High Court directed government to provide compensation to victims of Maha Kumbh stampede within 30 days महाकुंभ भगदड़ के पीड़ित परिजनों को 30 दिन में दें मुआवजा; हाईकोर्ट ने दिए निर्देश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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महाकुंभ भगदड़ के पीड़ित परिजनों को 30 दिन में दें मुआवजा; हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुंभ हुई भगदड़ में एक मृत महिला के परिजनों को 30 दिन में मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जांच आयोग की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद मामलों का निस्तारण करने की राज्य सरकार की मांग नामंजूर कर दी है।

Wed, 28 Jan 2026 08:17 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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महाकुंभ भगदड़ के पीड़ित परिजनों को 30 दिन में दें मुआवजा; हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महाकुम्भ 2025 में हुई भगदड़ में मृत महिला के परिजनों को 30 दिन में मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जांच आयोग की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद मामलों का निस्तारण करने की राज्य सरकार की मांग नामंजूर कर दी है। हाईकोर्ट ने मेला प्राधिकरण और आयोग को भगदड़ में जान गंवाने वाली महिला के पति को 30 दिन के भीतर मुआवजे का भुगतान करने को कहा है। मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन न करने पर इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।

गौरतलब है कि 29 जनवरी 2025 की सुबह संगम क्षेत्र में हुई भगदड़ में तीन दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। पिछले साल छह जून को मामले की सुनवाई करते हुए वेकेशन बेंच ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिवारों को अनुग्रह राशि मुआवज़ा देने में देरी को लेकर प्रदेश सरकार से नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने राज्य के इस रवैये को अस्वीकार्य और नागरिकों की दुर्दशा के प्रति उदासीनता का प्रतीक बताया था। यह भी टिप्पणी की थी कि जब सरकार ने मुआवज़े की घोषणा की है तो यह उसकी पूरी ज़िम्मेदारी है कि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

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इस बार सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने बताया कि जांच आयोग ने 17 दिसंबर 2025 को याची का बयान दर्ज कर लिया और भगदड़ के दौरान हुई मौत के मुद्दे की जांच मेला प्राधिकरण के समन्वय से की जा रही है। राज्य सरकार का कहना था कि जांच की समयसीमा जनता के व्यापक हित में बढ़ाई गई है क्योंकि पीड़ितों के कई आश्रित और अभिभावक आयोग के पास देर से आ रहे थे और उनके बयान दर्ज किए जा रहे थे। कोर्ट मुआवज़े के भुगतान में और देरी के लिए सहमत नहीं हुई। साथ ही कहा कि छह जून 2025 को विस्तृत आदेश किया गया था, जिसमें अधिकारियों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को भी कहा गया था। इस स्तर पर याची के मुआवजे के दावे के मुद्दे को जल्द से जल्द निस्तारित करना ज़रूरी लगता है।

कोर्ट ने कमीशन के साथ मेला प्राधिकरण को भी आदेश की तारीख से अगले 30 दिन के भीतर याची के मुआवजे के दावे को निस्तारित करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

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