Is the bulldozer action, even after the Supreme Court's stay order, a misuse of power or not? The High Court question सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी बुलडोजर ऐक्शन सत्ता का दुरुपयोग है या नहीं? हाईकोर्ट का सवाल, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी बुलडोजर ऐक्शन सत्ता का दुरुपयोग है या नहीं? हाईकोर्ट का सवाल

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी बुलडोजर ऐक्शन सत्ता का दुरुपयोग है या नहीं? जस्टिस अतुल श्रीधरन एवं जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सवाल किया? कोर्ट ने कहा कि ऐसे कई मामले आए हैं, जहां एफआईआर दर्ज होते ही पहले नोटिस दिए गए और बाद में घरों को गिरा दिया गया।

Tue, 3 Feb 2026 09:15 PMDeep Pandey प्रयागराज, विधि संवाददाता
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सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी बुलडोजर ऐक्शन सत्ता का दुरुपयोग है या नहीं? हाईकोर्ट का सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में बुलडोजर से मकान गिराने की कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के ‘बुलडोजर जस्टिस’ फैसले के बाद भी सूबे में दंड के तौर पर मकान तोड़े जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। जस्टिस अतुल श्रीधरन एवं जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने सवाल किया कि क्या किसी अपराध के तुरंत बाद मकान गिरा देना सरकार की शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसे कई मामले आए हैं, जहां एफआईआर दर्ज होते ही पहले नोटिस दिए गए और बाद में घरों को गिरा दिया गया। यह मामला सिर्फ सरकार के अधिकार का नहीं बल्कि नागरिकों के अधिकारों (अनुच्छेद 14 व 21) से भी जुड़ा है। मामला हमीरपुर के कुछ लोगों की याचिका पर उठा। इन लोगों का कहना है कि उनके एक रिश्तेदार के खिलाफ गंभीर प्रकृति के अपराध का मुकदमा दर्ज है। उसमें वे आरोपी नहीं हैं। फिर भी उन्हें भय है कि उनके घर, लॉज और आरा मिल तोड़े जा सकते हैं।

उनका आरोप है कि उनकी कुछ संपत्तियां पहले ही सील कर दी गई हैं। राज्य सरकार ने कहा कि याचिका जल्दबाजी में दाखिल की गई है और लोगों को पहले नोटिस का जवाब देना चाहिए। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि कानूनी प्रक्रिया के बिना कोई मकान नहीं तोड़ा जाएगा। लेकिन कोर्ट ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं तो इन सवालों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।

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हाईकोर्ट के राज्य सरकार से सवाल-

-क्या सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के निर्णय विशेषकर उसके पैरा 85 और 86 का अनुपालन नहीं हो रहा है?

-क्या ढांचा गिराने का अधिकार अपने आप में ध्वस्तीकरण को उचित ठहराता है?

-क्या अपराध के तुरंत बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कार्यपालिका के विवेक का दुरुपयोग है?

-हाईकोर्ट राज्य के वैधानिक अधिकार और नागरिक के अनुच्छेद 21 व 14 के मौलिक अधिकारों के बीच टकराव को कैसे संतुलित करे?

-क्या ध्वस्तीकरण की उचित आशंका किसी नागरिक के लिए इस न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का कारण बन सकती है?

-यदि हां तो ऐसी आशंका स्थापित करने के लिए न्यूनतम मानक क्या होगा?

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