहां तुषार वाजपेई से मुलाकात के दौरान आरोपियों ने दाखिले के बदले 7.30 लाख रुपए की मांग की और लिखित रूप में आश्वासन दिया कि यदि किसी कारणवश दाखिला नहीं होता है तो पूरी राशि ब्याज सहित लौटा दी जाएगी। इसी लिखित अंडरटेकिंग और झूठे भरोसे के आधार पर शिकायतकर्ता ने भुगतान कर दिया।
बैंक से ऋण लेकर किया भुगतान,आरोपी हो गए फरार
शिकायतकर्ता ने एसबीआई बैंक से निजी ऋण लेकर अलग-अलग बैंक खातों, यूपीआई और नकद के माध्यम से रुपए का भुगतान किया । यह राशि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, फोन पे यूपीआई और नकद के रूप में ली गई। आरोपियों ने भुगतान की रसीद भी दी, जिससे शिकायतकर्ता को किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ। आरोपियों ने 16 नवंबर 2025 को एलॉटमेंट लेटर देने का वादा किया था, लेकिन 17 नवंबर को जब शिकायतकर्ता सुरेश बेटी की उम्मीद में कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। आसपास पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपी अचानक कार्यालय बंद कर फरार हो गए हैं। आशंका है पीड़ितों की संख्या बड़ी तादाद में हो सकती है। पीड़ित के पास अब फर्जी दस्तावेज के अलावा कुछ नहीं बचा है। आशंका है पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है। पहले भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडमीशन करवाने के नाम पर अलग अलग लोगों से करोड़ो रुपए ठगे जा चुके हैं।




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