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ईरान-इजरायल युद्ध की उद्योगों पर मार; गैस में 10 फीसदी की और कटौती, अब इतनी मिलेगी

ईरान-इजरायल युद्ध के बीचउ द्योगों को पाइप लाइन से मिलने वाली गैस में और कटौती कर दी है। अब उद्योगों को 65 फीसदी से घटाकर 55 प्रतिशत गैस दी जाएगी। गैस में 10% की कटौती की गई है। ज्यादा गैस लेने पर 45 प्रतिशत ज्यादा कीमत देनी होगी। 

Sat, 28 March 2026 09:55 AMsandeep हिन्दुस्तान, दिलीप चतुर्वेदी, मथुरा
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ईरान-इजरायल युद्ध की उद्योगों पर मार; गैस में 10 फीसदी की और कटौती, अब इतनी मिलेगी

ईरान-इजरायल युद्ध का असर मथुरा के उद्योगों पर पड़ रहा है। उद्योगों को पाइप लाइन से मिलने वाली गैस में और कटौती कर दी है। अब उद्योगों को 65 फीसदी से घटाकर 55 प्रतिशत गैस दी जाएगी। गैस में 10% की कटौती की गई है। इससे अधिक गैस अगर लेंगे तो उन्हें कीमत करीब 45 प्रतिशत ज्यादा देनी होगी। इसका असर उद्योगों पर पड़ रहा है। गैस महंगी होने के कारण उनकी लागत बढ़ गयी है। कुछ उद्यमियों ने अपनी उत्पादन क्षमता कम कर दी है तो अधिकांश महंगी गैस खरीद कर उद्यम कर रहे हैं।

टोंटी-साड़ी उद्योग पर असर

मथुरा में बड़े उद्योगों में विशेषकर टोंटी और साड़ी उद्योग हैं, जिनमें अधिकांश गैस पर आधारित हैं। वैसे तो इनके कारखानों की संख्या ज्यादा है लेकिन जानकारी के अनुसार करीब दो दर्जन से अधिक टोंटी फैक्ट्री और करीब चार दर्जन से अधिक साड़ी कारखाने गैस से संचालित हैं। साड़ी उद्योग का वार्षिक कारोबार लगभग 250 करोड़ का है। टोंटी कारोबार जहां पूरी तरह गैस पर आधारित है, वहीं साड़ी कारोबार की कुछ प्रक्रिया वायो फ्यूल पर निर्भर है। ईरान और अमेरिका-इस्राइल युद्ध के कारण गैस बने गैस संकट ने इन कारोबारों पर असर बढ़ना शुरू कर दिया है।

ज्यादा गैस उपयोग की तो बिल ज्यादा

युद्ध से पहले गैस की कीमत करीब 55 रुपये प्रति किलो थी। पिछले दिनों इसे बढ़ाकर 70 रुपये प्रति किलो कर दिया। अब अगर 55 प्रतिशत गैस से ज्यादा उपयोग की तो इसकी कीमत 101.29 रुपये प्रति किलो देनी होगी।

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उद्यमियों को दी जानकरी

गैस सप्लाई करने वाली टोरंट ने उद्यमियों को सूचित किया है कि उन्हें हमें गेल से संशोधित ईमेल सूचना प्राप्त हुई है, जिसमें यह सूचित किया गया है कि विभिन्न गैस क्षेत्रों में सीजीटी नेटवर्क के माध्यम से आपूर्ति किए जाने वाले औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए आरएलएलजी आपूर्ति अनुबंधों पर आपूर्ति प्रतिबंध लागू किए जा रहे हैं, जो 65% से घटाकर 55% कर दिए गए हैं। यह प्रतिबंध 25 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा। तदनुसार, औद्योगिक उपभोक्ताओं को आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों के औसत गैस खपत के 55% तक सीमित रहेगी।

10 दिन में कर दी 45 प्रतिशत कटौती

उद्योगों को गैस सप्लाई करने वाली टोरंट कंपनी ने 16 मार्च से उद्योगों की 20 प्रतिशत गैस कटौती की थी। कहा था कि औद्योगिक ग्राहकों को पिछले 6 माह के औसत गैस उपयोग की 80 प्रतिशत ही आपूर्ति की जा सकती है। छह माह में जिस उद्योग ने जितनी गैस का उपयोग किया होगा, उसके औसत के हिसाब से रोजाना 80 प्रतिशत गैस ही उपयोग में लाई जा सकेगी। इसके बाद 20 मार्च को इसे घटाकर 65 प्रतिशत कर दिया था। 25 मार्च से 10 प्रतिशत और घटा दी गई है। इसके हिसाब से उद्योग अब मात्र 55 प्रतिशत गैस का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

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बढ़ जाएगी लागत

गैस कटौती करने और अतिरिक्त गैस लेने पर ज्यादा कीमत देने का असर यह है कि उद्यमियों के उत्पाद की लागत बढ़ जाएगी। उद्यमियों का कहना है कि जिनका ऑर्डर ले लिया है, उनको माल देना है। ऐसे में महंगी गैस लेकर उत्पाद कर रहे हैं। एक उद्यमी ने बताया कि 80 प्रतिशत गैस मिलने की जब जानकारी मिली तो नाइट शिफ्ट बंद कर दी थी, क्योंकि कहा गया था कि ज्यादा गैस यूज करने पर गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। अब ज्यादा गैस उपयोग में लाने पर उसकी कीमत बढ़ा दी है तो वे महंगी गैस उपयोग कर अपना कार्य कर रहे हैं। उससे उत्पादन लागत बढ़ गयी है।

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