सबल होगा और बलवान, दुर्गम क्षेत्र में सेना तक पहुंचाएगा 200 किलो सामान
Kanpur News - - आईआईटी के स्टार्टअप एंड्योरएयर ने विकसित किया है सबल यूएवी - सेना की

- भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने दिया विशेष बजट
- आपदा, युद्ध में आपूर्ति, उपकरण व भारी सामग्री पहुंचाने में करेगा मदद
सबल-200 की ये खासियतें
पेलोड उठाने की क्षमता : 200 किग्रा
यूएवी की डिजाइन : चिनूक हेलीकॉप्टर जैसी
उड़ान का तरीका : वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग
यूएवी का उपयोग : सेना के लिए गोला-बारूद, मेडिकल व ईंधन सप्लाई
विशेष उड़ान क्षेत्र : लद्दाख या हिमालयीय इलाके
सबल-200 का विकास
कानपुर। लद्दाख, सियाचीन जैसे हिमालयीय क्षेत्रों में सेना तक गोला-बारूद, मेडिकल सामग्री, ईंधन, जरूरी उपकरण आदि पहुंचाने के लिए सबल-20 यूएवी (अनमैंड एयर व्हीकल) को और बलवान बनाया जाएगा। क्योंकि इन क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर बहुत अधिक सफल नहीं हैं। वर्तमान में प्रचलित सबल-20 को आधुनिक बनाने के साथ ही बड़ा स्वरूप देकर सबल-200 के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह 200 किलो तक भार उठाने में सक्षम होगा। इस यूएवी को भारत सरकार के निर्देश पर आईआईटी कानपुर का स्टार्टअप एंड्योरएयर तैयार कर रहा है। इसके लिए भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) के तहत विशेष बजट दिया गया है।
आईआईटी कानपुर का योगदान
आईआईटी कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक व एसआईआईसी (स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर) के स्टार्टअप एंड्योरएयर के प्रो. अभिषेक की देखरेख में कई तरह के ड्रोन व यूएवी पर काम हो रहा है। वैज्ञानिकों ने सेना, आपदा राहत और दुर्गम इलाकों में सामान पहुंचाने के लिए सबल-20 स्वदेशी लॉजिस्टिक्स ड्रोन (यूएवी) विकसित किया था। परीक्षण के दौरान यह सेना को काफी पसंद आया था। सेना के कुछ क्षेत्रों में सबल का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। वहीं, स्टार्टअप का ड्रोन अलख व विभ्रम भी सेना के बाड़े में शामिल है। सबल-20 में 20 किग्रा पेलोड उठाने की क्षमता होती है। साथ ही यह बिना रन-वे सीधे ऊपर उड़ान भरने के साथ ही सीधे नीचे उतर सकता है। यह इलेक्ट्रिक व हाईब्रिड सिस्टम आधारित होने से कम लागत वाला ड्रोन है। इन सभी खासियतों के साथ सबल-200 बनाने की तैयारी है। यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर बना होगा। यह ड्रोन 200 किग्रा तक वजन उठाकर ले जा सकेगा। प्रो. अभिषेक के मुताबिक अभी तक इतना वजन उठाने वाला लॉजिस्टिक्स ड्रोन नहीं है। सबल-200 को अत्याधुनिक तकनीक से युक्त बनाया जा रहा है, जिससे यह लॉजिस्टिक के साथ सर्विलांस में भी मददगार साबित होगा।
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