helplessness officers regarding failure arrest accused unacceptable Lucknow Bench High Court made sharp observation अभियुक्तों की गिरफ्तारी न हो पाने पर अफसरों की लाचारी स्वीकार्य नहीं, हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अभियुक्तों की गिरफ्तारी न हो पाने पर अफसरों की लाचारी स्वीकार्य नहीं, हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आपराधिक मामले में कोर्ट के आदेशों के बावजूद लापरवाही बरतने पर अपर मुख्य सचिव गृह पर तीखी टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के आदेशों की परवाह नहीं करते।

Sun, 7 June 2026 10:39 PMDinesh Rathour लखनऊ, विधि संवाददाता
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अभियुक्तों की गिरफ्तारी न हो पाने पर अफसरों की लाचारी स्वीकार्य नहीं, हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी

Lucknow Bench Highcourt: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आपराधिक मामले में कोर्ट के आदेशों के बावजूद लापरवाही बरतने पर अपर मुख्य सचिव गृह पर तीखी टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा है कि वह हाईकोर्ट के आदेशों की परवाह नहीं करते। न्यायालय ने अपर मुख्य सचिव गृह को कारण बताने को कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश राज्य सरकार को दिया जाए। कोर्ट ने कहा,अभियुक्तों की गिरफ्तारी न हो पाने के संबंध में अधिकारियों द्वारा व्यक्त की गई लाचारी स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने मामले में मुख्य सचिव को भी हलफ़नामा दाखिल करने का आदेश दिया है, साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि हलफ़नामा दाखिल न हुआ तो मुख्य सचिव कोर्ट के समक्ष हाजिर हों। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी।

यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन व न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने गायत्री देवी की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। जालसाजी और जान मारने की धमकी के मामले में विगत 20 मई को पारित उक्त आदेश में न्यायालय ने कटाक्ष किया कि जब हाईकोर्ट द्वारा मॉनीटरिंग करने पर विवेचना में यह लचर रवैया अपनाया जा रहा है तो अन्य मामलों में क्या हाल होगा, यह सहज समझा जा सकता है।

याचिका में पीजीआई थाने में 9 जनवरी 2025 को दर्ज एक एफआईआर की निष्पक्ष और प्रभावी जांच कराने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि मामले में पहले भी कई आदेश पारित किए गए थे और जांच अधिकारियों ने कोर्ट को आश्वस्त किया था कि याची की समस्याओं का शीघ्र समाधान कर दिया जाएगा, इसके बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत गया लेकिन जांच अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी।

न्यायालय ने यह भी पाया कि उसके आदेश के अनुपालन में अपर मुख्य सचिव गृह द्वारा दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे में भी कई विसंगतियां हैं और उससे यह प्रतीत होता है कि कोर्ट की पूर्व टिप्पणियों और निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अभियुक्तों की गिरफ्तारी न हो पाने के संबंध में अधिकारियों द्वारा व्यक्त की गई लाचारी स्वीकार्य नहीं है। अपने आदेश में न्यायालय ने मुख्य सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि अदालत द्वारा इस मामले में समय-समय पर पारित आदेशों में इंगित विसंगतियों के संबंध में सरकार का क्या पक्ष है। साथ ही यह भी बताने को कहा है कि किसके निर्देश पर विशेष सचिव महेंद्र सिंह ने डीसीपी साउथ अमित कुमार आनंद को कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा है।

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