मैं चीखती रही, किसी ने नहीं सुना, आईटीबीपी जवान की मां ने बयां किया हाथ कटने का दर्द
कानपुर में आईटीबीपी के जवान की मां का हाथ काटने का मामला पूरे देश में छाया हुआ है। हंगामा बढ़ने के बाद मामले की जांच शुरू हुई है। जवान की मां ने अपने बयान में अस्पताल की लापरवाही को बयां किया है।

कानपुर में आईटीबीपी के जवान की मां के कटे हाथ प्रकरण में रेलबाजार पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस जवान की मां निर्मला देवी के बयान दर्ज करने पहुंची तो उन्होंने दर्द की दास्तां सुनाई। कहा, मैं चिल्लाती रही..पर कोई नहीं आया। मेरे हाथ में लगातार दर्द हो रहा था। उसी समय सुनवाई होती तो शायद मेरा हाथ बच जाता।
रेलबाजार पुलिस पारस हॉस्पिटल में भर्ती निर्मला देवी के बयान दर्ज करने पहुंची। निर्मला देवी के भाई राजकुमार के मुताबिक बहन ने पुलिस को बताया कि कृष्णा हॉस्पिटल में जब वह इलाज के लिए भर्ती हुईं तो सबसे पहले उन्हें वीगो लगाया गया। इसके कुछ देर बाद आईसीयू में ड्रिप चढ़ाई गई तो उन्हें दर्द होने लगा जो बाद में बढ़ गया। उन्होंने वहां मौजूद मेडिकल स्टाफ को दर्द के बारे में बताया तो हाथ टाइट करके व्हाइट टेप लगा दिया गया। कहा, गया कुछ देर बाद ठीक हो जाएगा। लेकिन दर्द ठीक अथवा कम होने के बजाय और बढ़ता चला गया। वह चिल्लाती रहीं लेकिन कोई नहीं आया।
दूसरे दिन सुबह बेटा विकास आया तो हाथ में कालापन आने लगा था। बेटे के पूछने पर बताया कि हाथ में तेज दर्द हो रहा है। जिसके बाद उसने वीगो हटवाया। राजकुमार के मुताबिक पुलिस ने उनकी बहन का एक पेज का यह बयान लिखा है। बयान की कई प्रतियां बनाकर उनके अंगूठा निशान लिए गए। इसके साथ ही बयान का वीडियो भी बनाया गया है। पुलिस अपनी विवेचना में बयान को शामिल कर इसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
अस्पताल से हुईं डिस्चार्ज
आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी करीब 14 दिन बाद पारस हॉस्पिटल से बुधवार शाम को डिस्चार्ज हो गईं। वहीं, इलाज में लापरवाही के चलते काटे गए उनके हाथ की हिस्टोपैथालॉजी जांच शुक्रवार को कराई जाएगी। रेलबाजार पुलिस कटा हाथ मेडिकल कॉलेज भेजेगी। बुधवार को भी पुलिस कटा हाथ लेकर मेडिकल की प्रक्रिया पूरी करने पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थी। हिस्टोपैथालॉजी जांच के बाद हाथ को नष्ट करने की प्रक्रिया की जाएगी। उधर, निर्मला देवी को आईटीबीपी कैंप में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
आईटीबीपी जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी का पारस अस्पताल में 17 मई को गैंगरीन के चलते हाथ काटना पड़ा था। इसके तीन दिन बाद सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी के निर्देश पर रेलबाजार पुलिस ने 20 मई को हाथ सील कर सुरक्षित किया था। सीएमओ ने कटे हाथ का हिस्टोपैथालॉजी जांच कराने के निर्देश दिए थे। नौ दिन बाद शुक्रवार को रेलबाजार पुलिस सीलबंद कटे हाथ को लेकर मेडिकल कॉलेज जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद मेडिकल कॉलेज अपने दिशा-निर्देशन में उसे नष्ट करा सकता है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हाथ की जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत होगी। इसी आधार पर केस की सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट में कटा हाथ पेश करने की जरूरत नहीं होगी।
कटे हाथ को सुरक्षित रखने की जरूरत नहीं, मेडिकल रिपोर्ट कोर्ट में पेश होगी : विधि विशेषज्ञों का मानना है कि मानव अंग या मानव शरीर किसी अपराध से प्रभावित होता है तो उसकी मेडिकल रिपोर्ट ही कोर्ट में प्रस्तुत की जाती है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश सिंह चौहान कहते हैं कि गोली लगने से किसी व्यक्ति की मौत होती है तो शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही कोर्ट में पढ़ी जाती है। वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा बताते हैं कि शरीर के किसी भी डैमेज या कटे हुए भाग को बतौर केस प्रापर्टी सुरक्षित रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि विचारण न्यायालय के समक्ष घटना और उसके कारणों से संबंधित एक विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट तैयार की जाती है। उस रिपोर्ट के गुण दोष पर विचार करके न्यायालय फैसला करती है। कटा अंग की जांच से जो मेडिकल रिपोर्ट तैयार होगी, उसे कोर्ट में रखा जाएगा।
यह था पूरा मामला
महाराजपुर आईटीबीपी 32वीं वाहिनी में तैनात जवान विकास सिंह की मां निर्मला देवी की 13 मई को अचानक तबीयत बिगड़ी। सांस लेने में तकलीफ के साथ ही उन्हें हार्ट की भी समस्या थी। विकास ने मां को टाटमिल स्थित कृष्णा हास्पिटल में भर्ती कराया जहां 14 मई की शाम तक वह भर्ती रहीं। इस दौरान उनके स्वास्थ्य में तो सुधार आया लेकिन दाहिना हाथ काला पड़ने लगा। 14 की ही शाम विकास मां को पारस हास्पिटल ले गए जहां 17 मई को उनकी मां का हाथ काटना पड़ा। इस कटे हुए हाथ को लेकर विकास पहले रेलबाजार फिर एडीसीपी पूर्वी और 19 मई को कमिश्नरेट पहुंचे थे। पुलिस आयुक्त के संज्ञान लेने के बाद सीएमओ की छह सदस्यीय टीम ने जांच की और दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।




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