High Court ordered an investigation into the pension and gratuity scam across Uttar Pradesh 6 साल की उम्र में पास कर ली 10वीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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6 साल की उम्र में पास कर ली 10वीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार पर चिंता जताई है। साथ ही एक व्यक्ति द्वारा जन्मतिथि में 11 वर्षों की हेरफेर पर नाराजगी जताते हुए आरोपितों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

Sun, 11 Jan 2026 12:25 PMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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6 साल की उम्र में पास कर ली 10वीं! इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने में हो रहे व्यापक भ्रष्टाचार पर चिंता जताई है। कहा कि यह व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला है। कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा जन्मतिथि में 11 वर्षों की हेरफेर, जालसाजी और धोखाधड़ी पर नाराजगी जताते हुए प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को उस व्यक्ति और संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने प्रयागराज के शिवशंकर पाल की याचिका पर यह आदेश दिया।

याचिका में पासपोर्ट अथॉरिटी को याची के पासपोर्ट पर जन्मतिथि 1994 से बदलकर 2005 करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने जब रिकॉर्ड की जांच की तो पाया कि याची ने हाईस्कूल की परीक्षा 2011 में पास की है। कोर्ट ने पूछा कि 2005 में पैदा हुए व्यक्ति के लिए 6 साल की उम्र में 2011 में यह परीक्षा देना कैसे संभव था। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची और ग्राम पंचायत के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ बीएनएस के संबंधित प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। जिन्होंने 04 नवंबर, 2025 को जन्म प्रमाणपत्र जारी किया, जिसमें उसकी जन्मतिथि 11 जुलाई, 2005 दिखाई गई।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के हाईस्कूल परीक्षा प्रमाणपत्र, जो माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से वर्ष 2011 में जारी किया गया, उसमें स्पष्ट रूप से उसकी जन्मतिथि 11 जुलाई, 1994 दर्ज थी। इसके अलावा, पासपोर्ट आवेदन के समय याचिकाकर्ता द्वारा मूल रूप से जमा किए गए आधार कार्ड में भी उसकी जन्मतिथि 1994 दिखाई गई। हालांकि, रिट याचिका के साथ संलग्न आधार कार्ड की एक कॉपी में जन्मतिथि 11 जुलाई, 2005 दिखाई गई। इससे पता चलता है कि बाद में इसमें सुधार किया गया।

कोर्ट ने इन दस्तावेजों खासकर पिछले साल नवंबर में प्रयागराज की ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए गए जन्म प्रमाणपत्र पर गहरी नाराजगी जताई, जिसमें याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 2005 बताई गई। कोर्ट ने कहा कि यह बताना ज़रूरी है कि अगर याचिकाकर्ता की बात मान ली जाती है और जन्मतिथि को 2005 में सुधार दिया जाता है तो हाईस्कूल परीक्षा सर्टिफिकेट में यह दिखेगा कि याचिकाकर्ता ने लगभग छह साल की उम्र में यह परीक्षा दी थी। इसलिए कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर को तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर अनुपालन नहीं किया गया तो वह प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों में पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी भुगतान में संभावित घोटालों की जांच कराने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। कोर्ट ने विशेष रूप से उन मामलों की जांच पर जोर दिया है, जिनमें पेंशनर की मृत्यु के बाद भी उनके नाम पर फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट के जरिए अपात्र लोगों द्वारा पेंशन निकाली जा रही है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने चित्रकूट की 84 वर्षीय महिला जगुआ उर्फ जोगवा को अंतरिम जमानत देते हुए पारित किया। महिला पर आरोप है कि पेंशन एरियर के नाम पर चित्रकूट ट्रेजरी से करीब 2.86 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से उसके खाते में ट्रांसफर कराए गए और बाद में रकम निकाल ली गई। यह धनराशि 7 फरवरी 2024 से 30 मई 2025 के बीच उसके खाते में जमा हुई थी।

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