‘जिन्होंने गोलियां चलवाईं, वे राम मंदिर बनवा रहे’, अखिलेश यादव ने लोकसभा से साधा निशाना
उन्होंने कहा कि आपने मनरेगा का नाम बदलकर VB G RAM G रखा लेकिन आप राम जी का अपमान कर रहे हैं। एक सांसद द्वारा कारसेवकों पर गोली चलवाने की बात उठाने पर अखिलेश ने बिना किसी का नाम लिए तीखा हमला बोला। कहा कि जिन्होंने गोली चलाई वे राम मंदिर बना रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को लोकसभा से यूपी की सियासत साधते हुए विरोधियों पर तीखे वार किए। लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान सपा प्रमुख ने भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आपने मनरेगा का नाम बदलकर VB G RAM G रखा लेकिन आप राम जी का अपमान कर रहे हैं। एक सांसद द्वारा कारसेवकों पर गोली चलवाने की बात उठाने पर अखिलेश यादव ने बिना किसी का नाम लिए तीखा हमला बोला। कहा कि जिन्होंने गोली चलाई वे राम मंदिर बना रहे हैं। अखिलेश के इस बयान की सोशल मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। लोग 35 साल पहले अयोध्या में उमड़े कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की उस घटना को याद कर रहे हैं। इन चर्चाओं में यह भी शामिल है कि 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या की धरती पर क्या-क्या हुआ था? और उसमें किसकी क्या भूमिका थी।
अखिलेश यादव ने इसके पहले कहा कि वित्त मंत्री को सदन के सामने मनरेगा को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण योजना थी जिसमें गरीबों को ग्राम स्तर पर रोजगार मिलता था। राइट टू वर्क के अनुसार थी। इस योजना को समाप्त् करते हुए आपने नाम रखा है राम जी। इसके बाद अखिलेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि आपने योजना का नाम रखा है VB G RAM G और हमारे राम कहां बैठे हैं? उनके सवाल पर अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि वह पीछे बैठे हैं। इस पर अखिलेश ने कहा कि जिन्हें बचपन से हम रामजी के रूप में देखते आए, हमारी खुशकिस्मती है कि ‘रामजी’ सदन में बैठे हैं लेकिन आप ‘रामजी’ का अपमान कर रहे हैं। आप उन्हें वहां नहीं बैठा सकते आपको उन्हें यहां बैठाना चाहिए, नंबर दो पर।
इसी दौरान किसी सदस्य ने कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की बात उठाई तो अखिलेश यादव रुक गए। उन्होंने संबंधित सदस्य से अपनी बात दोहराने को कहा। इसके बाद उन्होंने कहा कि जिन्होंने गोली चलवाई वो राम मंदिर बनवा रहे हैं। अगर पता न हो पता कर लीजिए। आधी अधूरी जानकारी के साथ नहीं आइए यहां पर।
35 साल पुराना वो गोलीकांड, जानें क्या हुआ था अयोध्या में
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर बन चुका है लेकिन राम मंदिर का मुद्दा अब भी भारतीय राजनीति में जब तब छा जाता है। 35 साल पहले अयोध्या में उमड़े कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। तब सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे। हिंदू साधु-संत बड़ी संख्या में अयोध्या कूच कर रहे थे। कारसेवकों की भारी भीड़ अयोध्या पहुंचने लगी थी। प्रशासन ने अयोध्या कर्फ्यू लगा रखा था। पुलिस ने बाबरी मस्जिद के 1.5 किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर रखी थी। बताया जाता है कि कारसेवकों की भीड़ बेकाबू हो गई थी।
पहली बार 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों पर गोली चली जिसमें पांच लोगों की मौत हुई। इसके बाद अयोध्या के साथ ही पूरे देश का माहौल गर्म हो गया। इस घटना के दो दिनों बाद ही दो नवंबर को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के करीब पहुंच गए। यह बाबरी ढांचे के बिल्कुल करीब था। हनुमान गढ़ी में उमा भारती और अशोक सिंघल जैसे बड़े हिंदूवादी नेता कारसेवकों का नेतृत्व कर रहे थे, हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी की ओर बढ़ रहे थे।
प्रशासन उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान हनुमान गढ़ी के सामने लाल कोठी के सकरी गली में कारसेवकों पर पुलिस ने फायरिंग कर दी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इसमें करीब डेढ़ दर्ज लोगों की मौत हो गई। कोलकाता से आए कोठारी बंधुओं की भी मौत इसी दौरान हुई थी। मारे गए कारसेवकों की संख्या को लेकर अब भी अलग-अलग दावे जाते हैं। कारसेवकों के शवों के साथ प्रदर्शन भी किया गया। चार नवंबर को कारसेवकों का अंतिक संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के बाद उनकी राख को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया गया था।




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